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आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों की सूची

यह सूची भारत के आधुनिक वैज्ञानिकों के बारे में है, प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों के लिए देखें : प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक व गणितज्ञ |

विज्ञान ने हमारे जीवन को अद्भुत आयाम दिया है। विज्ञान के बिना एक दिन की भी कल्पना करना अब मुश्किल है। हमारे फ़ास्ट कम्प्यूटर्स और वाहनों से लेकर एक छोटे से खिलौने तक, सब कुछ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की देन है। वैज्ञानकों ने इनका आविष्कार अपनी कड़ी मेहनत और लगन से किया है। इन साइंटिस्टों ने ही हमारे जीवन को आसान बनाया है। यहां कुछ ऐसे ही आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों की सूची दी गई है जिन्होंने अपने आविष्कार और शोध से पुरे विश्व में नाम कमाया है। आधुनिक भारत में विज्ञान के विस्तार का श्रेय भी इन महान साइंटिस्टों को ही जाता है। इन वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान, गणित, भौतिकी, चिकित्सा, क्वांटम भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान आदि कई क्षेत्रो में अपने ज्ञान का डंका बजाया है। इनमें से कुछ वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में अपने शोध को फ़ैलाया है और अद्भुत आविष्कार किए है। इन वैज्ञानको को हमारा सलाम है।


सी वी रामन C. V. Raman

सीवी रामन (तमिल: சந்திரசேகர வெங்கட ராமன்) (7 नवंबर, 1888 - 21 नवंबर, 1970) भारतीय भौतिक-शास्त्री थे। प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिये वर्ष 1930 में उन्हें भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया। उनका आविष्कार उनके ही नाम पर रामन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। 1954 ई. में उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया तथा 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया था। आपने शिक्षार्थी के रूप में कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। सन् 1906 ई. में आपका प्रकाश विवर्तन पर पहला शोध पत्र लंदन की फिलसोफिकल पत्रिका में प्रकाशित हुआ। उसका शीर्षक था - 'आयताकृत छिद्र के कारण उत्पन्न असीमित विवर्तन पट्टियाँ'। जब प्रकाश की किरणें किसी छिद्र में से अथवा किसी अपारदर्शी वस्तु के किनारे पर से गुजरती हैं तथा किसी पर्दे पर पड़ती हैं, तो किरणों के किनारे पर मद-तीव्र अथवा रंगीन प्रकाश की पट्टियां दिखाई देती है। यह घटना `विवर्तन' कहलाती है। विवर्तन गति का सामान्य लक्षण है। इससे पता चलता है कि प्रकाश तरगों में निर्मित है।

आप सन् 1924 ई. में अनुसंधानों के लिए रॉयल सोसायटी, लंदन के फैलो बनाए गए। रामन प्रभाव के लिए आपको सन् 1930 ई. मे नोबेल पुरस्कार दिया गया। रामन प्रभाव के अनुसंधान के लिए नया क्षेत्र खुल गया।

1948 में सेवानिवृति के बाद उन्होंने रामन् शोध संस्थान की बैंगलोर में स्थापना की और इसी संस्थान में शोधरत रहे। 1954 ई. में भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया। आपको 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार भी प्रदान किया था।

28 फरवरी 1928 को चन्द्रशेखर वेंकट रामन् ने रामन प्रभाव की खोज की थी जिसकी याद में भारत में इस दिन को प्रत्येक वर्ष 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

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सत्येन्द्रनाथ बोस Satyendra Nath Bose
सत्येन्द्रनाथ बोस भारतीय गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री थे| उन्हें 1954 में पद्म विभूषण से नवाजा गया। इसके बाद साल 1958 में वह 'फैलो ऑफ़ द रॉयल सोसाइटी' भी बने। सत्येन्द्रनाथ बोस का जन्म 1 जनवरी 1894 को कोलकाता में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा उनके घर के पास ही स्थित साधारण स्कूल में हुई थी। इसके बाद उन्हें न्यू इंडियन स्कूल और फिर हिंदू स्कूल में भरती कराया गया। स्कूली शिक्षा पूरी करके सत्येन्द्रनाथ बोस ने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया। वह अपनी सभी परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक पाते रहे और उन्हें प्रथम स्थान मिलता रहा। उनकी प्रतिभा देखकर कहा जाता था कि वह एक दिन पियरे साइमन, लेप्लास और आगस्टीन लुई काउथी जैसे गणितज्ञ बनेंगे।

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बीरबल साहनी Birbal Sahni
बीरबल साहनी का जन्म नवंबर, 1891 को पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) के शाहपुर जिले के भेड़ा नामक एक छोटे से व्यापारिक नगर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। इनके पिता रुचि राम साहनी रसायन के प्राध्यापक थे। उनका परिवार वहां डेरा इस्माइल खान से स्थानांतरित हो कर बस गया था।

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जगदीश चन्द्र बसु Jagadish Chandra Bose
डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होनें कई महत्त्वपूर्ण खोजें की। साथ ही वे भारत के पहले वैज्ञानिक शोधकर्त्ता थे। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त किया। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता माना जाता है। वे विज्ञानकथाएँ भी लिखते थे और उन्हें बंगाली विज्ञानकथा-साहित्य का पिता भी माना जाता है। उन्होंने अपने काम के लिए कभी नोबेल नहीं जीता। इनके स्थान पर 1909 में मारकोनी को नोबेल पुरस्कार दे दिया गया।

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विक्रम अंबालाल साराभाई Vikram Sarabhai

विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

डॉ॰ साराभाई के व्यक्तित्व का सर्वाधिक उल्लेखनीय पहलू उनकी रूचि की सीमा और विस्तार तथा ऐसे तौर-तरीके थे जिनमें उन्होंने अपने विचारों को संस्थाओं में परिवर्तित किया। सृजनशील वैज्ञानिक, सफल और दूरदर्शी उद्योगपति, उच्च कोटि के प्रवर्तक, महान संस्था निर्माता, अलग किस्म के शिक्षाविद, कला पारखी, सामाजिक परिवर्तन के ठेकेदार, अग्रणी प्रबंध प्रशिक्षक आदि जैसी अनेक विशेषताएं उनके व्यक्तित्व में समाहित थीं। उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि वे एक ऐसे उच्च कोटि के इन्सान थे जिसके मन में दूसरों के प्रति असाधारण सहानुभूति थी। वह एक ऐसे व्यक्ति थे कि जो भी उनके संपर्क में आता, उनसे प्रभावित हुए बिना न रहता। वे जिनके साथ भी बातचीत करते, उनके साथ फौरी तौर पर व्यक्तिगत सौहार्द स्थापित कर लेते थे। ऐसा इसलिए संभव हो पाता था क्योंकि वे लोगों के हृदय में अपने लिए आदर और विश्वास की जगह बना लेते थे और उन पर अपनी ईमानदारी की छाप छोड़ जाते थे।

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ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम A. P. J. Abdul Kalam
अबुल पाकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम, (15 अक्टूबर 1931 – 27 जुलाई 2015) जिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। अब्दुल कलाम के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा। इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई। कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये।

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होमी जे भाभा Homi J. Bhabha
होमी जहांगीर भाभा भारत के एक प्रमुख वैज्ञानिक और स्वप्नदृष्टा थे जिन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। उन्होने मुट्ठी भर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में नाभिकीय उर्जा पर अनुसन्धान आरम्भ किया। उन्होंने नाभिकीय विज्ञान में तब कार्य आरम्भ किया जब अविछिन्न शृंखला अभिक्रिया का ज्ञान नहीं के बराबर था और नाभिकीय उर्जा से विद्युत उत्पादन की कल्पना को कोई मानने को तैयार नहीं था। उन्हें 'आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम' भी कहा जाता है। भाभा का जन्म मुम्बई के एक सभ्रांत पारसी परिवार में हुआ था। उनकी कीर्ति सारे संसार में फैली। भारत वापस आने पर उन्होंने अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाया। भारत को परमाणु शक्ति बनाने के मिशन में प्रथम पग के तौर पर उन्होंने 1945 में मूलभूत विज्ञान में उत्कृष्टता के केंद्र टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआइएफआर) की स्थापना की। डा. भाभा एक कुशल वैज्ञानिक और प्रतिबद्ध इंजीनियर होने के साथ-साथ एक समर्पित वास्तुशिल्पी, सतर्क नियोजक, एवं निपुण कार्यकारी थे। वे ललित कला व संगीत के उत्कृष्ट प्रेमी तथा लोकोपकारी थे।

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श्रीनिवास रामानुजन् Srinivasa Ramanujan
श्रीनिवास रामानुजन् इयंगर एक महान भारतीय गणितज्ञ थे। इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है। इन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला, फिर भी इन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिए। इन्होंने अपने प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में अद्भुत अविष्कार किए वरन भारत को अतुलनीय गौरव भी प्रदान किया।

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उपेन्द्रनाथ ब्रह्मचारी Upendranath Brahmachari
राय बहादुर सर उपेन्द्रनाथ ब्रह्मचारी (19 दिसम्बर 1873 – 6 फरवरी 1946) भारत के एक वैज्ञानिक एवं अपने समय के अग्रगण्य चिकित्सक थे। 1922 में उन्होने यूरिया स्टिबेमाइन (कार्बोस्टिबेमाइन) का संश्लेषण किया और निर्धारित किया कि यह काला-अजार के उपचार के लिए उन पदार्थों का एक अच्छा विकल्प है जिनमें एंटिमनी होता है।

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जी.एन. रामचंद्रन G. N. Ramachandran

गोपालसमुद्रम नारायणन रामचंद्रन, या जी.एन. रामचंद्रन, एफआरएस एक भारतीय भौतिक विज्ञानी थे, जो अपने काम के लिए जाने जाते थे, इनके कारण पेप्टाइड संरचना को समझने के लिए "रामचंद्रन प्लाट" का निर्माण हुआ। वह कोलेजन की संरचना के लिए ट्रिपल-हेलिकल मॉडल का प्रस्ताव करने वाले पहले व्यक्ति थे।

रामचंद्रन का जन्म एर्णाकुलम शहर में हुआ था, जो भारत के कोचीन राज्य में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में था। उन्होंने 1939 में सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में बीएससी ऑनर्स पूरा किया। उन्होंने 1942 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में प्रवेश लिया। भौतिकी में अपनी रुचि का एहसास करते हुए, उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी। वी। रमन की देखरेख में अपने गुरु और डॉक्टरेट की थीसिस को पूरा करने के लिए भौतिकी विभाग का रुख किया। 1942 में, उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की, बंगलौर से प्रस्तुत उनकी थीसिस के साथ (वे उस समय किसी भी मद्रास कॉलेज में उपस्थित नहीं हुए थे)।  

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वामन दत्तात्रेय पटवर्धन Waman Dattatreya Patwardhan
वामन दत्तात्रेय पटवर्धन (30 जनवरी 1917 - 27 जुलाई 2007) एक भारतीय परमाणु रसायनज्ञ, रक्षा वैज्ञानिक और विस्फोटक इंजीनियरिंग के विज्ञान के विशेषज्ञ थे। वह भारत के विस्फोटक अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (जिसे अब उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL) के रूप में जाना जाता है) के संस्थापक निदेशक थे)। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, भारतीय परमाणु कार्यक्रम और उनके शुरुआती दौर में मिसाइल कार्यक्रम में योगदान के कारण भारत में प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक माना जाता है। उन्होंने थुम्बा में भारत के पहले अंतरिक्ष रॉकेट के लिए ठोस प्रणोदक विकसित किया। वह भारत के पहले परमाणु उपकरण के विस्फोट प्रणाली को विकसित करने के लिए ज़िम्मेदार था, जिसका 1974 में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था,  एक ऑपरेशन कोडिंग स्माइलिंग बुद्धा।

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मेघनाद साहा Meghnad Saha
मेघनाद साहा सुप्रसिद्ध भारतीय खगोलविज्ञानी (एस्ट्रोफिजिसिस्ट्) थे। वे साहा समीकरण के प्रतिपादन के लिये प्रसिद्ध हैं। यह समीकरण तारों में भौतिक एवं रासायनिक स्थिति की व्याख्या करता है। उनकी अध्यक्षता में गठित विद्वानों की एक समिति ने भारत के राष्ट्रीय शक पंचांग का भी संशोधन किया, जो 22 मार्च 1957 से लागू किया गया। इन्होंने साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान तथा इण्डियन एसोसियेशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईन्स नामक दो महत्त्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की।

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के एस कृष्णन K. S. Krishnan
कार्यमाणिवकम् श्रीनिवास कृष्णन् भारत के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी थे। रमन प्रभाव की खोज में सी वी रमन के साथ वे भी सम्मिलित थे जिसके लिये सी वी रमन को 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। के एस कृष्णन को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी क्षेत्र में पद्म भूषण से 1954 में सम्मानित किया गया। ये तमिलनाडु राज्य से हैं। श्रीनिवास कृष्णन का जन्म 4 दिसम्बर 1898 ई. को हुआ था। अमेरिकन कालेज, मदुरा, मद्रास क्रिश्चियन कालेज एवं युनिवर्सिटी कालेज ऑव सायंस, कलकत्ता में शिक्षा प्राप्त की। इंडियन एसोसियेशन फॉर कल्टिवेशन ऑव सांयस (कलकत्ता) के तत्वावधान में सन् 1923 तक अनुसंधान कार्य किया। 1933-42 ई. तक महेंद्रलाल सरकार रिसर्च प्रोफेसर रहे। उसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर थे। सन् 1947 में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला दिल्ली के प्रथम संचालक बने। 14 जून 1961 ई. को मृत्यु हुई।

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यमुना कृष्णन Yamuna Krishnan
यमुना कृष्णन (जन्म 25 मई 1974) शिकागो विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर हैं। उनका जन्म मलप्पुरम जिले के परापनानगडी केरल में हुआ था। वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के सबसे युवा महिला प्राप्तकर्ता हैं।

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नरेन्द्र करमारकर 2
नरेन्द्र कृष्ण करमारकर (जन्म 1955 ग्वालियर में ) भारत के गणितज्ञ हैं। इन्होने 'करमारकर कलनविधि' विकसित की। एल्गोरिथ्म रैखिक प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में एक आधारशिला है। उन्होंने अपना प्रसिद्ध परिणाम 1984 में प्रकाशित किया जब वह न्यू जर्सी में बेल लेबोरेटरीज के लिए काम कर रहे थे।

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दर्शन रंगनाथन Darshan Ranganathan
दर्शन रंगनाथन (4 जून 1941 - 4 जून, 2001) भारत के एक कार्बनिक रसायनज्ञ थे। उन्होंने जैव-जैविक रसायन विज्ञान में काम के किया था, जिसमें "प्रोटीन तह में अग्रणी काम शामिल है।"" उन्हें "सुपरमौलेकुल्युलर असेंबलियों, आणविक डिज़ाइन, महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं के रासायनिक सिमुलेशन, कार्यात्मक हाइब्रिड पेप्टाइड्स के संश्लेषण और नैनोट्यूब के संश्लेषण में उनके काम के लिए भी मान्यता मिली।

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रोहिणी गोडबोले Rohini Godbole
रोहिणी गोडबोले एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और अकादमिक है। वह उच्च ऊर्जा भौतिकी, भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर के केंद्र में प्रोफेसर हैं। वह भारत के विज्ञान के तीनों अकादमियों और विकासशील विश्व के विज्ञान अकादमी (टीयूएएस) के निर्वाचित साथी हैं। रोहिणी गोडबोले ने अपनी बीएससी सर परशुरामभाऊ कॉलेज, पुणे विश्वविद्यालय से प्राप्त कि और एमएससी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई से की। स्टॉनी ब्रुक में स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के सैद्धांतिक कण भौतिकी में पीएचडी की उन्होंने।

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अनिल काकोदकर Anil Kakodkar
अनिल काकोदकर (जन्म:11 नवम्बर 1943) एक भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी एवं यांत्रिक अभियन्ता है। नवम्बर, 2009 तक वे भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एवं भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव थे। इसके पूर्व वे सन् 1996 से 2000 तक भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के निदेशक थे। वे भारतीय रिज़र्व बैंक में भी निदेशक हैं।

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अदिति पंत 3
अदिति पंत एक भारतीय समुद्र विज्ञानी हैं। वह अंटार्कटिका की पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने 1983 में भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में भूविज्ञानी सुदीप्ता सेनगुप्ता के साथ मुलाकात की। वह राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे विश्वविद्यालय और महाराष्ट्र विज्ञान अकादमी सहित संस्थानों में प्रमुख पदों पर रह चुकी हैं।

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अभय अष्टेकर Abhay Ashtekar
अभय अष्टेकर (जन्म 5 जुलाई, 1949) भारत के एक सैद्धान्तिक भौतिकशास्त्री हैं। वे पेन्सिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में भौतिकी के एबर्ली प्रोफेसर तथा गुरुत्वाकर्षण भौतिकी एवं भूमिति संस्थान (Institute for Gravitation Physics and Geometry) के संचालक के रूप में कार्यरत हैं। अष्टेकर चरों के जनक के नाते वे लूप क्वांटम गुरुत्व तथा लूप क्वांटम कोस्मोलोजी के संस्थापकों में से एक हैं। लूप क्वाण्टम गुरुत्व के ऊपर उन्होने बहुत से लेख लिखे हैं जो गैर-भौतिविज्ञानियों को भी समझने लायक हैं। वे 'जनरल रिलेटिविटी ऐण्ड ग्रैविटेशन' नामक एक जनरल के दो मुख्य सम्पादकों में से एक हैं।

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रोद्दम नरसिंहा Roddam Narasimha
रोद्दम नरसिंहा को 1986 में भारत सरकार ने विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ये कर्नाटक राज्य से हैं। रोद्दम नरसिंहा (20 जुलाई 1933 - 14 दिसंबर 2020) एक भारतीय एयरोस्पेस वैज्ञानिक और द्रव डायनामिस्ट थे। वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (1962-1999), नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (1984-1993) के निदेशक और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR, 2000) में इंजीनियरिंग मैकेनिक्स यूनिट के अध्यक्ष थे।

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चारुसीता चक्रवर्ती Charusita Chakravarty
चारुसीता चक्रवर्ती एक भारतीय शैक्षिक और वैज्ञानिक थी। 1999 से वह दिल्ली में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर थी। 2009 में उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1999 में, उन्हें बी एम बिड़ला विज्ञान पुरस्कार प्राप्त हुआ। वह एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बंगलौर कम्प्यूटेशनल सामग्री विज्ञान, जवाहर लाल नेहरू सेंटर के केंद्र में एक एसोसिएट सदस्य थी।

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राजेश्वरी चटर्जी Rajeshwari Chatterjee
राजेश्वरी चटर्जी (24 जनवरी 1922- 3 सितम्बर 2010) एक भारतीय वैज्ञानिक और एक शिक्षिका थी। वह कर्नाटक से पहली महिला इंजीनियर थी। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बंगलौर में उसके कार्यकाल के दौरान, चटर्जी एक प्रोफेसर थी और फिर बाद में इलेक्ट्रो-संचार इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष थी।

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अमल कुमार रायचौधुरी Amal Kumar Raychaudhuri

अमल कुमार रायचौधुरी 14 सितंबर 1923 - 18 जून 2005) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी थे, जो सामान्य सापेक्षता और ब्रह्मांड विज्ञान में अपने शोध के लिए जाने जाते थे।

डॉ रायचौधुरी का जन्म बैसल (बांग्लादेश में) से आने वाले एक बैद्य परिवार में 14 सितंबर 1923 को सुरबाला और सुरेशचंद्र रायचौधरी के घर हुआ था। वह सिर्फ एक बच्चा था जब परिवार कोलकाता चला गया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तीर्थपति संस्थान में की और बाद में हिंदू स्कूल, कोलकाता में से मैट्रिक पूरा किया। 2005 में अपनी मृत्यु से ठीक पहले बनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म में खुलासा किया कि वह अपने विद्वानों से गणित के बारे में बेहद भावुक था और समस्याओं को हल करने से उसे बहुत खुशी मिलती थी । यह तथ्य हो सकता है कि उनके पिता एक स्कूल में गणित के शिक्षक थे और उन्होंने उन्हें प्रेरित भी किया। उसी समय क्योंकि उनके पिता कहने में इतने 'सफल' नहीं थे, इसलिए उन्हें गणित, उनकी पहली पसंद, कॉलेज में सम्मान के रूप में लेने के लिए हतोत्साहित किया गया था।

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जोगेश पति 5

जोगेश पति ने अपनी स्कूली शिक्षा गुरु प्रशिक्षण स्कूल, बारीपाड़ा से शुरू की और फिर एम के सी हाई स्कूल में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने मैट्रिक पास किया। उन्हें एमपीसी कॉलेज में भर्ती कराया गया और उत्तीर्ण किया गया |

वह मैरीलैंड सेंटर फॉर फंडामेंटल फिजिक्स और फिजिक्स विभाग में मैरीलैंड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस हैं, जो यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड कॉलेज ऑफ कंप्यूटर, मैथमेटिकल, और नेचुरल साइंसेज का हिस्सा हैं।

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मित्तीय मुखर्जी Mitali Mukerji
मिताली मुखर्जी, मानव जीनोमिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स और इंटिग्रेटिव बायोलॉजी में एक सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट हैं। वह "आयुरजीनोमिक्स" नामक एक अभिनव अध्ययन में भी शामिल है, जो कि जीनोमिक्स के साथ पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद का मिश्रण है। मेडिकल साइंसेज के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2010 में प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त हुआ।

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एम एस स्वामिनाथन M. S. Swaminathan
एम एस स्वामिनाथन (जन्म: 7 अगस्त 1925), कुम्भकोणम पौधों के जेनेटिक वैज्ञानिक हैं जिन्हें भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है। उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकिसित किए। उन्हें विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1972 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 'हरित क्रांति' कार्यक्रम के तहत ज़्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज ग़रीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे। इस क्रांति ने भारत को दुनिया में खाद्यान्न की सर्वाधिक कमी वाले देश के कलंक से उबारकर 25 वर्ष से कम समय में आत्मनिर्भर बना दिया था। उस समय से भारत के कृषि पुनर्जागरण ने स्वामीनाथन को 'कृषि क्रांति आंदोलन' के वैज्ञानिक नेता के रूप में ख्याति दिलाई। उनके द्वारा सदाबाहर क्रांति की ओर उन्मुख अवलंबनीय कृषि की वकालत ने उन्हें अवलंबनीय खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व नेता का दर्जा दिलाया। एम. एस. स्वामीनाथन को 'विज्ञान एवं अभियांत्रिकी' के क्षेत्र में 'भारत सरकार' द्वारा सन 1967 में 'पद्म श्री', 1972 में 'पद्म भूषण' और 1989 में 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

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एन्नाक्कल चांडी जॉर्ज सुदर्शन E. C. George Sudarshan
एन्नाक्कल चांडी जॉर्ज सुदर्शन (ई॰ सी॰ जी॰ सुदर्शन के नाम से भी जाने जाते थे; ( जन्म 16 सितम्बर 1931 - 13 मई 2018) टेक्सास विश्वविद्यालय, ऑस्टिन में प्रोफेसर, लेखक और भारतीय वैज्ञानिक थे। जॉर्ज सुदर्शन का भारत में केरल राज्य के कोट्टायम जिले के पल्लम नामक ग्राम में जन्म सैंट थॉमस क्रिस्टिंस परिवार में हुआ था। एक ईसाई परिवार में पालन पोषण के बावजूद उन्होनें धर्म छोड़ कर और वेदान्ती बन गये तथा एक सर्वात्मवादी (सभी देवताओं को मानने वाला) बने। उन्होनें धर्म छोड़ने का कारण चर्च का भगवान के प्रति दर्शन और चर्च में आध्यात्मिक अनुभव की कमी जैसे कारणों से असहमति का उल्लेख किया।

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Daya Shankar Kulshreshtha

कुलश्रेष्ठ ने बी.एससी (1969) और एम.एससी। (1971) जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से डिग्री ली। उन्होंने अपनी पीएच.डी. 1979 में की |दया शंकर कुलश्रेष्ठ का जन्म दिसंबर, 1951 में हुआ था | वो एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं, जो क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत, स्ट्रिंग सिद्धांत और सामान्य सापेक्षता के औपचारिक पहलुओं में विशेषज्ञता रखते हैं।

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अर्चना भट्टाचार्य Archana Bhattacharyya
अर्चना भट्टाचार्य (जन्म 1948) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी है। वह योण क्षेत्र भौतिकी, जीओमैग्नेटिज्म और अंतरिक्ष मौसम के क्षेत्र में माहिर हैं। वह भारतीय संचार संस्थान, नवी मुंबई के निदेशक है। डॉ भट्टाचार्य 1978 में भारतीय भौगोलिकता संस्थान (आईआईजी), मुंबई में काम किया। उन्होंने 1986-87 के दौरान इलिनोइस विश्वविद्यालय में, यूआरबीएन-शेंपेना के समूह के साथ काम किया और 1998-2000 के दौरान वह मैसाचुसेट्स, यूएसए में वायुसेना अनुसंधान प्रयोगशाला में वरिष्ठ एनआरसी निवासी अनुसंधान सहयोगी थे। वह 2005-2010 के दौरान आईआईजी के निदेशक थी। वर्तमान में, वह आईआईजी में एक एमेरिटस वैज्ञानिक है।

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गायती हसन Gaiti Hasan
गायती हसन एक भारतीय वैज्ञानिक है जो आणविक जीव विज्ञान, आनुवंशिकी, तंत्रिका विज्ञान और सेल संकेतों के क्षेत्र में शोध करती है।. हसन भारतीय वैज्ञानिक विज्ञान और प्रौद्योगिकीविदों की सर्वोच्च संस्था, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के एक सदस्य हैं। वह नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (एनसीबीएस), बैंगलोर में वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में सेवा कर रही हैं।

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राधा बालकृष्णन Radha Balakrishnan
राधा बालकृष्णन एक भारतीय भौतिक विज्ञानी हैं। वह मैथमेटिकल साइंसेज संस्थान, चेन्नई में काम करती हैं जो भौतिकी में गैर-रेखीय गतिशीलता और अनुप्रयोगों से संबंधित है। बालाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिकी में बीएससी की और 1965 में एमएससी की डिग्री पप्राप्त की और ब्रांडेइस विश्वविद्यालय से पीएचडी की। 1980 में वह एक रिसर्च एसोसिएट के रूप में मद्रास विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक भौतिकी विभाग में काम किया था। वह 1987 में चेन्नई में गणित विज्ञान संस्थान में शामिल हुए। बालाकृष्णन ने अपने काम के लिए भौतिक विज्ञान में तमिलनाडु वैज्ञानिक पुरस्कार (1999) प्राप्त किया। उन्होंने गैर-अक्षीय गतिशीलता में मूल और अग्रणी योगदान के लिए आईएनएसए के प्रोफेसर दर्शन रंगनाथन मेमोरियल व्याख्याता पुरस्कार (2005) भी प्राप्त किया।

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अरविंद जोशी 6

अरविंद कृष्ण जोशी (5 अगस्त, 1929 - 31 दिसंबर, 2017) हेनरी सालवेटोरी प्रोफेसर ऑफ कंप्यूटर और संज्ञानात्मक विज्ञान पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग में थे। जोशी ने पेड़ से सटे व्याकरण की औपचारिकता को परिभाषित किया जो अक्सर कम्प्यूटेशनल भाषा विज्ञान और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण में उपयोग किया जाता है।

जोशी ने पुणे विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान में अध्ययन किया, जहां उन्हें क्रमशः इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई और संचार इंजीनियरिंग में डीआईआईएससी से सम्मानित किया गया। जोशी का स्नातक काम पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में किया गया था, और उन्हें 1960 में पीएचडी से सम्मानित किया गया था। वह पेन में एक प्रोफेसर बन गए और इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन कॉग्निटिव साइंस के सह-संस्थापक और सह-निदेशक थे।

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अभय भूषण 7

अभय के भूषण (जन्म 23 नवंबर 1944, इलाहाबाद, भारत में) इंटरनेट टीसीपी / आईपी आर्किटेक्चर के विकास में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहे हैं, और फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल के लेखक हैं ( जो उन्होंने आईआईटी-कानपुर में छात्र थे और ईमेल प्रोटोकॉल के शुरुआती संस्करणों के दौरान काम करना शुरू किया। वह वर्तमान में एस्क्वायर इंक के अध्यक्ष और आईआईटी-कानपुर फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं।

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अखिलेश के गहरवार Akhilesh K. Gaharwar

अखिलेश के गहरवार (जन्म 3 जनवरी, 1982, नागपुर, भारत) एक भारतीय शैक्षणिक और टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। उनकी प्रयोगशाला का लक्ष्य सेल-नैनोमटेरियल्स इंटरैक्शन को समझना और क्षतिग्रस्त ऊतक की मरम्मत और पुनर्जनन के लिए स्टेम सेल व्यवहार को संशोधित करने के लिए नैनो-रणनीति का विकास करना है।

गहरवार ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रॉबर्ट लैंगर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अली खादमहोसिनी के साथ अपना पोस्टडॉक्टरल प्रशिक्षण पूरा किया। प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे और बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से।

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अमर गुप्ता Amar Gupta

अमर गुप्ता (जन्म 1953) एक कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, जो मूल रूप से गुजरात, भारत और अब संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित हैं। गुप्ता ने शिक्षाविदों, निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में पदों पर काम किया है, जिसमें प्रौद्योगिकी और व्यवसाय के चौराहे पर विश्लेषण और अवसरों का लाभ उठाना शामिल है, साथ ही साथ प्रोटोटाइप प्रणालियों का डिजाइन, विकास और कार्यान्वयन, जिसने नई तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाया। और प्रौद्योगिकियों। उन्होंने कई नवीन उत्पादों और सेवाओं से संबंधित कई रणनीतिक, व्यावसायिक, तकनीकी, आर्थिक, कानूनी और सार्वजनिक नीति बाधाओं को दूर किया है।

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अविनाश काक Avinash Kak
अविनाश काक (उर्फ अवि काक, जन्म : 1944) का जन्म श्रीनगर, कश्मीर में हुआ। वह पर्ड्यू विश्वविद्यालय में विद्युत एवं संगणक अभियांत्रिकी के एक प्रोफेसर है, जिन्होंने सूचना संसाधन के कई अलग अलग पहलुओं पर अग्रणी अनुसंधान किया है। उन्होंने संगणन शास्त्र पर भी कई ग्रन्थ लिखे हैं।

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अमर बोस Amar Bose
अमर गोपाल बोस (जन्म 2 नवंबर, 1929) बोस कार्पोरशन के संस्थापक और पीठाध्यक्ष हैं। भारतीय मूल के अमेरीकी और विद्युत अभियंता अमर गोपाल बोस के पास 2007 के आंकड़ों फोरबीस 400 के अनुसार उनकी कुल संपत्ति को 1.8 बिलियन डॉलर आँका गया था। बंगाली पिता और श्वेत अमेरिकी मां की संतान बोस का जन्म और पालन पोषण पेन्सिलवेनिया के फ़िलेडेल्फ़िया शहर में हुआ। उनके पिता नोनी गोपाल बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी होने के कारण औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार द्वारा जेल भी भेज गए। तत्कालीन सरकार की अन्य कारवाहियों के बचने के लिए वे 1920 में भागकर कलकत्ता आ गए।

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ए एस किरण कुमार A. S. Kiran Kumar
ए एस किरण कुमार भारत के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं तथा वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष हैं। 14 जनवरी 2015 को उन्होंने इसरो के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। इससे पू्र्व वे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद के निदेशक थे।श्री किरण कुमार ने 1975 में इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र से अपने करियर की शुरूआत की थी। बाद में वह इस केंद्र के एसोसिएट डायरेक्टर और मार्च, 2012 में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक बने। उन्होंने एयरबोर्न के लिए इलेक्ट्रो ऑप्टिकल इमेजिंग सेंसर के निर्माण और विकास, भास्कर टीवी पेलोड से लेकर वर्तमान मार्स कलर कैमरा, थर्मल इंफ्रेडिड इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर और भारत के मार्स आर्बिटर अंतरिक्ष यान के मार्स उपकरणों के लिए मीथेन सेंसर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।श्री किरण कुमार ने मंगल ग्रह की ओर भेजे गए मार्स आर्बिटर अंतरिक्ष यान के साथ साथ इसे मंगल की कक्षा में स्थापित करने के मामले में सफलतापूर्वक रणनीतियां बनाई। उन्होंने भूमि, महासागर, वातावरण और ग्रह से जुड़े अध्ययनों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। श्री किरण कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन, पृथ्वी निगरानी उपग्रह समिति और नागरिक अंतरिक्ष सहयोग पर भारत-अमरीका संयुक्त कार्यकारी समूह जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों में इसरो का प्रतिनिधित्व किया।

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अमीय चरण बैनर्जी 8

अमिया चरण बनर्जी (23 जनवरी 1 (9 1 - 31 मई 1 9 6)) एक भारतीय गणितज्ञ थे।

अमिया चरण बनर्जी का जन्म 23 जनवरी 1891 को उनके नाना के घर भागलपुर में हुआ था। जैसा कि उनके पिता के पास एक हस्तांतरणीय नौकरी थी, वे ज्यादातर भागलपुर जिला स्कूल में पढ़े थे। वे मैट्रिक परीक्षा में प्रथम स्थान पर रहे और कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने गणित में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और इंग्लैंड जाने के लिए बिहार सरकार की छात्रवृत्ति हासिल की। वे क्लेयर कॉलेज, कैम्ब्रिज से रैंगलर और फाउंडेशन स्कॉलर बने।

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ए शिवाथानु पिल्लई A. Sivathanu Pillai

शिवाथानु पिल्लई एक भारतीय वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने पूर्व में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (2015-2018) में मानद गणमान्य प्रोफेसर के रूप में कार्य किया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग (2015-2016) में IIT दिल्ली में एक मानद प्रोफेसर थे ) और भारतीय विज्ञान संस्थान (2014-2015) में एक विजिटिंग प्रोफेसर।

वे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एसोसिएट्स के अध्यक्ष हैं | और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्होंने पूर्व में वर्ष 1996 से 2014 तक मुख्य अनुसंधान और विकास नियंत्रक के रूप में कार्य किया और वर्ष 1999 से 2014 तक भारतीय गणतंत्र के रक्षा मंत्रालय में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन में "प्रतिष्ठित वैज्ञानिक" के पद पर रहे। वह ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक-सीईओ और प्रबंध निदेशक भी हैं।

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समीर ब्रह्मचारी 9

समीर कुमार ब्रह्मचारी (जन्म 1 जनवरी 1952) एक भारतीय बायोफिज़िसिस्ट और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक और पूर्व सचिव, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR), सरकार भारत। वह इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB), नई दिल्ली के संस्थापक निदेशक और ड्रग डिस्कवरी (OSDD) प्रोजेक्ट के लिए ओपन सोर्स के मुख्य संरक्षक हैं। वह जे सी बोस फैलोशिप अवार्ड, डीएसटी (2012) के प्राप्तकर्ता हैं।

ब्रह्मचारी ने 1972 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में बी.एससी की उपाधि प्राप्त की, इसके बाद 1974 में एम.एससी (शुद्ध रसायन विज्ञान) किया। 1978 में उन्होंने बैंगलोर में भारतीय विज्ञान संस्थान से आणविक जैव भौतिकी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने इसके बाद पेरिस डिडरोट विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट अनुसंधान और न्यूमाउंडलैंड के मेमोरियल विश्वविद्यालय में एक विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में एक पद प्राप्त किया।

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अमर्त्य सेन 10

अमर्त्य सेन (जन्म: 3 नवंबर, 1933) अर्थशास्त्री है, उन्हें 1998 में अर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। संप्रति वे हार्वड विश्वविद्यालय (अमरीका)|हार्वड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं। वे जादवपुर विश्वविद्यालय, दिल्ली स्कूल ऑफ इकानामिक्स और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी शिक्षक रहे हैं। सेन ने एम.आई। टी, स्टैनफोर्ड, बर्कली और कॉरनेल विश्वविद्यालयों में अतिथि अध्यापक के रूप में भी शिक्षण किया है।

सेन ने अपने कैरियर की शुरुआत एक शिक्षक और अनुसंधान विद्वान के तौर पर अर्थशास्त्र विभाग, जादवपुर विश्वविद्यालय से किया। 1960 और 1961 के बीच सेन, संयुक्त राज्य अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एक विजिटिंग प्रोफेसर थे, जहां उन्हें पॉल सैमुएलसन, रॉबर्ट सोलो, फ्रेंको मोडिग्लिनी, और नॉर्बर्ट वीनर के बारे में पता चला। वे यूसी-बर्कले और कॉर्नेल में भी विजिटिंग प्रोफेसर प्रोफेसर थे।

उन्होंने 1963 और 1971 के बीच दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में पढ़ाया। सेन बहुत सारे प्रतिष्ठित अर्थशास्त्र के विद्वान् के सहयोगी भी रह चुके हैं जिनमे मनमोहन सिंह (भारत के पूर्व प्रधान मंत्री और भारतीय अर्थव्यवस्था को उदार बनाने के लिए जिम्मेदार एक अनुभवी अर्थशास्त्री) केएन राज (विभिन्न प्रधान मंत्रियों के सलाहकार और एक अनुभवी अर्थशास्त्री जो सेंटर फॉर डेवेलपमेंट स्टडीज के संस्थापक थे) और जगदीश भगवती है। 1987 में वे हार्वर्ड में इकॉनॉमिक्स के थॉमस डब्ल्यू. लैंट यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के रूप में शामिल हो गए। नालंदा जो 5 वीं शताब्दी से लेकर 1197 तक उच्च शिक्षा का एक प्राचीन केंद्र था। इसको पुनः चालु किया गया एवं 19 जुलाई 2012 को, सेन को प्रस्तावित नालंदा विश्वविद्यालय (एनयू) के प्रथम चांसलर के तौर पर नामित किया गया था। इस विश्वविद्यालय में अगस्त 2014 में अध्यापन का कार्य शुरू हुआ था। 20 फरवरी 2015 को अमर्त्य सेन ने दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।

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हरगोविंद खुराना 11

हरगोविंद खुराना (जन्म: 9 जनवरी 1922 मृत्यु 9 नवंबर 2011) एक नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय वैज्ञानिक थे।


हरगोविंद खुराना एक भारतीय अमेरिकी जैव रसायनज्ञ थे। विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय,अमरीका में अनुसन्धान करते हुए , उन्हें 1968 में मार्शल डब्ल्यू निरेनबर्ग और रॉबर्ट डब्ल्यू होली के साथ फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए नोबेल पुरस्कार सयुक्त रूप से मिला ,उनके द्वारा न्यूक्लिक एसिड में न्यूक्लियोटाइड का क्रम खोजा गया, जिसमें कोशिका के अनुवांशिक कोड होते हैं और प्रोटीन के सेल के संश्लेषण को नियंत्रित करता है । हरगोविंद खुराना और निरेनबर्ग को उसी वर्ष कोलंबिया विश्वविद्यालय से लुइसा ग्रॉस हॉर्वित्ज़ पुरस्कार भी दिया गया था।

ब्रिटिश भारत में पैदा हुए, हरगोविंद खुराना ने उत्तरी अमेरिका में तीन विश्वविद्यालयों के संकाय में कार्य किया। वह 1966 में संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिक बन गए और 1987 में विज्ञान का राष्ट्रीय पदक प्राप्त किया।

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सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर 13

सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर (19 अक्टूबर, 1910-21 अगस्त, 1995) विख्यात भारतीय-अमेरिकी खगोलशास्त्री थे। भौतिक शास्त्र पर उनके अध्ययन के लिए उन्हें विलियम ए. फाउलर के साथ संयुक्त रूप से सन् 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।

चन्द्रशेखर सन् 1937 से 1995 में उनके देहांत तक शिकागो विश्वविद्यालय के संकाय पर विद्यमान थे।

डॉ॰ सुब्रह्मण्याम चंद्रशेखर का जन्म 19 अक्टूबर 1910 को लाहौर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा मद्रास में हुई। 18 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर का पहला शोध पत्र `इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' में प्रकाशित हुआ।

मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक की उपाधि लेने तक उनके कई शोध पत्र प्रकाशित हो चुके थे। उनमें से एक `प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी' में प्रकाशित हुआ था, जो इतनी कम उम्र वाले व्यक्ति के लिए गौरव की बात।

24 वर्ष की अल्पायु में सन् 1934 में ही उन्होंने तारे के गिरने और लुप्त होने की अपनी वैज्ञानिक जिज्ञासा सुलझा ली थी। कुछ ही समय बाद यानी 11 जनवरी 1935 को लंदन की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की एक बैठक में उन्होंने अपना मौलिक शोध पत्र भी प्रस्तुत कर दिया था कि सफेद बौने तारे यानी व्हाइट ड्वार्फ तारे एक निश्चित द्रव्यमान यानी डेफिनेट मास प्राप्त करने के बाद अपने भार में और वृद्धि नहीं कर सकते। अंतत वे ब्लैक होल बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिन तारों का द्रव्यमान आज सूर्य से 1.4 गुना होगा, वे अंतत सिकुड़ कर बहुत भारी हो जाएंगे। ऑक्सफोर्ड में उनके गुरु सर आर्थर एडिंगटन ने उनके इस शोध को प्रथम दृष्टि में स्वीकार नहीं किया और उनकी खिल्ली उड़ाई। पर वे हार मानने वाले नहीं थे। वे पुन शोध साधना में जुट गए और आखिरकार, इस दिशा में विश्व भर में किए जा रहे शोधों के फलस्वरूप उनकी खोज के ठीक पचास साल बाद 1983 में उनके सिद्धांत को मान्यता मिली। परिणामत भौतिकी के क्षेत्र में वर्ष 1983 का नोबेल पुरस्कार उन्हें तथा डॉ॰ विलियम फाऊलर को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

27 वर्ष की आयु में ही चंद्रशेखर की खगोल भौतिकीविद के रूप में अच्छी धाक जम चुकी थी। उनकी खोजों से न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल के अस्तित्व की धारणा कायम हुई जिसे समकालीन खगोल विज्ञान की रीढ़ प्रस्थापना माना जाता है।

खगोल भौतिकी के क्षेत्र में डॉ॰ चंद्रशेखर, चंद्रशेखर सीमा यानी चंद्रशेखर लिमिट के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। चंद्रशेखर ने पूर्णत गणितीय गणनाओं और समीकरणों के आधार पर `चंद्रशेखर सीमा' का विवेचन किया था और सभी खगोल वैज्ञानिकों ने पाया कि सभी श्वेत वामन तारों का द्रव्यमान चंद्रशेखर द्वारा निर्धारित सीमा में ही सीमित रहता है।

सन् 1935 के आरंभ में ही उन्होंने ब्लैक होल के बनने पर भी अपने मत प्रकट किए थे, लेकिन कुछ खगोल वैज्ञानिक उनके मत स्वीकारने को तैयार नहीं थे।

यद्यपि अपनी खोजों के लिये डॉ॰ चंद्रशेखर को भारत में सम्मान तो बहुत मिला, पर 1930 में अपने अध्ययन के लिये भारत छोड़ने के बाद वे बाहर के ही होकर रह गए और लगनपूर्वक अपने अनुसंधान कार्य में जुट गए। चंद्रशेखर ने खगोल विज्ञान के क्षेत्र में तारों के वायुमंडल को समझने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और यह भी बताया कि एक आकाश गंगा में तारों में पदार्थ और गति का वितरण कैसे होता है। रोटेटिंग प्लूइड मास तथा आकाश के नीलेपन पर किया गया उनका शोध कार्य भी प्रसिद्ध है।

डॉ॰ चंद्रा विद्यार्थियों के प्रति भी समर्पित थे। 1957 में उनके दो विद्यार्थियों त्सुंग दाओ ली तथा चेन निंग येंग को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अपने अंतिम साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, यद्यपि मैं नास्तिक हिंदू हूं पर तार्किक दृष्टि से जब देखता हूं, तो यह पाता हूं कि मानव की सबसे बड़ी और अद्भुत खोज ईश्वर है।

अनेक पुरस्कारों और पदकों से सम्मानित डॉ॰ चंद्रा का जीवन उपलब्धियों से भरपूर रहा। वे लगभग 20 वर्ष तक एस्ट्रोफिजिकल जर्नल के संपादक भी रहे। डॉ॰ चंद्रा नोबेल पुरस्कार प्राप्त प्रथम भारतीय तथा एशियाई वैज्ञानिक सुप्रसिद्ध सर चंद्रशेखर वेंकट रामन के भतीजे थे। सन् 1969 में जब उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने उन्हें पुरस्कार देते हुए कहा था, यह बड़े दुख की बात है कि हम चंद्रशेखर को अपने देश में नहीं रख सके। पर मैं आज भी नहीं कह सकती कि यदि वे भारत में रहते तो इतना बड़ा काम कर पाते।

डॉ॰ चंद्रा सेवानिवृत्त होने के बाद भी जीवन-पर्यंत अपने अनुसंधान कार्य में जुटे रहे। बीसवीं सदी के विश्व-विख्यात वैज्ञानिक तथा महान खगोल वैज्ञानिक डॉ॰ सुब्रह्मण्यम् चंद्रशेखर का 22 अगस्त 1995 को 84 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से शिकागो में निधन हो गया। इस घटना से खगोल जगत ने एक युगांतकारी खगोल वैज्ञानिक खो दिया। यूं तो डॉ॰ चंद्रशेखर ने काफी लंबा तथा पर्याप्त जीवन जिया पर उनकी मृत्यु से भारत को अवश्य धक्का लगा है क्योंकि आज जब हमारे देश में `जायंट मीटर वेव रेडियो टेलिस्कोप' की स्थापना हो चुकी है, तब इस क्षेत्र में नवीनतम खोजें करने वाला वह वैज्ञानिक चल बसा जिसका उद्देश्य था- भारत में भी अमेरिका जैसी संस्था `सेटी' (पृथ्वीतर नक्षत्र लोक में बौद्धिक जीवों की खोज) का गठन। आज जब डॉ॰ चंद्रा हमारे बीच नहीं हैं, उनकी विलक्षण उपलब्धियों की धरोहर हमारे पास है जो भावी पीढ़ियों के खगोल वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

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वेंकटरामन रामकृष्णन 14

वेंकटरामन "वेंकी" रामकृष्णन (तमिल: வெங்கட்ராமன் ராமகிருஷ்ணன்) (जन्म: 1952, तमिलनाडु) एक जीव वैज्ञानिक हैं। इनको 2009 के रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इन्हें यह पुरस्कार कोशिका के अंदर प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम की कार्यप्रणाली व संरचना के उत्कृष्ट अध्ययन के लिए दिया गया है। इनकी इस उपलब्धि से कारगर प्रतिजैविकों को विकसित करने में मदद मिलेगी। इजराइली महिला वैज्ञानिक अदा योनोथ और अमरीका के थॉमस स्टीज़ को भी संयुक्त रूप से इस सम्मान के लिए चुना गया।

तीनों वैज्ञानिकों ने त्रि-आयामी चित्रों के ज़रिए दुनिया को समझाया कि किस तरह राइबोसोम अलग-अलग रसायनों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, इसके लिए उन्होंने एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफ़ी का सहारा लिया जो राइबोसोम्ज़ की हज़ारों गुना बड़ी छवि सामने लाता है। वर्तमान में श्री वेंकटरामन् रामकृष्णन् ब्रिटेन के प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े हैं एवं विश्वविद्यालय की एमआरसी लेबोरेट्रीज़ ऑफ़ म्यलूकुलर बायोलोजी (पेशीय जीवविज्ञान की एमआरसी प्रयोगशाला) के स्ट्रकचरल स्टडीज़ (संरचनात्मक अध्ययन) विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक हैं।

वेंकी के नाम से मशहूर वेंकटरामन सातवें भारतीय एवं तीसरे तमिल मूल के व्यक्ति हैं जिनको नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु के चिदंबरम में हुई

वेंकटरामन रामकृष्णन' तमिलनाडु के कड्डालोर जिले में स्तिथ चिदंबरम में पैदा हुए थे। उनके पिता सी॰वी॰ रामकृष्णन और माता राजलक्ष्मी भी वैज्ञानिक थे।

इनकी प्रारंभिक शिक्षा अन्नामलाई विश्वविद्यालय में हुई  एवं उसके बाद इन्होंने 1971 में बड़ौदा के महाराजा सायाजीराव विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक स्तर तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद ओहायो विश्वविद्यालय में शोध-कार्य करना प्रारंभ किया जहाँ से 1976 में उन्हें पीएचडी की डिग्री प्राप्त हुई। इन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कुछ दिनों तक शिक्षण कार्य भी किया। यहीं इनमें जीवविज्ञान के प्रति रूचि जागृत हुई एवं अपने भौतिकी के ज्ञान का प्रयोग जीव विज्ञान में प्रारम्भ किया। इनके कई शोधपत्र नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुए। फ़िलहाल वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, (इंग्लैण्ड) के मेडिकल रिसर्च काउंसिल के मोलीक्यूलर बायोलॉजी लैबोरेट्री में जीव वैज्ञानिक के रूप में काम कर रहे हैं। रामकृष्णन्, अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के सदस्य होने के साथ साथ कैम्ब्रिज में स्थित ट्रिनिटी कॉलेज एवं रॉयल सोसायटी के फैलो भी हैं।

वेंकटरामन रामकृष्णन ने 1977 में करीब 95 शोधपत्र प्रकाशित किए। वर्ष 2000 में वेंकटरामन ने प्रयोगशाला में राइबोसोम की तीस ईकाईयों का पता लगाया और प्रतिजैविकों के साथ इनके यौगिकों पर भी अनुसंधान किया। 26 अगस्त 1999 को इन्होंने राइबोसोम पर आधारित तीन शोधपत्र प्रकाशित किए। उनका यह शोधकार्य 21 सितबंर 2000 को नेचर पत्रिका में छपा। उनके हालिया शोध से राइबोसोम की परमाणु संरचना का पता लगता है। रामकृष्णन् का नाम हिस्टोन और क्रोमैटिन की संरचना कार्य के लिए भी जाना जाता है।

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भार्गव श्री प्रकाश Bhargav Sri Prakash

भार्गव श्रीप्रकाश एक भारतीय उद्यमी और इंजीनियर हैं जो कि सिलिकॉन वैली में स्थित हैं।

श्रीप्रकाश ने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए डिजिटल वैक्सीन तकनीक के आविष्कारक हैं। वह फ्रेंड्सलर्न के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, और फोया के लिए उत्पाद के प्रमुख हैं, जो स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया एक मोबाइल ऐप है।

वह एक पूर्व पेशेवर टेनिस खिलाड़ी और भारत के जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन हैं।

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सी॰ एन॰ आर॰ राव C. N. R. Rao

चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव  जिन्हें सी॰ एन॰ आर॰ राव के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय रसायनज्ञ हैं जिन्होंने घन-अवस्था और संरचनात्मक रसायन शास्त्र के क्षेत्र में मुख्य रूप से काम किया है। वर्तमान में वह भारत के प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख के रूप में सेवा कर रहे हैं। डॉ॰ राव को दुनिया भर के 60 विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त है। उन्होंने लगभग 1500 शोध पत्र और 45 वैज्ञानिक पुस्तकें लिखी हैं।

वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया। सी वी रमण और ए पी जे अब्दुल कलाम के बाद इस पुरस्कार से सम्मानित किये जाने वाले वे तीसरे ऐसे वैज्ञानिक हैं।

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अनिमेष चक्रवर्ती 15
अनिमेश चक्रवर्ती एक बंगाली भारतीय अकादमिक और रसायन शास्त्र के प्रोफेसर हैं। 1975 में, उन्हें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा रसायन शास्त्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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सुभाष मुखोपाध्याय Subhash Mukhopadhyay

सुभाष मुखोपाध्याय (16 जनवरी 1931 - 19 जून 1981) एक भारतीय वैज्ञानिक, हजारीबाग, बिहार और उड़ीसा प्रांत, ब्रिटिश भारत (अब झारखंड, भारत) के चिकित्सक थे, जिन्होंने इन-विट्रो निषेचन का उपयोग करके दुनिया का दूसरा और भारत का पहला बच्चा बनाया था। कनुप्रिया अग्रवाल (दुर्गा), जिनका जन्म 1978 में हुआ था, यूनाइटेड किंगडम में पहले आईवीएफ बच्चे के 67 दिन बाद। बाद में, डॉ। सुभाष मुखोपाध्याय को तत्कालीन पश्चिम बंगाल राज्य सरकार और भारत सरकार द्वारा परेशान किया गया और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ अपनी उपलब्धियों को साझा करने की अनुमति नहीं दी गई। निर्वासित, उन्होंने 19 जून 1981 को आत्महत्या कर ली।

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अशोक सेन Ashoke Sen
अशोक सेन एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं। अशोक सेन ने प्रबल-दुर्बल द्वैतता या एस-द्वैतता पर प्रकाशित उनके ऐतिहासिक पत्र सहित स्ट्रिंग सिद्धांत विषय में बहुत सार्थक योगदान दिया है। जो इस क्षेत्र में शोध विषय में प्रभावशाली परिवर्तनकारी रहा था।

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अन्ना मणी Anna Mani

अन्ना मणि एक भारतीय भौतिक और मौसम वैज्ञानिक थीं। वह भारत के मौसम विभाग के उप-निदेशक थीं। उन्होंने मौसम विज्ञान उपकरणों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किए हैं; सौर विकिरण, ओज़ोन और पवन ऊर्जा माप के विषय में अनुसन्धान किया है और कई शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।

अन्ना मणि का जन्म 23 अगस्त, 1918 को पीरुमेडू, त्रवनकोर में हुआ था।वह आठ बच्चों में सातवीं थीं। उनके पिता एक सिविल अभियन्ता थे। बचपन में उन्हे किताबें पढ़ना बहुत पसंद था। वायकोम सत्याग्रह के दौरान अन्ना मणि महात्मा गाँधी के काम से बहुत प्रभावित हुईं। राष्ट्रवादी आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने केवल खादी के कपड़े पहनना शुरू किया। वह पहले आयुर्विज्ञान पढ़ना चाहती थीं, पर अंत में, क्योंकि उन्हें भौतिक विज्ञान में ज़्यादा दिलचस्पी थी, उन्होंंने वही पढ़ने का निर्णय लिया। 1939 में मद्रास के प्रेसिडेन्सी कॉलेज से उन्होंने भौतिक और रसायन शास्त्र में विज्ञान स्नातक (प्रवीण) की उपाधि प्राप्त की।

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सालिम अली Salim Ali
सालिम मुईनुद्दीन अब्दुल अली एक भारतीय पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी थे। उन्हें "भारत के बर्डमैन" के रूप में जाना जाता है, सालिम अली भारत के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारत भर में व्यवस्थित रूप से पक्षी सर्वेक्षण का आयोजन किया और पक्षियों पर लिखी उनकी किताबों ने भारत में पक्षी-विज्ञान के विकास में काफी मदद की है। 1976 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से उन्हें सम्मानित किया गया। 1947 के बाद वे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के प्रमुख व्यक्ति बने और संस्था की खातिर सरकारी सहायता के लिए उन्होंने अपने प्रभावित किया और भरतपुर पक्षी अभयारण्य के निर्माण और एक बाँध परियोजना को रुकवाने पर उन्होंने काफी जोर दिया जो कि साइलेंट वेली नेशनल पार्क के लिए एक खतरा थी।

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नौतम भट्ट 16
डॉ नौतम भट्ट (1909 - 2005) भारत के एक रक्षा वैज्ञानिक थे। उन्होने भारत को रक्षा-सामग्री के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अग्‍नि, पृथ्वी, त्रिशूल, नाग, ब्रह्मोस, धनुष, तेजस, ध्रुव, पिनाका, अर्जुन, लक्ष्य, निशान्त, इन्द्र, अभय, राजेन्द्र, भीम, मैसूर, विभुति, कोरा, सूर्य आदि भारतीय शस्त्रों के विकास में उनका अद्वितीय योगदान रहा। उन्हें भारत के रक्षा अनुसंधान की नीव रखने वाला वैज्ञानिक माना जाता है।

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असीमा चटर्जी Asima Chatterjee
असीमा चटर्जी (23 सितम्बर 1917- 22 नवम्बर 2006) एक भारतीय रसायनशास्त्री थीं। उन्होंने जैवरसायन विज्ञान और फाइटोमेडिसिन के क्षेत्र में काम किया। उनके सबसे उल्लेखनीय कार्य में विन्सा एल्कालोड्स पर शोध शामिल है। उन्होने मिर्जिलेट-रोधी तथा मलेरिया-रोधी औषधियों का विकास किया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के औषधीय पौधों पर काफी मात्रा में काम किया।

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शंकर अबाजी भिसे 18
डॉ शंकर अबाजी भिसे भारत के एक वैज्ञानिक एवं अग्रणि आविष्कारक थे जिन्होने 200 के लगभग आविष्कार किये। उन्होने लगभग 40 आविष्कारों पर पेटेन्ट लिया था। उन्हें "भारतीय एडिसन" कहा जाता है। उन्होने भारतीय मुद्रण प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण योगदान दिया जिससे छपाई की गति पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ायी जा सकी। अन्तरराष्ट्रीय निवेशकों का मानना था कि उनके खोजें वैश्विक प्रिटिंग उद्योग में क्रांति ला देंगी। उन्हें अपने समय के अग्रणी भारतीय राष्ट्रवादियों का सहयोग और प्रशंसा मिली थी। उन्होंने बॉम्बे में एक साइंटिफ़िक क्लब खोला था और 20 साल की उम्र तक वो गेजेट और मशीनें बनाने लगे थे जिनमें टैंपर-प्रूफ बोतल, इलैक्ट्रिकल साइकिल कॉन्ट्रासेप्शंस, बॉम्बे की उपनगरीय रेलवे प्रणाली के लिए एक स्टेशन संकेतक शामिल थे।

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नरिंदर सिंह कपानी 19
नरिंदर सिंह कपानी एक भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक विज्ञानी हैं जो फाइबर ऑप्टिक्स में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। फॉर्च्यून मैगज़ीन ने अपने 'बिजनेसमैन ऑफ द सेंचुरी' अंक (1999-11-22) में उन्हें सात "अनसंग हीरोज" में से एक के रूप में नामित किया गया था। उन्हें "फ़ाइबर ऑप्टिक्स का पितामह" माना जाता है।

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प्रफुल्ल चंद्र रे Prafulla Chandra Ray
डाक्टर प्रफुल्लचन्द्र राय भारत के महान रसायनज्ञ, उद्यमी तथा महान शिक्षक थे। आचार्य राय केवल आधुनिक रसायन शास्त्र के प्रथम भारतीय प्रवक्ता (प्रोफेसर) ही नहीं थे बल्कि उन्होंने ही इस देश में रसायन उद्योग की नींव भी डाली थी। 'सादा जीवन उच्च विचार' वाले उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने कहा था, "शुद्ध भारतीय परिधान में आवेष्टित इस सरल व्यक्ति को देखकर विश्वास ही नहीं होता कि वह एक महान वैज्ञानिक हो सकता है।" आचार्य राय की प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि उनकी आत्मकथा "लाइफ एण्ड एक्सपीरियेंसेस ऑफ बंगाली केमिस्ट" के प्रकाशित होने पर अतिप्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका "नेचर" ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लिखा था कि "लिपिबद्ध करने के लिए संभवत: प्रफुल्ल चन्द्र राय से अधिक विशिष्ट जीवन चरित्र किसी और का हो ही नहीं सकता।"

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वेंकटरमन राधाकृष्णन 20
वेंकटरमन राधाकृष्णन एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक और रॉयल स्वीडिश अकादमी ऑफ साइंसेस के सदस्य हैं। वे भारत के बंगलौर में स्थित रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट में अवकाशप्राप्त प्रोफेसर रह चुके हैं जहां वे 1972 से 1994 तक निदेशक रहे थे।

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येल्लप्रगड सुब्बाराव Yellapragada Subbarao
येल्लप्रगड सुब्बाराव एक भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने कैंसर के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कैरियर का अधिकतर भाग इन्होने अमेरिका में बिताया था लेकिन इसके बावजूद भी ये वहाँ एक विदेशी ही बने रहे और ग्रीन कार्ड नहीं लिया, हालांकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा अनुसंधानों का इन्होने नेतृत्व किया था।

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प्रशान्त चन्द्र महालनोबिस Prasanta Chandra Mahalanobis

प्रशान्त चन्द्र महालनोबिस ( 29 जून 1893- 28 जून 1972) एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक एवं सांख्यिकीविद थे। उन्हें दूसरी पंचवर्षीय योजना के अपने मसौदे के कारण जाना जाता है। भारत की स्वत्रंता के पश्चात नवगठित मंत्रिमंडल के सांख्यिकी सलाहकार बने तथा औद्योगिक उत्पादन की तीव्र बढ़ोतरी के जरिए बेरोजगारी समाप्त करने के सरकार के प्रमुख उद्देश्य को पूरा करने के लिए योजना का खाका खींचा।

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शान्ति स्वरूप भटनागर Shanti Swaroop Bhatnagar

सर शांति स्वरूप भटनागर, OBE, FRS (21 फरवरी 1894 – 1 जनवरी 1955) जाने माने भारतीय वैज्ञानिक थे। इनका जन्म शाहपुर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। इनके पिता परमेश्वरी सहाय भटनागर की मृत्यु तब हो गयी थी, जब ये केवल आठ महीने के ही थे। इनका बचपन अपने ननिहाल में ही बीता। इनके नाना एक इंजीनियर थे, जिनसे इन्हें विज्ञान और अभियांत्रिकी में रुचि जागी। इन्हें यांत्रिक खिलौने, इलेक्ट्रानिक बैटरियां और तारयुक्त टेलीफोन बनाने का शौक रहा। इन्हें अपने ननिहाल से कविता का शौक भी मिला और इनका उर्दु एकांकी करामाती प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाया था।

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हरीश चंद्र Harish-Chandra
हरीश चंद्र महरोत्रा (11 अक्टूबर 1923 - 16 अक्टूबर 1983) भारत के महान गणितज्ञ थे। वह उन्नीसवीं शदाब्दी के प्रमुख गणितज्ञों में से एक थे। इलाहाबाद में गणित एवं भौतिक शास्त्र का प्रसिद्ध केन्द्र "मेहता रिसर्च इन्सटिट्यूट" का नाम बदलकर अब उनके नाम पर हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान कर दिया गया है। 'हरीश चंद्र महरोत्रा' को सन 1977 में भारत सरकार द्वारा साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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एडावलेठ कक्कट जानकी अम्माल Janaki Ammal
एडावलेठ कक्कट जानकी अम्माल (1897-1984) भारत की एक महिला वैज्ञानिक थीं। अम्माल एक ख्यातिनाम वनस्पति और कोशिका वैज्ञानिक थीं जिन्होंने आनुवांशिकी, उद्विकास, वानस्पतिक भूगोल और नृजातीय वानस्पतिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। पद्म श्री से सम्मानित जानकी अम्माल भारतीय विज्ञान अकादमी की संस्थापक फेलो रहीं हैं।

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जयन्त विष्णु नार्लीकर Jayant Narlikar
जयन्त विष्णु नार्लीकर (मराठी: जयन्त विष्णु नारळीकर ; जन्म 19 जुलाई 1938) प्रसिद्ध भारतीय भौतिकीय वैज्ञानिक हैं जिन्होंने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी में अनेक पुस्तकें लिखी हैं। ये ब्रह्माण्ड के स्थिर अवस्था सिद्धान्त के विशेषज्ञ हैं और फ्रेड हॉयल के साथ भौतिकी के हॉयल-नार्लीकर सिद्धान्त के प्रतिपादक हैं। इनके द्वारा रचित एक आत्‍मकथा चार नगरातले माझे विश्‍व के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जयन्त विष्णु नार्लीकर का जन्म 19 जुलाई 1938 को कोल्हापुर [महाराष्ट्र]में हुआ था। उनके पिता विष्णु वासुदेव नार्लीकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित के अध्यापक थे तथा माँ संस्कृत की विदुषी थीं। नार्लीकर की प्रारम्भिक शिक्षा Central Hindu boys School CHS वाराणसी में हुई। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि लेने के बाद वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गये। उन्होने कैम्ब्रिज से गणित की उपाधि ली और खगोल-शास्त्र एवं खगोल-भौतिकी में दक्षता प्राप्त की।

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सुलभ कुलकर्णी Sulabha K. Kulkarni
सुलभ कुलकर्णी (जन्म 1949) भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुणे, भारत में भौतिक विज्ञान की प्रोफ़ेसर हैं। वो नैनोप्रौद्योगिकी, पदार्थ विज्ञान और पृष्ठ विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य करती हैं। सुलभ कुलकर्णी ने बी एस सी, एम एस सी और पी एच डी पुणे युनिवर्सिटी से किया था। 1976 में पी एच डी करने के बाद वह और रीसर्च करने के इरादे से वह म्यूनिक, जर्मनी में सर्फ़ेस टेक्नॉलजी पर खोज कर चुकी हैं।

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अदिति पंत 22
अदिति पंत एक भारतीय समुद्र विज्ञानी हैं। वह अंटार्कटिका की पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने 1983 में भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में भूविज्ञानी सुदीप्ता सेनगुप्ता के साथ मुलाकात की। वह राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे विश्वविद्यालय और महाराष्ट्र विज्ञान अकादमी सहित संस्थानों में प्रमुख पदों पर रह चुकी हैं।

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अजॉय घटक Ajoy Ghatak

अजॉय घटक एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और भौतिकी पाठ्य पुस्तकों के लेखक हैं। अजॉय घटक ने 170 से अधिक शोध पत्र और 20 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। प्रकाशिकी पर उनकी स्नातक की पाठ्यपुस्तक का चीनी और फारसी में अनुवाद किया गया है और इनहोमोजीनस ऑप्टिकल वेवगाइड्स पर उनके मोनोग्राफ (प्रोफेसर सोढा के साथ सहानुभूति) का चीनी और रूसी में अनुवाद किया गया है।

1995 में, उन्हें ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका का फेलो चुना गया, "प्रकाशिकी शिक्षा में विशिष्ट सेवा के लिए और ग्रेडिएंट इंडेक्स मीडिया, फाइबर और एकीकृत ऑप्टिकल उपकरणों की प्रसार विशेषताओं की समझ के लिए उनके योगदान के लिए"।

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अंबरीश घोष Ambarish Ghosh

अंबरीश घोष एक भारतीय वैज्ञानिक, नैनो विज्ञान और इंजीनियरिंग केंद्र (CeNSE), भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में एक संकाय सदस्य हैं। वह भौतिकी विभाग में एसोसिएट फैकल्टी भी हैं। वह नैनोरोबोट्स, सक्रिय पदार्थ भौतिकी, प्लास्मोनिक्स, मेटामेट्रिक्स और तरल हीलियम में इलेक्ट्रॉन बुलबुले पर अपने काम के लिए जाना जाता है।

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अमिताव रायचौधुरी Amitava Raychaudhuri

अमिताव रायचौधुरी एक भारतीय सैद्धांतिक कण भौतिक विज्ञानी हैं।वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के राजाबाजार साइंस कॉलेज के भौतिकी विभाग में प्रोफेसर एमेरिटस हैं, जहाँ उन्होंने पहले सर तारक नाथ पालिट चेयर प्रोफेसरशिप का आयोजन किया था। वह एक अन्य प्रसिद्ध भारतीय भौतिक विज्ञानी, अमल कुमार रायचौधुरी का भतीजा है|

रायचौधरी का जन्म कलकत्ता, भारत में हुआ था और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा साउथ पॉइंट स्कूल (भारत) में की थी।बाद में उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता में भाग लिया जहाँ से उन्होंने 1970 में भौतिकी में बीएससी की डिग्री प्राप्त की और फिर 1973 में दिल्ली विश्वविद्यालय में एमएससी की डिग्री हासिल की। ​​ऑस्कर डब्ल्यू। ग्रीनबर्ग की देखरेख में रायचौधुरी ने पार्टिकल भौतिकी में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। 1977 में मैरीलैंड विश्वविद्यालय, कॉलेज पार्क से।

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अयलम परमेस्वर बालाचंद्रन A. P. Balachandran

अयलम परमेस्वर बालाचंद्रन (जन्म 25 जनवरी 1938) एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं, जो क्वांटम भौतिकी में शास्त्रीय टोपोलॉजी की भूमिका के लिए व्यापक योगदान के लिए जाने जाते हैं। वह वर्तमान में भौतिकी विभाग, सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय, में एक एमेरिटस प्रोफेसर हैं, जहां वह 1999 और 2012 के बीच भौतिकी के जोएल डोरमैन स्टील प्रोफेसर थे। 1988 से अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी के साथी भी हैं और उन्हें उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान के लिए भारतीय भौतिकी संघ के अमेरिकी अध्याय द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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अय्यगिरी साम्बशिव राव 23

अय्यगरी सम्बासिवा राव (ए एस राव के नाम से लोकप्रिय) (1914–2003) एक भारतीय वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (ECIL), हैदराबाद, तेलंगाना, भारत के संस्थापक थे।

उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में एम.एससी और फिर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स पूरा किया। राव ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलनों सहित वैज्ञानिक विकास पर कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कई वैज्ञानिक पत्रिकाओं के संपादकीय और सलाहकार बोर्डों पर भी काम किया, जिनमें कई अंतर्राष्ट्रीय जर्नल भी शामिल हैं।

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बिमन बागची Biman Bagchi

बिमन बागची (जन्म 1954) एक भारतीय जैव-रासायनिक रसायनज्ञ, सैद्धांतिक रसायनज्ञ और भारतीय विज्ञान संस्थान के ठोस राज्य और संरचनात्मक रसायन विज्ञान इकाई में एक अमृत मोदी प्रोफेसर हैं। वह सांख्यिकीय यांत्रिकी पर अपने अध्ययन के लिए जाना जाता है; विशेष रूप से चरण संक्रमण और न्यूक्लियेशन, सॉल्वेशन डायनेमिक्स, इलेक्ट्रोलाइट ट्रांसपोर्ट के मोड-कपलिंग सिद्धांत, जैविक मैक्रोमोलेक्यूल्स (प्रोटीन, डीएनए आदि) की गतिशीलता, प्रोटीन फोल्डिंग, एंजाइम कैनेटीक्स, सुपरऑलड तरल और प्रोटीन हाइड्रेशन परत के अध्ययन में।

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बेंजामिन पीरी पाल Benjamin Peary Pal

बेंजामिन पियरी पाल, FRS (26 मई 1906 - 14 सितंबर 1989) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पहले निदेशक थे। वे गेहूं आनुवंशिकी और प्रजनन में सबसे अग्रणी वैज्ञानिकों में से एक थे। पाल ने अपनी बैचलर ऑफ साइंस और मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री रंगून यूनिवर्सिटी से पूरी की और पीएचडी कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पूरी की। उन्हें 1972 में रॉयल सोसाइटी (FRS) का फेलो चुना गया था। वह एक कुंवारे थे और उन्होंने अपनी संपत्ति भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को दान कर दी थी।

1959 में पद्मश्री से सम्मानित

1968 में पद्म भूषण से सम्मानित

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बिकास कांता चक्रवर्ती Bikas Chakrabarti

बिकास कांता चक्रवर्ती (जन्म 14 दिसंबर 1952 को कलकत्ता में) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी हैं। जनवरी 2018 से, वह भारत के कोलकाता स्थित साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स में भौतिकी के प्रोफेसर हैं।

चक्रवर्ती ने अपनी पीएच.डी. 1979 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से डिग्री। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और कोलोन विश्वविद्यालय में पोस्ट-डॉक्टरल कार्य के बाद, वह 1983 में साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स (SINP) के संकाय में शामिल हो गए। जनवरी 2018 से, वह जोसे बोस नेशनल फेलो और एसआईएनपी में एमेरिटस प्रोफेसर, एसएन में मानद एमरिटस प्रोफेसर बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, कोलकाता। वह SINP के पूर्व निदेशक हैं। वह भारतीय सांख्यिकी संस्थान में अर्थशास्त्र के मानद विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं। चक्रवर्ती के अधिकांश शोध सांख्यिकीय भौतिकी और संघनित पदार्थ भौतिकी (क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम सहित) के आसपास केंद्रित रहे हैं; डी-वेव सिस्टम और क्वांटम कंप्यूटिंग की समयरेखा भी देखें) और सामाजिक विज्ञान के लिए उनके आवेदन (जैसे, ईगोफिज़िक्स देखें)। उन्होंने भौतिकी और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में कई पुस्तकों और पत्रों को लिखा है। चक्रवर्ती कई भौतिकी और अर्थशास्त्र पत्रिकाओं के संपादकीय बोर्डों के भी सदस्य हैं।

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बिस्वरुप मुखोपाध्याय 24

बिस्वरुप मुखोपाध्याय (जन्म 1 अगस्त 1960) एक भारतीय सैद्धांतिक उच्च ऊर्जा भौतिक विज्ञानी और भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान कोलकाता (IISER कोलकाता) के एक वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। हाई एनर्जी कोलाइडर, हिग्स बोसोन, न्यूट्रिनोस पर अपने शोध के लिए जाना जाता है, मुखोपाध्याय नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत के एक चुने हुए साथी हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने उन्हें 2003 में भौतिक विज्ञान में उनके योगदान के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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भीमिदिपति लक्ष्मीधारा कनकाद्री सोमयाजुलु B. L. K. Somayajulu

भीमिदिपति लक्ष्मीधारा कनकाद्री सोमयाजुलु (जन्म 1937) एक भारतीय भू-वैज्ञानिक और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद में सीएसआईआर एमेरिटस साइंटिस्ट हैं। वे प्राचीन और समकालीन समुद्री प्रक्रियाओं पर अपने अध्ययन के लिए जाने जाते हैं और कई विज्ञान समाजों के एक चुने हुए साथी हैं, जैसे कि नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत, [जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, भारतीय भूभौतिकीय संघ, अमेरिकी भूभौतिकीय संघ, यूरोपियन एसोसिएशन फॉर जियोकेमिस्ट्री, भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, ने उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया, जो पृथ्वी, वायुमंडल, महासागर और ग्रहों में उनके योगदान के लिए सर्वोच्च भारतीय विज्ञान पुरस्कारों में से एक है। 1978 में विज्ञान।

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बदनवाल वेंकटसुब्बा श्रीकांतन 26

बदनवाल वेंकटसुब्बा श्रीकांतन (जन्म 30 जून 1925) एक भारतीय उच्च-ऊर्जा खगोल भौतिकीविद् और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में होमी जे। भाभा के पूर्व सहयोगी हैं। वह राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान, बैंगलोर में डॉ। एस। राधाकृष्णन विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं। ब्रह्मांडीय किरणों, प्राथमिक कणों, और उच्च-ऊर्जा एक्स-रे खगोलविदों के क्षेत्र में अपने अध्ययन के लिए जाना जाता है, श्रीकांतन तीनों प्रमुख भारतीय विज्ञान अकादमियों, भारतीय विज्ञान अकादमी, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और के एक निर्वाचित साथी हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत और साथ ही महाराष्ट्र विज्ञान अकादमी। वह मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ब्रूनो रॉसी के सहयोगी भी थे। भारत सरकार ने उन्हें 1988 में भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया।

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चंद्रशेखरन मोहन C. Mohan

चंद्रशेखरन मोहन एक भारतीय मूल के अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं। उनका जन्म 3 अगस्त 1955 को तमिलनाडु, भारत में हुआ था। वहाँ बड़े होने और चेन्नई में अपनी स्नातक की पढ़ाई खत्म करने के बाद, वह 1977 में स्नातक की पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। जन्म से एक भारतीय नागरिक होने के बाद, 2007 से वह एक अमेरिकी नागरिक और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) रहे हैं। जून 2020 में, वे आईबीएम रिसर्च सेंटर (सैन जोस, कैलिफोर्निया) में आईबीएम फेलो बनने से 38.5 साल तक आईबीएम रिसर्च में काम करने के बाद सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में, वह चीन के सिंघुआ विश्वविद्यालय में एक प्रतिष्ठित विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वह चेन्नई में तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी में मानद सलाहकार और केरल में केरल ब्लॉकचैन अकादमी में सलाहकार भी हैं।

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चित्रा मंडल 27

चित्रा मंडल बायोमोलेक्युलस के क्षेत्र में एक रासायनिक जीवविज्ञानी और स्वास्थ्य और रोगों में उनके अनुप्रयोग हैं। वह वर्तमान में CSIR - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी इन कोलकाता, भारत के निदेशक हैं।

मंडल ने जैव-रसायन रसायन विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से अपने करियर की शुरुआत में पीएचडी पूरी की। वह फिलाडेल्फिया में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट अनुसंधान करने के बाद चले गए। भारत लौटकर, वह सीएसआईआर में एक वैज्ञानिक बन गई, जब तक कि वह कोलकाता में अपने इनोवेशन कॉम्प्लेक्स का नेतृत्व नहीं कर लेती, और फिर इसके निदेशक। उनका शोध क्षेत्र मुख्य रूप से बायोमोलेक्युलस का ग्लाइकोसिलेशन है और रोग प्रबंधन, कैंसर और ट्यूमर प्रतिरक्षा विज्ञान में उनके संभावित अनुप्रयोग है। भारत में स्वदेशी औषधीय पौधों का उपयोग करते हुए प्रयोगशाला कम लागत वाली स्वास्थ्य देखभाल समाधानों की भी जांच कर रही है, उदाहरण के लिए, कैंसर सेल उपचार में एक गैर विषैले हर्बल अणु की पहचान। उनके कुछ पत्रों में डुप्लिकेट छवियों के बारे में कुछ विवाद रहा है।

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कोमारवोलु चंद्रशेखर K. S. Chandrasekharan

कोमारवोलु चंद्रशेखर (21 नवंबर 1920 - 13 अप्रैल 2017) ETH ज्यूरिख में प्रोफेसर थे और स्कूल ऑफ मैथमैटिक्स, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के संस्थापक फैकल्टी सदस्य थे। वह संख्या सिद्धांत और सुगमता में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्हें पद्मश्री, शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और रामानुजन पदक मिले और वे टीआईएफआर के मानद साथी थे। वह 1971 से 1974 तक अंतर्राष्ट्रीय गणितीय संघ (IMU) के अध्यक्ष थे।

चंद्रशेखर का जन्म 21 नवंबर 1920 को आधुनिक आंध्र प्रदेश में मछलीपट्टनम में हुआ था। चंद्रशेखर ने अपना हाई स्कूल आंध्र प्रदेश के गुंटूर के बापटला गाँव से पूरा किया। उन्होंने चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज से गणित में एम। पूरा किया और गणित विभाग, मद्रास विश्वविद्यालय से 1942 में पीएचडी किया। के। आनंदा राऊ की देखरेख में।

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Chanchal Kumar Majumdar

चंचल कुमार मजुमदार (बंगाली: [कनकला कुमारा मजुमदरा]) (11 अगस्त 1938 - 20 जून 2000) एक भारतीय संघनित भौतिक विज्ञानी और एस.एन. के संस्थापक निदेशक थे। बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज। क्वांटम यांत्रिकी में अपने शोध के लिए जाने जाने वाले, मजूमदार तीन प्रमुख भारतीय विज्ञान अकादमियों के चुने हुए साथी थे - भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत और भारतीय विज्ञान अकादमी - और साथ ही नए सदस्य यॉर्क एकेडमी ऑफ साइंसेज और अमेरिकन फिजिकल सोसायटी।

मजुमदार दीपन घोष के गुरु थे, जिनके साथ उन्होंने मजुमदार-घोष मॉडल का सह-विकास किया, जो हाइजेनबर्ग मॉडल का एक विस्तार था, जो बाद में बेहतर हुआ, और वाल्टर कोहन और मारिया गोएप्पर्ट-मेयर, दोनों नोबेल पुरस्कार विजेताओं का एक समूह था। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने उन्हें 1976 में भौतिक विज्ञान में उनके योगदान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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कांजिवरम श्रीरंगचारी शेषाद्रि C. S. Seshadri

कोंजीवरम श्रीरंगाचारी शेषाद्रि FRS (29 फरवरी 1932 - 17 जुलाई 2020) एक भारतीय गणितज्ञ थे। वह चेन्नई गणितीय संस्थान के संस्थापक और निदेशक-उद्भव थे, और बीजीय ज्यामिति में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। शेषाद्रि का नाम उनके नाम पर रखा गया है।

2009 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, जो देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। उन्होंने अपने बी.ए. (ऑनर्स) 1 9 53 में मद्रास विश्वविद्यालय से गणित में उपाधि प्राप्त की और फ्रा द्वारा इसका उल्लेख किया गया। रेसीन और एस नारायनन। उन्होंने 1958 में के.एस. चंद्रशेखरन की देखरेख में बॉम्बे विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की। 1971 में उन्हें भारतीय विज्ञान अकादमी का फेलो चुना गया।

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डॉ. द्वारम बाप रेड्डी 28

डॉ. द्वारम बाप रेड्डी संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर एक शीर्ष रैंकिंग अधिकारी थे। उन्होंने इक्कीस वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन में काम किया।

रेड्डी संयुक्त राज्य अमेरिका में आने के लिए भारतीय रेड्डीज में एक अग्रणी थे और सितंबर 1946 में पहुंचे। उन्होंने 1950 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, संयुक्त राज्य अमेरिका से पीएचडी प्राप्त की। उन्हें एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में अध्ययनरत भारतीय छात्र। इस एसोसिएशन को हिंदुस्तान स्टूडेंट्स एसोसिएशन कहा जाता था और इसका मुख्यालय इंटरनेशनल हाउस में था, जहाँ वह एक निवासी था। पीडमोंट एवेन्यू में स्थित इंटरनेशनल हाउस प्रसिद्ध बे एरिया आर्किटेक्ट जॉर्ज केल्हम द्वारा डिजाइन किया गया था और इसमें राजदूतों और राजनेताओं सहित कई पूर्व छात्र शामिल हैं । वह इंटरनेशनल हाउस के छात्र सलाहकार परिषद के सदस्य भी थे।

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देबाशीष घोष 29

देबाशीष घोष (जन्म 16 मई 1960) एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग, भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर हैं। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने भारत में सहकारी नियंत्रण पर काम शुरू किया है, जिसमें बुद्धिमान नियंत्रण और बहु-एजेंटों पर अग्रणी अनुसंधान किया गया है।उन्होंने 2002 में IISc में भारत में पहली मोबाइल रोबोटिक्स लैब यानी मोबाइल रोबोटिक्स प्रयोगशाला की स्थापना की। उन्हें स्वार्म इंटेलिजेंस, डिस्ट्रीब्यूटेड कंप्यूटिंग और गेम थ्योरी में अपने शुरुआती काम के लिए जाना जाता है। उनका प्राथमिक शोध स्वायत्त वाहनों के मार्गदर्शन और नियंत्रण में है, हालांकि, वर्तमान रुचि कम्प्यूटेशनल खुफिया यानी एरियल रोबोटिक्स के लिए मशीन लर्निंग में है।

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दिपन घोष Dipan Ghosh

दिपन घोष एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं, जिन्हें हाइजेनबर्ग एंटीफेरोमैग्नेट की जमीनी स्थिति के सटीक वर्णन के लिए जाना जाता है, जिन्हें साहित्य में मजूमदार-घोष मॉडल के रूप में जाना जाता है, जिसे उन्होंने चंचल कुमार मजुमदार के साथ विकसित किया।

घोष को M.Sc. भौतिकी में 1966 में रेनशॉ कॉलेज, कटक उत्कल विश्वविद्यालय, उस विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेता के रूप में। बाद में उन्होंने अपनी पीएच.डी. चंबल कुमार मजुमदार के तहत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, बॉम्बे, 1971 में अपनी थीसिस के बल पर, "स्टडी ऑफ मैग्नेटिक हैमिल्टन" शीर्षक से। उन्होंने 1971 से 1972 तक जॉन ज़िमन के साथ ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में पोस्ट-डॉक्टोरल काम किया, और 1972-73 तक के.एस. सिंग्वी के साथ नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में।

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द्रोणमृजू कृष्णा राव 30

द्रोणमृजू कृष्णा राव (जन्म 14 जनवरी 1937) एक भारतीय-जनित आनुवंशिकीविद् और फाउंडेशन ऑफ जेनेटिक रिसर्च फ़ॉर ह्यूस्टन, टेक्सास में हैं। उनका जन्म भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के पीथापुरम में हुआ था। उनके काम का एक फोकस उनके गुरु जे। बी। हाल्डेन का शोध रहा है। एक लेखक के रूप में, उनका नाम आम तौर पर कृष्ण आर द्रोणमृजु है।

द्रोणमृजू आंध्र प्रदेश के विजयनगरम विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान का अध्ययन करने के लिए गए और 1955 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 1957 में आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की; उन्होंने पौधे के प्रजनन और आनुवंशिकी का अध्ययन किया। जब जे.बी.एस. 1957 में हाल्डेन भारत आ गया, द्रोणमराजू ने कलकत्ता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान में उनके निर्देशन में एक शोध कैरियर को आगे बढ़ाने के अवसर के लिए हल्दाने को लिखा।

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दौलत सिंह कोठारी Daulat Singh Kothari
दौलत सिंह कोठारी (1906–1993) भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की विज्ञान नीति में जो लोग शामिल थे उनमें डॉ॰ कोठारी, होमी भाभा, डॉ॰ मेघनाथ साहा और सी.वी. रमन थे। डॉ॰ कोठारी रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे। 1961 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष नियुक्त हुए जहां वे दस वर्ष तक रहे। 1964 में उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। प्रशासकीय सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिये उन्हें सन 1962 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 1973 में उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।

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दादाजी रामजी खोबरागड़े Dadaji Ramaji Khobragade

दादाजी रामजी खोबरागड़े (मराठी: दादाजी रामजी खोब्रागड़े; मृत्यु 3 जून 2018) एक भारतीय कृषक थे, जिन्होंने धान, एचएमटी की उच्च उपज देने वाली किस्म को उगाया और परिष्कृत किया। डी.आर. खोबरागड़े महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के महार जाति के नाग नागिद गांव के थे। 1983 के आसपास, खोबरागड़े ने अपने खेत में थोड़े अलग दिखने और पीले रंग के बीजों के साथ 'पटेल 3' किस्म के धान के पौधे को देखा, जिसे उन्होंने आने वाले वर्षों में प्रयोग किया। नई किस्म उस समय उपलब्ध किस्मों की तुलना में उच्च पैदावार देती हुई पाई गई। 1990 तक, विविधता को HMT नाम दिया गया था। अपने नवाचार के बावजूद, खोबरागड़े एक गरीब और ज्यादातर उपेक्षित जीवन जीते थे।उन्हें कुछ मीडिया का ध्यान तब आया जब फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें 2010 में भारत के सात सबसे शक्तिशाली उद्यमियों में नामित किया।

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डॉ. दत्तात्रेयुडु नोरी Dattatreyudu Nori

डॉ. दत्तात्रेयुडु नोरी एक प्रख्यात भारतीय विकिरण ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। महिलाओं की पत्रिका लेडीज़ होम जर्नल द्वारा महिलाओं में कैंसर के इलाज के लिए उन्हें एक बार अमेरिका में शीर्ष डॉक्टरों में से एक नामित किया गया था। दत्तात्रेयुडु नोरी का जन्म भारत के आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मंटादा गाँव में एक तेलुगु परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मछलीपट्टनम में की। उन्होंने कुरनूल मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल की डिग्री और उस्मानिया मेडिकल कॉलेज से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।

डॉ नोरी न्यूयॉर्क शहर के न्यू यॉर्क-प्रेस्बिटेरियन अस्पताल / वेल कॉर्नेल मेडिकल कॉलेज में विकिरण ऑन्कोलॉजी विभाग के एक प्रोफेसर और कार्यकारी उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा, डॉ। नोरी क्वींस के न्यूयॉर्क अस्पताल मेडिकल सेंटर में विकिरण ऑन्कोलॉजी यूनिट के अध्यक्ष हैं।

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दाराशा नौशेरवां वाडिया Darashaw Nosherwan Wadia
प्रोफेसर दाराशा नौशेरवां वाडिया (Darashaw Nosherwan Wadia FRS ; 25 अक्तूबर 1883 – 15 जून 1969) भारत के अग्रगण्य भूवैज्ञानिक थे। वे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में कार्य करने वाले पहले कुछ वैज्ञानिकों में शामिल थे। वे हिमालय की स्तरिकी पर विशेष कार्य के लिये प्रसिद्ध हैं। उन्होने भारत में भूवैज्ञानिक अध्ययन तथा अनुसंधान स्थापित करने में सहायता की। उनकी स्मृति में 'हिमालयी भूविज्ञान संस्थान' का नाम बदलकर 1976 में 'वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्‍थान' कर दिया गया। उनके द्वारा रचित 1919 में पहली बार प्रकाशित 'भारत का भूविज्ञान' (Geology of India) अब भी प्रयोग में बना हुआ है।

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इरोड सुब्रमण्यन राजा गोपाल E. S. Raja Gopal

इरोड सुब्रमण्यन राजा गोपाल (12 मई 1 9 36 - 15 नवंबर 201 ) एक भारतीय संघनित भौतिक विज्ञानी, भारतीय विज्ञान संस्थान में पूर्व प्रोफेसर और भारत की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के पूर्व निदेशक थे। संघबद्ध भौतिक विज्ञान में अपने शोध के लिए जाने जाने वाले, राजा गोपाल भारतीय विज्ञान अकादमी, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत और इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेस - तीनों के एक चुने हुए साथी थे। भौतिक विज्ञान संस्थान। वह एक पूर्व सीएसआईआर एमेरिटस वैज्ञानिक, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और संघनित पदार्थ भौतिकी में तीन संदर्भ ग्रंथों के लेखक थे। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने उन्हें 1978 में भौतिक विज्ञान में उनके योगदान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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जी माधवन नायर G. Madhavan Nair

जी माधवन नायर (जन्म 31 अक्टूबर 1943) एक भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार के सचिव हैं। वह अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बैंगलोर के गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष भी रहे हैं। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष थे जब तक कि उन्होंने एंट्रिक्स से जुड़े रेडियो स्पेक्ट्रम बैंडविड्थ की बिक्री से संबंधित एक विवादास्पद सौदे में अपनी भागीदारी के कारण कदम नहीं उठाया। बाद में उन्हें किसी भी सरकारी पद पर रखने से रोक दिया गया।

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गोंडी कोंडैया अनंतसुरेश 31

गोंडी कोंडैया अनंतसुरेश एक भारतीय मैकेनिकल इंजीनियर और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु, भारत में प्रोफेसर हैं। उन्हें टोपोलॉजी ऑप्टिमाइज़ेशन, कंप्लेंट मैकेनिज़्म और माइक्रो-इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम्स (एमईएमएस) के क्षेत्रों में अपने काम के लिए जाना जाता है।

वह वर्तमान में भारतीय विज्ञान संस्थान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ME) विभाग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। वह पहले भारतीय विज्ञान संस्थान में बायोसिस्टम साइंसेज एंड इंजीनियरिंग (BSSE) के केंद्र के अध्यक्ष थे। वह इंजीनियरिंग विज्ञान के लिए 2010 में प्रतिष्ठित शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं।

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गिरिधर मद्रास 32

गिरिधर मद्रास एक भारतीय रासायनिक इंजीनियर और भारतीय विज्ञान संस्थान में एक प्रोफेसर हैं। वह स्वर्ण जयंती फैलोशिप, जे सी बोस नेशनल फेलोशिप और शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं।उन्होंने 20,000 से अधिक उद्धरणों के करीब 550 से अधिक जर्नल लेख प्रकाशित किए हैं। यह उसे भारत में इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम करने वाले सबसे उद्धृत वैज्ञानिकों में से एक बनाता है। उन्होंने 50 पीएचडी छात्रों सहित 100 से अधिक छात्रों को स्नातक किया है। वह IISc में जीवन के बारे में एक ब्लॉग भी लिखते हैं।

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गौतम राधाकृष्ण देसिराजू Gautam Radhakrishna Desiraju

गौतम राधाकृष्ण देसिराजू एक भारतीय रसायनज्ञ और शिक्षाविद् हैं जिन्होंने क्रिस्टल इंजीनियरिंग और कमजोर हाइड्रोजन बॉन्डिंग के विषयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने इन विषयों पर किताबें लिखी हैं। उन्होंने क्रिस्टल इंजीनियरिंग (2011) में एक पाठ्यपुस्तक का सह-लेखन किया है। वे सबसे उच्च उद्धृत भारतीय वैज्ञानिकों में से एक हैं और उन्हें अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ड्ट फोर्सचुंगस्पेरेस जैसे पुरस्कारों से मान्यता प्राप्त है, जो कि बोलोग्ना विश्वविद्यालय के विज्ञान 2018 के लिए आईएसए मेडल और रसायन विज्ञान में टीडब्ल्यूएएस पुरस्कार है। उन्होंने 2011-2014 के लिए त्रिकोणीय के लिए इंटरनेशनल यूनियन ऑफ क्रिस्टलोग्राफी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

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गजेंद्र पाल सिंह राघव Gajendra Pal Singh Raghava

गजेंद्र पाल सिंह राघव एक भारतीय जैव-सूचना विज्ञान और इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में कम्प्यूटेशनल जीव विज्ञान के प्रमुख हैं।

राघव का जन्म 1963 में भारत के बुलंदशहर जिले के गाँव नगला करण, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपनी मूल शिक्षा बुलंदशहर से और पोस्ट ग्रेजुएशन मेरठ, यूपी से 1984 में पूरा किया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में एम। टेक पूरा करने के बाद, नई दिल्ली, वह एक कंप्यूटर वैज्ञानिक के रूप में इंस्टिट्यूट ऑफ़ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी में शामिल हो गए। वहाँ उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं पर काम करना जारी रखा और 1994 में जैव सूचना विज्ञान केंद्र के प्रमुख बने। 1996 में उन्होंने इंस्टिट्यूट ऑफ़ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी एंड पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से जैव सूचना विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

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गणपति थानिकिमोनी Ganapathi Thanikaimoni

गणपति थानिकिमोनी (1 जनवरी 1 938 - 5 सितंबर 1986), जिसे अक्सर थनिकामोनी कहा जाता था, एक भारतीय राजवंशविज्ञानी था। मद्रास, भारत में नए साल के दिन 1938 को जन्मे, थानी ने 1962 में वनस्पति विज्ञान में मास्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्राप्त की, प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास में प्लांट मॉर्फोलॉजिस्ट के निर्देशन में प्रोफेसर बी.जी.एल. स्वामी। उसी समय थानी को नैसर्गिक विज्ञान में फाइसन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उत्कृष्ट भारतीय प्रकृतिवादियों के लिए आरक्षित है।

थानी ने डॉ। प्रो। गिनीट के निर्देशन में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पॉन्डिचेरी (फ्रेंच: इंस्टीट्यूट फ्रैंक्स डी पांडिचेरी) की नव स्थापित (1960) पैलियोलॉजी प्रयोगशाला में वैज्ञानिक का पद ग्रहण किया। कुछ वर्षों में थानी की वैज्ञानिक और प्रशासनिक क्षमताओं को प्रयोगशाला के निर्देशन में उनके प्रचार से पहचाना गया।

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गांडीकोटा वी. राव 33

गांडीकोटा वी. राव (15 जुलाई 1934 को विजयनगरम, भारत में - 31 जुलाई 2004 को मैक्सिको में) एक भारतीय-अमेरिकी वायुमंडलीय वैज्ञानिक थे, जिन्होंने सेंट लुइस विश्वविद्यालय (SLU) में पृथ्वी और वायुमंडलीय विज्ञान विभाग की अध्यक्षता की। वे उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान, मानसून, उष्णकटिबंधीय चक्रवात और उष्णकटिबंधीय चक्रवात बवंडर पर एक विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञ थे। वह वायु प्रदूषण, वायुमंडलीय संवहन, वायुमंडलीय सीमा परतों और संख्यात्मक मौसम की भविष्यवाणी पर काम करने के लिए भी जाना जाता था।

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Ravi Gomatam

रवि वीराराघवन गोमताम (जन्म 1950, चेन्नई, भारत में) भक्तिवेदांत इंस्टीट्यूट (बर्कले और मुंबई) के निदेशक और नवनिर्मित इंस्टीट्यूट ऑफ सिमेंटिक इन्फॉर्मेशन साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (बर्कले और मुंबई) के निदेशक हैं। वह इन संस्थानों में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम पढ़ाता है। वह बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS), पिलानी, राजस्थान, भारत (1993-2015) में एक सहायक प्रोफेसर थे।

उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत भारत सरकार के निकाय, भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद (ICPR) में वर्ष 2016-2017 के लिए विजिटिंग प्रोफेसर बनाया गया है।

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Govindarajan Padmanaban

गोविंदराजन पद्मनाभन (जन्म 20 मार्च 1938, मद्रास में) एक भारतीय जैव रसायनशास्त्री और जैव प्रौद्योगिकीविद हैं। वह भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के पूर्व निदेशक थे, और वर्तमान में IISc में जैव रसायन विभाग में मानद प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हैं।

पद्मनाभन को इंजीनियरों के एक परिवार में लाया गया था। उनका ताल्लुक तमिलनाडु के तंजौर जिले से है लेकिन वे बैंगलोर में बस गए थे। बैंगलोर में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। हालाँकि, उन्होंने इंजीनियरिंग को निर्बाध पाया, और उन्होंने रसायन शास्त्र में स्नातक की डिग्री पूरी करने के लिए मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में मृदा रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर पूरा किया और पीएच.डी. 1966 में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर में जैव रसायन विज्ञान में।

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गुरसरन प्राण तलवार 35

गुरसरन प्राण तलवार एक चिकित्सा शोधकर्ता हैं जो टीके और इम्युनोकंट्रेसन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। 1994 के एक पेपर में, उनके समूह ने यह दर्शाया कि गर्भावस्था को रोकने के लिए महिलाओं को टीका लगाया जा सकता है। गुरसरन प्रसाद तलवार ने पंजाब विश्वविद्यालय से बीएससी (ऑनर्स) और एमएससी (टेक) की डिग्री प्राप्त की, सोरबोन से डीएससी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से इंस्टीट्यूट पाश्चर, पेरिस और डीएससी (एचसी) में काम कर रहे (2004)। वह ट्युबिंगन, स्टटगार्ट और म्यूनिख में अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट पोस्टडॉक्टोरल फेलो थे। वह नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली में जैव रसायन विज्ञान (1956) के एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए, और 1983 तक प्रोफेसर और प्रमुख के रूप में भी काम किया। वे प्रमुख, ICMR-WHO अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के प्रमुख थे। भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए इम्यूनोलॉजी (1972-91)। वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (एनआईआई) (1983-91) के संस्थापक निदेशक थे और 1994 तक प्रख्यात के प्रोफेसर भी थे। वह प्रख्यात और वरिष्ठ सलाहकार, जेनेटिक इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईसीबी), नई दिल्ली के प्रोफेसर थे। 1994–99) और निदेशक अनुसंधान, तलवार रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली (2000-)। वह प्रोफेसर, कॉलेज डे फ्रांस (1991), जॉन्स हॉपकिन्स में वेलकम प्रोफेसर (1994-95), और पुणे के इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइनफॉरमैटिक्स एंड बायोटेक्नोलॉजी में प्रतिष्ठित प्रोफेसर थे (2005-10)।

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गणेश वेंकटरमन 36

गणेश वेंकटरमन एक भारतीय संघनित भौतिक विज्ञानी, लेखक और श्री सत्य साई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, और भारतीय विज्ञान अकादमी के एक चुने हुए साथी, वेंकटरमण जवाहरलाल नेहरू फैलोशिप के प्राप्तकर्ता हैं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सर सीवी रमन पुरस्कार और विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का। भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म श्री के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया।

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गणपति नरेश पटवारी 37

गणपति नरेश पटवारी (जन्म 13 दिसंबर 1972) एक भारतीय रसायनज्ञ और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बंबई के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। कंपन स्पेक्ट्रोस्कोपी पर उनके अध्ययन के लिए जाना जाता है, उनके काम ने हाइड्रोजन बॉन्डिंग में मूलभूत अवधारणाओं की समझ को चौड़ा किया है।

13 दिसंबर 1972 को दक्षिण भारतीय राज्य अविभाजित आंध्र प्रदेश (वर्तमान में तेलंगाना में) के निज़ामाबाद जिले के बोधन मंडल में जन्मे नरेश पटवारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर गाँव में की। उनकी स्नातक की पढ़ाई उस्मानिया विश्वविद्यालय में हुई और 1992 में बीएससी करने के बाद, उन्होंने 1994 में अपनी मास्टर डिग्री (एमएससी) पूरी करने के लिए हैदराबाद विश्वविद्यालय का रुख किया। इसके बाद, उन्होंने 2000 में पीएचडी को सुरक्षित करने के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में डॉक्टरेट अनुसंधान के लिए दाखिला लिया, जिसके बाद उन्होंने जापान सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ साइंस द्वारा सम्मानित की गई फ़ेलोशिप पर 2000 से 02 के दौरान टोहोकू विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट के बाद काम किया और अपना पद पूरा किया। 2003 में यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के अर्बाना-शैंपेन में डॉक्टरेट का काम। भारत लौटकर, उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे में अप्रैल 2003 में एक सहायक प्रोफेसर के रूप में प्रवेश किया, 2007 में एक एसोसिएट प्रोफेसर बने और 2012 से एक प्रोफेसर का पद संभाला।

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घनश्याम स्वरूप 38

घनश्याम स्वरूप (जन्म 1953) एक भारतीय आणविक जीवविज्ञानी, जे। सी। बोस नेशनल फेलो और सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के घनश्याम स्वरूप रिसर्च ग्रुप के प्रमुख हैं।वे ग्लूकोमा पर अपने अध्ययन और प्रोटीन टायरोसिन फॉस्फेट की खोज के लिए जाने जाते हैं, जो कोशिका प्रसार के नियमन को प्रभावित करने वाला एक नया प्रोटीन है। वह भारतीय विज्ञान अकादमी, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत के एक चुने हुए साथी हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने, 1996 में जैविक विज्ञान में उनके योगदान के लिए, उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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गोविंद स्वरूप Govind Swarup

गोविंद स्वरूप (23 मार्च, 1929 - 7 सितंबर, 2020) एक रेडियो खगोलशास्त्री और रेडियो खगोल विज्ञान के अग्रदूतों में से एक थे, जिन्हें न केवल खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के कई क्षेत्रों में उनके महत्वपूर्ण शोध योगदान के लिए जाना जाता था, बल्कि उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए भी रेडियो खगोल विज्ञान में फ्रंट-लाइन अनुसंधान के लिए सरल, नवीन और शक्तिशाली अवलोकन सुविधाओं का निर्माण। वह पुणे के पास ऊटी रेडियो टेलीस्कोप (भारत) और विशालकाय मेट्रूवे रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) की अवधारणा, डिजाइन और स्थापना के पीछे प्रमुख वैज्ञानिक थे। उनके नेतृत्व में, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स का एक मजबूत समूह बनाया गया है, जो दुनिया में सबसे अच्छा करने के लिए तुलनीय है।

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गोपीनाथ करथा 39

गोपीनाथ करथा (26 जनवरी 1927 - 18 जून 1984) भारतीय मूल के एक प्रमुख क्रिस्टलोग्राफर थे। 1967 में, उन्होंने एंजाइम राइबोन्यूक्लाइज की आणविक संरचना का निर्धारण किया। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रकाशित और प्रकाशित पहली प्रोटीन संरचना थी।

गोपीनाथ करथा का जन्म भारत के केरल राज्य में अलाप्पुझा के पास चेरथला में हुआ था। वह अलप्पुझा में सनातनधर्म विद्या साला में स्कूल गए। गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान में उनका स्नातक डिप्लोमा यूनिवर्सिटी कॉलेज, तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) से था। उन्होंने बी.एससी। भौतिकी में 1950 में मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई, तमिलनाडु, भारत से। उन्होंने एक और बी.एससी। 1951 में आंध्र विश्वविद्यालय विशाखापत्तनम से गणित में।

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हुलीकल रामईंगर कृष्णमूर्ति H. R. Krishnamurthy

हुलीकल रामईंगर कृष्णमूर्ति (जन्म 1951) एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं। वह सैद्धांतिक रूप से संघनित पदार्थ भौतिकी में माहिर हैं, विशेष रूप से कई शरीर सिद्धांत और सांख्यिकीय भौतिकी क्वांटम। वे भारतीय विज्ञान संस्थान के भौतिकी विभाग के अध्यक्ष थे। वह उन अनुसंधान विद्वानों में से एक हैं जिन्होंने प्रो केनेथ जी। विल्सन के अधीन काम किया। उनका मुख्य काम रेनॉर्लाइज़ेशन ग्रुप एप्रोच टू एंडरसन मॉडल ऑफ़ डिल्यूट मैग्नेटिक अलॉयज़ था।

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हलायुध 40
राव हलायुध या भट हलायुध (समय लगभग 10 वीं0 शताब्दी ई0) भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषविद्, गणितज्ञ और वैज्ञानिक थे। उन्होने मृतसंजीवनी नामक ग्रन्थ की रचना की जो पिंगल के छन्दशास्त्र का भाष्य है। इसमें पास्कल त्रिभुज (मेरु प्रस्तार) का स्पष्ट वर्णन मिलता है। परे पूर्णमिति। उपरिष्टादेकं चतुरस्रकोष्ठं लिखित्वा तस्याधस्तात् उभयतोर्धनिष्क्रान्तं कोष्ठद्वयं लिखेत्। तस्याप्यधस्तात् त्रयं तस्याप्यधस्तात् चतुष्टयं यावदभिमतं स्थानमिति मेरुप्रस्तारः। तस्य प्रथमे कोष्ठे एकसंख्यां व्यवस्थाप्य लक्षणमिदं प्रवर्तयेत्। तत्र परे कोष्ठे यत् वृत्तसंख्याजातं तत् पूर्वकोष्ठयोः पूर्णं निवेशयेत्। हलायुध द्वारा रचित कोश का नाम अभिधानरत्नमाला है, पर यह हलायुधकोश नाम से अधिक प्रसिद्ध है। इसके पाँच कांड (स्वर, भूमि, पाताल, सामान्य और अनेकार्थ) हैं। प्रथम चार पर्यायवाची कांड हैं, पंचम में अनेकार्थक तथा अव्यय शब्द संगृहीत है। इसमें पूर्वकोशकारों के रूप में अमरदत्त, वरुरुचि, भागुरि और वोपालित के नाम उद्धृत है। रूपभेद से लिंग-बोधन की प्रक्रिया अपनाई गई है। 900 श्लोकों के इस ग्रंथ पर अमरकोश का पर्याप्त प्रभाव जान पड़ता है। कविरहस्य भी इनका रचित है जिसमें 'हलायुध' ने धातुओं के लट्लकार के भिन्न भिन्न रूपों का विशदीकरण भी किया है।

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हिम्मतराव सलूबा बावस्कर 41

हिम्मतराव सलूबा बावस्कर महाराष्ट्र के महाड के एक भारतीय चिकित्सक हैं, जिन्हें ब्रिटिश चिकित्सा पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित किया गया है|वह बिच्छू के जहर के इलाज के लिए अपने शोध के लिए अच्छी तरह से जाना जाता है। इस विषय पर उनका सबसे उद्धृत पेपर स्कोर्पियन स्टिंग: अपडेट है, जो जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ है। उनका अल्मा मेटर पुणे में बी। जे। मेडिकल कॉलेज है।

बावस्कर चिकित्सा में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में शामिल है।

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होमी सेठना Homi Sethna
होमी नौशेरवानजी सेठना (1924 – 5 सितम्बर 2010) भारत के परमाणु वैज्ञानिक एवं परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष थे। सन् 1974 में भारत द्वारा पोकरण में प्रथम परमाणु विस्फोट के समय वे परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष थे। डा. सेठना देश के उन श्रेष्ठ परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों में से एक थे जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद देश को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने का स्वप्न देखा और उसको क्रियान्वित करने का बीड़ा उठाया। इसीलिए उन्हें भारत के परमाणु कार्यक्रमों का स्तम्भ माना जाता था। बताते हैं कि अपने दौर के श्रेष्ठतम परमाणु वैज्ञानिकों में से एक डा. होमी भाभा से एक अनौपचारिक मुलाकात के बाद डा. सेठना के जीवन की दिशा बदल गई और वे परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम बन गए। डा. सेठना समय के पक्के, अनुशासनबद्ध और काम के सामने सब कुछ भुला देने वाले परिश्रमी व्यक्तित्व के धनी माने जाते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ परमाणु परीक्षण की बारीकियों की विस्तार से चर्चा करके उन्हें इसके लिए तैयार करने में डा. सेठना की प्रमुख भूमिका थी। परीक्षण के लिए पोकरण में स्थान का चयन करने से लेकर विभिन्न तकनीकी बारीकियों की चिंता करने वाले डा. सेठना वैज्ञानिकों के अपने दल के प्रेरणास्रोत की तरह थे। उनके दल ने इतनी सुघड़ता से उस परीक्षण को क्रियान्वित किया था कि, कहते हैं, अमरीकी उपग्रहों तक को उसकी भनक नहीं मिली थी।

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हरि बालकृष्णन 42

हरि बालकृष्णन एमआईटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान विभाग में फुजित्सु अध्यक्ष हैं। वह कंप्यूटर नेटवर्क, नेटवर्क कंप्यूटर सिस्टम और मोबाइल कंप्यूटिंग में अपने योगदान के लिए जाना जाता है, जिसमें ओवरले और पीयर-टू-पीयर नेटवर्क, इंटरनेट रूटिंग और कंजेशन कंट्रोल, वायरलेस और सेंसर नेटवर्क, नेटवर्क सुरक्षा और वितरित डेटा प्रबंधन शामिल हैं। रॉन ओवरले नेटवर्क, कॉर्ड ने हैश टेबल, क्रिकेट इंडोर लोकेशन सिस्टम, इंफ्रानेट एंटी-सेंसरशिप सिस्टम, इंटरनेट रूटिंग (बीजीपी) में विभिन्न सुधार, कॉन्ग्रेसीयन मैनेजर और द्विपद कंजेशन कंट्रोल, स्नूप वायरलेस टीसीपी प्रोटोकॉल, और एप्रोच को वितरित किया। स्पैम नियंत्रण और सेवा से वंचित करना उनके कुछ उल्लेखनीय योगदान हैं। उनके वर्तमान शोध में उच्च-प्रदर्शन वायरलेस प्रोटोकॉल और वाहनों के अनुप्रयोगों के लिए कारटेल मोबाइल सेंसर कंप्यूटिंग प्रणाली शामिल है। 2003 में, उन्होंने स्ट्रीमबेस सिस्टम की सह-स्थापना की, माइक स्टोनब्रोकर, स्टेन ज़ोनडिक और अन्य के सहयोग से मेडुसा / अरोरा परियोजना से अनुसंधान का व्यवसायीकरण किया।

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इंद्राणी बोस 43

इंद्राणी बोस (जन्म 15 अगस्त 1951) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी, भौतिकी विभाग, बोस संस्थान, कोलकाता में वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। विशेषज्ञता के उनके क्षेत्र सैद्धांतिक संघनित वस्तु, क्वांटम सूचना सिद्धांत, सांख्यिकीय भौतिकी, जैविक भौतिकी और प्रणालियों में हैं। बोस ने उन्हें पीएच.डी. (भौतिकी) 1981 में राजाबाजार साइंस कॉलेज, कलकत्ता विश्वविद्यालय से। बोस के अनुसंधान हितों में क्वांटम की समस्या कई शरीर प्रणाली, क्वांटम सूचना सिद्धांत, सांख्यिकीय यांत्रिकी और सिस्टम जीव विज्ञान शामिल हैं।

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इंदुमाधब मल्लिक Indumadhab Mallick

इंदुमाधब मल्लिक ( 4 दिसंबर 1 196 9 - was मई 1 9 1ick) एक भारतीय पुलिसकर्मी थे जिन्होंने आइकमिक कुकर का आविष्कार किया और इसे व्यावसायिक सफलता दिलाई। वे एक दार्शनिक, भौतिक विज्ञानी, वनस्पतिशास्त्री, वकील, चिकित्सक, आविष्कारक, उद्यमी, कलेक्टर, यात्री, लेखक और समाज सुधारक थे।

इंदुमाधब का जन्म 4 दिसंबर 1869 को बंगाल के हुगली जिले के गुप्तिपारा गाँव में एक बैद्य ब्राह्मण परिवार में राधागोबिंडा मल्लिक के यहाँ हुआ था।उनका परिवार कोलकाता के भौवनिपोर के मल्लिक परिवार से संबंधित था। वह कवि उपेंद्र मल्लिक के पिता और अभिनेता रंजीत मल्लिक के दादा हैं। 1891 में, इंदुमाधब ने दर्शनशास्त्र में अपने स्वामी को पूरा किया। 1892 में, उन्होंने भौतिकी में स्नातकोत्तर किया। वह 1894 में कानून के स्नातक बन गए।

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ज्येष्ठराज भालचंद्र जोशी Jyeshtharaj Joshi

ज्येष्ठराज भालचंद्र जोशी एक भारतीय रासायनिक इंजीनियर, परमाणु वैज्ञानिक, सलाहकार और शिक्षक हैं, जिन्हें व्यापक रूप से परमाणु रिएक्टर डिजाइन में नवाचारों के लिए जाना जाता है और आमतौर पर एक सम्मानित शिक्षक के रूप में माना जाता है। वह डीएई-होमी भाभा चेयर प्रोफेसर, होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट, मुंबई, और इंजीनियरिंग विज्ञान और कई अन्य पुरस्कारों और पहचानों के लिए शांतिस्वरुप भटनागर पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं। उन्हें रासायनिक इंजीनियरिंग और परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के लिए 2014 में तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण मिला|

जोशी का जन्म 28 मई 1949 को भारत के महाराष्ट्र राज्य के सतारा जिले के मसूर कस्बे में भालचंद्र (काका) जोशी के पुत्र के रूप में हुआ था। उन्होंने 1971 में केमिकल इंजीनियरिंग में बीई पास की और 1972 में एमई यूनिवर्सिटी ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (यूडीसीटी), मुंबई से एमई की, जिसके बाद उन्होंने अपना शोध शुरू किया, जिसका नाम बदलकर केमिकल इंजीनियर मन मोहन शर्मा के मार्गदर्शन में रखा गया। 1977 में, उन्हें पीएचडी से सम्मानित किया गया।

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ज्ञानचन्द्र घोष Jnan Chandra Ghosh
ज्ञानचंद्र घोष (1894 - 1959 ई) भारत के एक अग्रगण्य वैज्ञानिक थे। इनका जन्म 14 सितंबर 1894 ई को पुरुलिया में हुआ था। गिरिडीह से प्रवेशिका परीक्षा में उत्तीर्ण हो, कलकत्ते के प्रेसिडेंसी कालेज से 1915 ई एम एस-सी परीक्षा में इन्होंने प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। तत्काल कलकत्ता विश्वविद्यालय के सायंस कोलज में प्राध्यापक नियुक्त हुए। 1918 ई में डी एस-सी की उपाधि प्राप्त की। 1919 ई में यूरोप गए, जहाँ इंग्लैंड के प्रोफेसर डोनान और जर्मनी के डा नर्स्ट और हेवर के अधीन कार्य किया। 1921 ई में यूरोप से लौटने पर ढाका विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नियुक्त हुए। 1939 ई में ढाका से भारतीय विज्ञान संस्थान (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑव सायंस) के डाइरेक्टर होकर बँगलौर गए। बंगलुरू में भारत सरकार के इंडस्ट्रीज और सप्लाइज़ के डाइरेक्टर जनरल के पद पर 1947-1950 ई तक रहे। फिर खड़गपुर के तकनीकी संस्थान को स्थापित कर एवं प्राय: चार वर्ष तक उसके डाइरेक्टर रहकर, कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति नियुक्त हुए। वहाँ से योजना आयोग के सदस्य होकर भारत सरकार में गए। उसी पद पर रहते हुए 21 जनवरी 1959 को आपका देहावसान हुआ।

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जसवीर सिंह बजाज 44

जसवीर सिंह बजाज एक भारतीय चिकित्सक और मधुमेह विशेषज्ञ थे। उन्हें चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान और स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के उनके प्रयासों के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें 1981 में पद्मश्री और 1982 में पद्म भूषण से अलंकृत किया गया था। वह चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में सेवाओं के लिए पुरस्कार प्राप्त करने वाले देश के नौवें व्यक्ति थे।

1991-98 में राज्य मंत्री के पद के साथ बजाज योजना आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) थे। वह 1966 में एम्स संकाय में शामिल हुए और 1979 में प्रोफेसर और चिकित्सा के प्रमुख नियुक्त किए गए। उन्हें 1977-1982 के दौरान और फिर 1987 से 1992 के दौरान भारत के राष्ट्रपति के लिए मानद चिकित्सक नियुक्त किया गया था। वह 1991 से 1996 तक प्रधान मंत्री के सलाहकार चिकित्सक भी थे। उन्होंने एंडोक्रिनोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त की और करोलिंस्का इंस्टीट्यूट, स्टॉकहोम, स्वीडन द्वारा सम्मानित किया गया। जब 1985 में अपनी 175 वीं वर्षगांठ के उत्सव के समय, डॉक्टरेट इन मेडिसिन उन्हें सम्मानित किया गया।

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जितेन्द्रनाथ गोस्वामी Jitendra Nath Goswami

जितेन्द्रनाथ गोस्वामी (जन्म 18 नवंबर 1950) जोरहाट, असम के एक भारतीय वैज्ञानिक हैं। वह चंद्रयान -1 के मुख्य वैज्ञानिक थे और इस परियोजना के डेवलपर भी थे। उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक के रूप में कार्य किया। वह चंद्रयान -2 और मंगलयान से भी जुड़े थे।

गोस्वामी ने जोरहाट से स्कूलिंग शुरू की। 1965 में, उन्हें AHSEC द्वारा आयोजित उच्च माध्यमिक परीक्षा में 6 वां स्थान मिला। फिर उन्होंने भौतिकी का अध्ययन करने के लिए कॉटन कॉलेज में दाखिला लिया। [उद्धरण वांछित] उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री प्राप्त की और पीएचडी के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में शामिल हो गए। इस समयावधि में उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में स्नातकोत्तर अनुसंधान विद्वान के रूप में भी काम किया। 1978 में, उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।

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कालपति रामकृष्ण रामनाथन K. R. Ramanathan

दीवान बहादुर कालपति रामकृष्ण रामनाथन FNA, FASc, FIAS, माननीय .RRetS (28 फरवरी 1893 - 31 दिसंबर 1984) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और मौसम विज्ञानी थे। वे भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद के पहले निदेशक थे। 1954 से 1957 तक, रामनाथन इंटरनेशनल यूनियन ऑफ जियोडेसी एंड जियोफिजिक्स (IUGG) के अध्यक्ष थे। रामनाथन को 1965 में पद्म भूषण और 1976 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

रामनाथन का जन्म कलापथी, पालक्कड़ में रामकृष्ण सतिगृल, एक ज्योतिषी, मुद्रक और संस्कृत विद्वान के रूप में हुआ था। माध्यमिक विद्यालय पूरा करने के बाद, उन्होंने 1909 में गवर्नमेंट विक्टोरिया कॉलेज, पलक्कड़ में प्रवेश किया। 1911 में, उन्होंने मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज में भाग लेने के लिए एक सरकारी छात्रवृत्ति प्राप्त की, जहाँ उन्होंने बी.ए. (ऑनर्स।) भौतिकी में डिग्री। उन्होंने 1914 में, और 1916 में एक एमए की उपाधि प्राप्त की। अपने एमए के बाद, त्रावणकोर (अब यूनिवर्सिटी कॉलेज तिरुवनंतपुरम) में तिरुवनंतपुरम में महाराजा कॉलेज ऑफ साइंस के प्रिंसिपल थे, जो उनके परीक्षकों में से एक थे। उसे भौतिकी में एक प्रदर्शनकारी का पद। कॉलेज में, रामनाथन को अपनी जाँच करने और अपने प्रयोगशाला कौशल को सुधारने की आज़ादी मिली।

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के. श्रीधर 45

के. श्रीधर (जन्म 27 मई 1961) सैद्धांतिक उच्च ऊर्जा भौतिकी और कथा साहित्य के क्षेत्र में शोध करने वाले एक भारतीय वैज्ञानिक हैं। के. श्रीधर ने 1990 में मुंबई विश्वविद्यालय से भौतिकी में पीएचडी प्राप्त की। अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई के बाद उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय और सर्न, जिनेवा में काम किया। उनका सर्न, जिनेवा के साथ सहयोगी संघ है; एलएपीपी, वार्षिकी; DAMTP, कैम्ब्रिज और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑर्से, पेरिस। आज वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई में सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर हैं।

उनकी वर्तमान रुचि मुख्य रूप से अतिरिक्त आयामों के सिद्धांतों में है, लेकिन उन्होंने क्वांटम क्रोमोडायनामिक्स, सुपरसेमेट्री, भव्य एकीकरण और इलेक्ट्रोकेक भौतिकी में भी योगदान दिया है। उन्होंने अतिरिक्त आयामों, क्वार्कोनियम भौतिकी और आर-समता के सुपर मॉडल का उल्लंघन करने वाले ब्रो-वर्ल्ड मॉडल में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने श्रेयरुप रायचौधुरी के साथ ब्रैक वर्ल्ड्स और एक्स्ट्रा डाइमेंशन की एक किताब पार्टिकल फिजिक्स प्रकाशित की है जो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा गणितीय भौतिकी पर कैम्ब्रिज मोनोग्राफ में प्रकाशित की गई है।

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कैलाशनाथ कौल Kailas Nath Kaul

कैलास नाथ कौल (1905-1983) एक भारतीय वनस्पति विज्ञानी, प्रकृतिवादी, कृषि वैज्ञानिक, बागवानी वैज्ञानिक, वनस्पति विज्ञानी, पादप कलेक्टर और हेरपेटोलॉजिस्ट थे| उन्होंने भारत के राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान की स्थापना की और देश के आधुनिक वैज्ञानिक बुनियादी ढाँचे के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्यापक विधायी और नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में अपनी भतीजी इंदिरा गांधी की सक्रिय भूमिका के पीछे उन्हें एक महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। रॉयल बोटैनिकल गार्डन, केवमें पहले भारतीय वैज्ञानिक के रूप में कार्य करने और प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, लंदन और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय सहित कई ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के साथ काम करने के बाद, प्रोफेसर कौल ने राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान की स्थापना की। पूर्व में, भारत का राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान), 1948 में लखनऊ में। उन्होंने 1965 तक संस्थान का निर्देशन किया, इस दौरान केव (यूके), बोगोर (इंडोनेशिया) के साथ-साथ यह दुनिया के पांच सर्वश्रेष्ठ वनस्पति उद्यानों में से एक रहा। पेरिस (फ्रांस) और न्यूयॉर्क (यूएसए)। 1 9 53 से 1 9 65 तक, कौल ने पूरे भारत का सर्वेक्षण किया, उत्तर में काराकोरम पहाड़ों से लेकर देश के दक्षिणी छोर पर कन्याकुमारी तक और पूर्व में उत्तर पूर्व सीमांत एजेंसी से लेकर पश्चिम में कच्छ के रण तक। उसी अवधि में, उन्होंने पेरादेनिया (श्रीलंका), सिंगापुर, बोगोर (इंडोनेशिया), बैंकॉक (थाईलैंड), हांगकांग, टोक्यो (जापान), और मनीला (फिलीपींस) में वनस्पति उद्यान के विकास में योगदान दिया। उन्होंने पेरिस (1954), मॉन्ट्रियल (1959) और एडिनबर्ग (1964) में अंतर्राष्ट्रीय वनस्पति कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

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कमला सोहोनी Kamala Sohonie

कमला सोहोनी (1912-1998) एक भारतीय जैव रसायनज्ञ थी। वह वैज्ञान के क्षेत्र में पी एच डी प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला थीं।कमला सोहोनी (विवाह से पूर्व भागवत) का जन्म 1912 में इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत में हुआ था। उनके पिता नारायणराव भागवत, एक रसायनज्ञ थे। कमला ने 1933 में स्नातक (प्राचार्य) और मुंबई विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान (सहायक) में बीएससी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रोटीनों पर काम किया, और अनुसंधान ने जैव रसायन में एमएससी की डिग्री हासिल की। डॉ. डेरेक रिक्टर के तहत फ्रेडरिक जी हॉपकिंस प्रयोगशाला में काम करने के लिए उन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में आमंत्रित किया गया था।

उन्होंने डॉ रॉबिन हिल के तहत काम किया, और सेल्यूलर एंजाइम साइटोक्रोम सी की खोज की। उन्होंने साइटोक्रोम सी पर अपनी पढ़ाई के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पी एच डी की डिग्री प्राप्त की। उन्हें 'नीरा' पेय पर अपने काम के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया जो कि कुपोषित बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण भोजन है।

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कविता शाह 47

कविता शाह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण और सतत विकास संस्थान में एक भारतीय पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकीविद हैं।वह छह निदेशकों में से एक और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की एकमात्र महिला निदेशक हैं। वह पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी भूमिका के लिए उल्लेखनीय है।

उसने अपनी MSc, B.Ed, Ph.D. और कुछ पोस्ट-डॉक्स पूरी की है और फिर NEHU में पढ़ाया है और वहाँ तीन और पोस्ट-डॉक्स पूरे किए हैं। उन्होंने महिला महाविद्यालय में महिला महाविद्यालय में महिला महाविद्यालय (MMV) नाम से एक जूलॉजी छात्रा के रूप में शुरुआत की।शिलॉन्ग में जापान, जिनेवा और नॉर्थ ईस्ट हिल यूनिवर्सिटी के स्टिंट के बाद, उन्होंने खुद को बीएचयू में पढ़ाने के लिए वापस आते हुए पाया। कार्य के एक प्रमुख क्षेत्र में इमबिलाइज्ड प्लांट एंजाइम (बायोटेक्नोलॉजी और बायो प्रोसेस इंजीनियरिंग, 13, 632-638, 2008) का उपयोग करके बायोसेंसर का विकास शामिल है और एचआईवी प्रोटीज के अवरोधकों से संबंधित अध्ययन (सिलिको बायोलॉजी, 8-033, 2008 में) शामिल हैं। एचआईवी इंटीग्रेज (आर्कियोलॉजी ऑफ वायरोलॉजी 2014) और एन। मेनिंगिटाइड्स वैक्सीन कंस्ट्रक्शन (इंडियन जर्नल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, 2010) में जैव सूचना विज्ञान उपकरण का उपयोग करते हुए सिलिको में।

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केदारेश्वर बनर्जी Kedareswar Banerjee
केदारेश्वर बनर्जी (15 सितम्बर, 1900 – 30 अप्रैल, 1975) एक एक्स-किरण क्रिस्टलोग्राफर तथा कोलकाता के इण्डियन एसोसियेशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईन्स के निदेशक थे|क्रिस्टिलोग्राफी के विकास में प्रो. केदारेश्वर बनर्जी द्वारा 1933 में किया गया शोध बाद में प्रो. हरबर्ट हैपमैन और कारले को दिए गए नोबल पुरस्कार की नींव बना। प्रो. बनर्जी ने प्रो. सीवी रमन के साथ शोध कार्य किया। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में काँच, बहुलक (पॉलीमर) और अमॉफिस पदार्थो पर कार्य किया जो बाद में बेहद महत्वपूर्ण पदार्थ सिद्ध हुए। उसके बाद ही एक्सरे डिफ्रेक्शन का प्रयोग डीएनए की संरचना जानने के लिए किया गया। इस कार्य के लिए प्रसिद्ध वैज्ञानिक वाटसन और फिक्र को नोबल पुरस्कार दिया गया।

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डॉ. केवल कृष्ण Kewal Krishan

डॉ. केवल कृष्ण, एक भारतीय फोरेंसिक मानवविज्ञानी, भौतिक नृविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर और पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में भारत के नृविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्होंने भारत में फोरेंसिक नृविज्ञान के विकास में योगदान दिया है। वह राष्ट्र के बहुत कम फोरेंसिक नृविज्ञान विशेषज्ञों में से एक हैं। [उद्धरण वांछित] उन्होंने 2003 में पंजाब की चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजी में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वह रॉयल एंथ्रोपोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड (FRAI) के एक निर्वाचित साथी हैं।

उनका प्रकाशित शोध मानव आबादी के विभिन्न पहलुओं और भारतीय आबादी में उनके फोरेंसिक अनुप्रयोगों के विश्लेषण से संबंधित है। उन्होंने 2013 में और 2016 में एल्सेवियर द्वारा प्रकाशित फॉरेंसिक साइंसेज 2000 संस्करण और एनसाइक्लोपीडिया ऑफ फॉरेंसिक एंड लीगल मेडिसिन 2 डी संस्करण के लेखों में योगदान दिया है। उनका सबसे उद्धृत कार्य उत्तर भारतीय आबादी के फोरेंसिक पोडियाट्री से संबंधित है। 2008 में अपने एक उल्लेखनीय कार्य में, उन्होंने पैरों के निशान पर शरीर के वजन और शरीर के अतिरिक्त वजन के प्रभाव और अपराध स्थल की जांच में इसकी व्याख्या का अध्ययन किया। उन्होंने पदचिह्नों की कुछ अनोखी और व्यक्तिवादी विशेषताओं को भी स्थापित किया जो अपराधियों की पहचान में सहायक हैं। उन्होंने फोरेंसिक परीक्षाओं में कद के आकलन पर अंग विषमता के प्रभाव को तैयार किया और गणना की।

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प्रो. कोटचेर्लकोता रंगधाम राव Kotcherlakota Rangadhama Rao

प्रो. कोटचेर्लकोता रंगधाम राव (9 सितंबर 1898 - 20 जून 1972) स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में एक भारतीय भौतिक विज्ञानी थे।

रंगधाम राव को स्पेक्ट्रोस्कोपी पर उनके काम के लिए जाना जाता है, जो न्यूक्लियर क्वाड्रुपोल रेजोनेंस (NQR) के विकास में उनकी भूमिका, और आंध्र विश्वविद्यालय के भौतिकी प्रयोगशालाओं के साथ उनके लंबे जुड़ाव के कारण है। अपने बाद के वर्षों में, उन्हें अलग-अलग, अर्थात, एयू कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, एयू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, एयू कॉलेज ऑफ लॉ, एयू कॉलेज में उनके विभाजन से पहले आंध्र विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल के रूप में जाना जाता था। फार्मेसी और एयू कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी।

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कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन Krishnaswamy Kasturirangan

कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन प्रसिद्ध भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक एवं राज्यसभा के सांसद हैं। इन्हें भारत सरकार ने 1992 में विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया था। आप सन 1994 से 2003 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष रहे। आप भारतीय योजना आयोग के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।

डॉ॰ कस्तूरीरंगन ने इसरो एवं अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग में भारत सरकार के सचिव के रूप में 9 साल तक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का निर्देशन किया। इससे पहले जब वे इसरो के उपग्रह केंद्र के निदेशक थे, तब उनकी देखरेख में भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह , भारतीय दूरसंवेदी उपग्रह (आईआरएस -1 ए और 1 बी) तथा अन्य कई वैज्ञानिक उपग्रह विकसित किये गए। वह भारत के पहले प्रयोगात्मक पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों, (भास्कर एकम और द्वितीय) के लिए परियोजना निदेशक थे।

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कृत्तुंजय प्रसाद सिन्हा Krityunjai Prasad Sinha

कृत्युंजय प्रसाद सिन्हा (जन्म 5 जुलाई 1929) एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और एक प्रफुल्लता प्रोफेसर भारतीय विज्ञान संस्थान हैं। ठोस राज्य भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान में अपने शोध के लिए जाना जाता है, सिन्हा तीनों प्रमुख भारतीय विज्ञान अकादमियों - भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत के एक निर्वाचित साथी हैं। 1974 में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की सर्वोच्च एजेंसी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया, जो भौतिक विज्ञान में उनके योगदान के लिए सर्वोच्च भारतीय विज्ञान पुरस्कारों में से एक है।

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कैलासवटिवु शिवन् K. Sivan
कैलासवटिवु शिवन् (जन्म : 14 अप्रैल 1957) भारत के एक अन्तरिक्ष वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष हैं। इसके पहले वे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र तथा द्रव प्रणोदन केन्द्र के निदेशक रह चुके हैं। के. शिवन् का जन्म भारत के तमिलनाडु राज्य के कन्याकुमारी जिले में नागरकोइल के पास मेला सरक्कलविलाई में हुआ था। उनके माता-पिता कैलासावदीवुनादार और चेलमल्ल हैं। शिवन् को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए क्रायोजेनिक इंजन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।

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के. आनंदा राउ K. Ananda Rau

के आनंदा राउ (21 सितंबर 1893 - 22 जनवरी 1966) एक प्रख्यात भारतीय गणितज्ञ और रामानुजन के समकालीन थे। हालांकि, रामानुजन के विपरीत, राम, रामानुजन के छह साल के जूनियर थे, लेकिन रामानुजन के विपरीत, वे बहुत पारंपरिक थे और उन्होंने रामानुजन के कौशल का पता चलने से पहले गणित में अपना कैरियर बनाने का फैसला किया था।

आनंद राऊ का जन्म 21 सितंबर 1893 को मद्रास में हुआ था। उन्होंने मद्रास के ट्रिप्लिकेन, और फिर प्रेसीडेंसी कॉलेज ऑफ मद्रास में हिंदू स्कूल में पढ़ाई की। शानदार अकादमिक रिकॉर्ड के बाद, वह रामानुजन के कुछ महीने बाद ही 1914 में इंग्लैंड चले गए। 1916 में, कैम्ब्रिज के किंग्स कॉलेज से अपनी गणितीय परीक्षा समाप्त करने के बाद, वह रामानुजन की तरह, जी। एच। हार्डी के प्रभाव में आए, जिन्होंने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें सक्रिय शोध में आरंभ किया। कैम्ब्रिज में, राऊ और रामानुजन अच्छे दोस्त बन गए। इसके अलावा, रामानुजन के "सबसे समर्पित दोस्त" आर। रामचंद्र राव, जो एक जिला कलेक्टर थे, आनंद राऊ के रिश्तेदार थे। रामचंद्र राव, रामानुजन को शोध में उनकी प्रगति को देखने के लिए जिम्मेदार मानते थे, और वित्तीय सहायता प्रदान करते थे, उनकी दैनिक आवश्यकताओं का ध्यान रखते थे और उन्हें मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में एक क्लर्क की नौकरी मिली। हालाँकि आनंद राऊ इंग्लैंड में पहली बार रामानुजन से मिले थे, लेकिन उन्हें राव के साथ अपने संबंधों के माध्यम से रामानुजन के बारे में पता चला।

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के.एस. आर. कृष्णा राजू K. S. R. Krishna Raju

के.एस. आर. कृष्णा राजू (11 मार्च 1948 - 22 जुलाई 2002) एक भारतीय पक्षी विज्ञानी थे जिन्होंने विशाखापत्तनम के पूर्वी घाट में बड़े पैमाने पर काम किया था। उन्होंने कई एवीफैनल सर्वेक्षण किए, पक्षियों को चकमा दिया और डिलन रिप्ले और सलीम अली सहित अन्य पक्षीविज्ञानियों के साथ सहयोग किया। उनके अध्ययनों ने सुंदर लाल होरा द्वारा प्रस्तावित सतपुड़ा परिकल्पना को वजन प्रदान किया कि पूर्वी घाट भारत के उत्तर-पूर्व और पश्चिमी घाट के बीच दक्षिण पूर्व एशिया में रहने वाले लोगों के लिए आवासों की एक पूर्व निरंतरता का हिस्सा था। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम घाटों के आसपास खोजे गए एबॉट के बब्बलर, मलकोकिंसला एबोट्टी क्रिशनाजुई की एक उप-प्रजाति का नाम उनके सम्मान में नामित किया गया था,पूर्वी घाट के प्राकृतिक संसाधनों के सर्वेक्षण और संरक्षण को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए।

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कुडली नंजुंडा घनपति शंकर K. N. Shankara

कुडली नंजुंडा घनपति शंकर भारत के एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे। वह इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी), अहमदाबाद और इसरो उपग्रह केंद्र (आईएसएसी), बैंगलोर के निदेशक थे। वह उपग्रह संचार कार्यक्रम कार्यालय के निदेशक और कार्यक्रम निदेशक, INSAT थे, और संचार उपग्रह कार्यक्रम की समग्र योजना और दिशा की देखरेख कर रहे थे। ट्रांसपोंडर डिजाइन और विकास के क्षेत्र में उनके काम से भारत की संचार उपग्रह प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिला।

उपग्रह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए, शंकर को 2004 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें वह व्यक्ति कहा जाता है जिसने चंद्रयान के लिए भारत के पहले उद्यम चंद्रयान की अवधारणा की थी।

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कल्पित रामियेर कच्छप ईश्वरन 49

कल्पित रामियेर कच्छप ईश्वरन (जन्म 1939) एक भारतीय आणविक जैव-भौतिकीविद्, अकादमिक और पूर्व एस्ट्रा चेयर प्रोफेसर और भारतीय विज्ञान संस्थान के आणविक जैव-भौतिकी विभाग के अध्यक्ष हैं। वह एंटी-फंगल दवाओं के विकास में और आयनोफोरस और आयन-परिवहन झिल्ली पर अपने शोध के लिए अपने योगदान के लिए जाना जाता है। वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और भारतीय विज्ञान अकादमी के एक चुने हुए साथी हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने, जैव विज्ञान में उनके योगदान के लिए, उन्हें 1984 में सर्वोच्च भारतीय विज्ञान पुरस्कारों में से एक, विज्ञान स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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कमानियो चट्टोपाध्याय Kamanio Chattopadhyay

कमानियो चट्टोपाध्याय (जन्म 1950) एक भारतीय सामग्री इंजीनियर और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में एक मानद प्रोफेसर हैं। वे आईआईएससी के मैकेनिकल साइंसेज डिवीजन के अध्यक्ष और सामग्री इंजीनियरिंग विभाग की पूर्व अध्यक्ष हैं।

चट्टोपाध्याय सबसे अच्छी तरह से विकर्ण नैनोक्वान्टम क्वासिक क्रिस्टल की खोज के लिए जाने जाते हैं, जो उन्होंने 1985 में एल। बेंडस्की और एस। रंगनाथन के साथ पूरा किया था। उन्होंने यह भी quasicrystals और nanocomposites के संश्लेषण और लक्षण वर्णन पर शोध के साथ श्रेय दिया जाता है और सभी तीन प्रमुख भारतीय विज्ञान अकादमियों के एक चुने हुए साथी हैं। भारतीय विज्ञान अकादमी, [Indian] भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी [National] और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत और साथ ही भारतीय राष्ट्रीय अभियांत्रिकी अकादमी।वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की शीर्ष एजेंसी, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, ने उन्हें 1995 में इंजीनियरिंग विज्ञान में उनके योगदान के लिए सर्वोच्च भारतीय विज्ञान पुरस्कारों में से एक, विज्ञान स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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लीलाबती भट्टाचार्जी Lilabati Bhattacharjee

लीलाबती भट्टाचार्जी (नी रे) एक खनिज विज्ञानी, क्रिस्टलोग्राफर और एक भौतिक विज्ञानी थी। उन्होंने वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के साथ अध्ययन किया, और 1951 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के राजाबाजार साइंस कॉलेज परिसर से भौतिकी में एमएससी पूरा किया। श्रीमती भट्टाचार्जी ने संरचनात्मक क्रिस्टलोग्राफी, ऑप्टिकल ट्रांसफ़ॉर्मेशन के तरीकों, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, चरण परिवर्तनों, क्रिस्टल विकास के क्षेत्र में काम किया। स्थलाकृति, और यंत्रीकरण। उन्होंने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में वरिष्ठ खनिज अधिकारी के रूप में कार्य किया, और बाद में इसके निदेशक (खनिज भौतिकी) बने। उनका विवाह शिव ब्रह्मा भट्टाचर्जी से हुआ था और उनके दो बच्चे थे।

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लव कुमार ग्रोवर 50

लव कुमार ग्रोवर (जन्म 1961) एक भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं। वह ग्रोवर डेटाबेस खोज एल्गोरिथ्म के प्रवर्तक क्वांटम कंप्यूटिंग में उपयोग किए गए हैं। ग्रोवर के 1996 के एल्गोरिथ्म को क्वांटम कंप्यूटिंग (शोर के 1994 के एल्गोरिथ्म के बाद), और 2017 में अंततः स्केलेबल फिजिकल क्वांटम सिस्टम में लागू किया गया था। ग्रोवर का एल्गोरिथ्म कई लोकप्रिय विज्ञान लेखों का विषय रहा है। ग्रोवर को भारत के 9 वें सबसे प्रमुख कंप्यूटर वैज्ञानिक के रूप में स्थान दिया गया है।

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लक्ष्मीनारायणपुरम अनंताकृष्णन रामदास 51

लक्ष्मीनारायणपुरम अनंताकृष्णन रामदास (3 जून 1900-1 जनवरी 1979) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और मौसम विज्ञानी थे, जिन्हें रामदास परत की वायुमंडलीय घटना की खोज करने के लिए जाना जाता था या लिफ्ट किया हुआ न्यूनतम तापमान जहां वायुमंडल में सबसे कम तापमान जमीन पर नहीं होता है लेकिन कुछ दसियों में होता है जमीन के ऊपर सेंटीमीटर जिसके परिणामस्वरूप। यह पतली परत के कोहरे में देखा जा सकता है जो जमीन से कुछ ऊंचाई पर हैं। उन्हें भारत में कृषि मौसम विज्ञान का जनक कहा जाता है।

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एम गोविंद कुमार मेनन M. G. K. Menon

डॉ. मांबलीकलाथिल गोविंद कुमार मेनन, एफआरएस (28 अगस्त 1928 - 22 नवंबर 2016), जिन्हें एम. जी. के. मेनन के नाम से भी जाना जाता है, भारत के भौतिकविद् और नीति निर्माता थे। चार दशकों में भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में उनकी प्रमुख भूमिका थी। उनके सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई का पोषण था, जिसे उनके गुरु होमी जे। भाभा ने 1945 में स्थापित किया था।

मैंगलोर में जन्मे, उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता सेसिल एफ पॉवेल के मार्गदर्शन में प्राथमिक कण भौतिकी में पीएचडी के लिए ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में भाग लिया। वह 1955 में TIFR में शामिल हुए। उन्होंने मूलभूत कणों के गुणों का पता लगाने के लिए ब्रह्मांडीय किरणों के साथ प्रयोग किए। वह बैलून उड़ान प्रयोगों को स्थापित करने में सक्रिय रूप से शामिल थे, साथ ही कोलार गोल्ड फील्ड्स में खानों में कॉस्मिक किरण न्युट्रीनो के साथ गहरे भूमिगत प्रयोग थे। वे भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष थे, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के विक्रम साराभाई फैलो, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत के अध्यक्ष, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई के निदेशक (1 966-19 the5) गवर्नर बोर्ड के अध्यक्ष, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद के अध्यक्ष बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स।

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मोती लाल मदान 52

मोती लाल मदान (जन्म 1939) एक भारतीय जैव प्रौद्योगिकी शोधकर्ता, पशुचिकित्सा, अकादमिक और प्रशासक हैं। 1994 से 1995 तक, मदन ने करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) के निदेशक (अनुसंधान) के रूप में कार्य किया और बाद में 1995 से 1999 तक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) रहे। नवंबर 2006 में वे पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा के कुलपति बने। इससे पहले उन्होंने अकोला में डॉ। पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के कुलपति के रूप में कार्य किया। मदन ने कम से कम 188 अकादमिक लेख प्रकाशित किए हैं, जिनमें कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएं भी शामिल हैं।

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मांड्यम ओसुरी पार्थसारथी अयंगर 53

मांड्यम ओसुरी पार्थसारथी अयंगर (15 दिसंबर 1886-10 दिसंबर 1963) एक प्रमुख भारतीय वनस्पतिशास्त्री और फ़ाइकोलॉजिस्ट थे जिन्होंने शैवाल की संरचना, कोशिका विज्ञान, प्रजनन और वर्गीकरण पर शोध किया था। उन्हें "भारतीय फिजियोलॉजी के पिता" या "भारत में एल्गोलॉजी के पिता" के रूप में जाना जाता है। वह भारत के फ़ाइकोलॉजिकल सोसायटी के पहले अध्यक्ष थे। उन्होंने मुख्य रूप से स्पाइरोग्रा का अध्ययन किया।

अयंगर का जन्म मद्रास में हुआ था जहाँ उनके पिता एम.ओ. अलसिंग्राचार्य ने एक वकील के रूप में काम किया। अमीर परिवार कई क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए जाना जाता था। हिंदू हाई स्कूल में पढ़ाई के बाद, वह 1906 में बीए की डिग्री और 1909 में एमए करने के बाद, प्रेसीडेंसी कॉलेज में चले गए। वह तब मद्रास के सरकारी संग्रहालय में क्यूरेटर बन गए और 1911 में शिक्षक कॉलेज में व्याख्याता बन गए। 1920 में प्रेसीडेंसी कॉलेज में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर और शिक्षण से अलग शैवाल पर काम किया। उन्होंने क्वीन मैरी कॉलेज में प्रोफेसर एफई फ्रिट्च के साथ 1930 में यूके में काम किया, जहाँ से उन्हें पीएचडी प्राप्त हुई|

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मदुरा एस. बालाकृष्णन 54

मदुरा एस. बालाकृष्णन (1917-1990) का जन्म और पालन-पोषण चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी थे और उन्होंने विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और कुछ समय के लिए पुणे विश्वविद्यालय में काम किया (वर्तमान में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है)। वह फाइटोलॉजिस्ट प्रोफेसर एम.ओ.पी. आयंगर। मानक लेखक संक्षिप्त नाम M.S.Balakr। एक वनस्पति नाम का हवाला देते हुए इस व्यक्ति को लेखक के रूप में इंगित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

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माधव गाडगिल Madhav Gadgil

माधव धनंजय गाडगिल (जन्म 1942) एक भारतीय पारिस्थितिकीविज्ञानी, अकादमिक, लेखक, स्तंभकार और भारतीय विज्ञान संस्थान के तत्वावधान में एक पारिस्थितिक विज्ञान केंद्र के संस्थापक हैं। वह भारत के प्रधान मंत्री और 2010 के पश्चिमी घाट इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल (WGEEP) के प्रमुख के रूप में वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य हैं, जिसे गडगिल आयोग के रूप में जाना जाता है। वह पर्यावरणीय उपलब्धि के लिए वोल्वो पर्यावरण पुरस्कार और टायलर पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं। भारत सरकार ने उन्हें 1981 में पद्मश्री के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया और इसके बाद 2006 में पद्म भूषण के तीसरे सर्वोच्च पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया।

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अनीता महादेवन-जानसेन Anita Mahadevan-Jansen

अनीता महादेवन-जानसेन बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर हैं और वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में ओरिन एच इनग्राम अध्यक्ष हैं। वह SPIE के 2020 उपाध्यक्ष के रूप में सेवा करने के लिए चुनी गई हैं। अपने चुनाव के साथ, महादेवन-जानसेन SPIE राष्ट्रपति की श्रृंखला में शामिल हो गए और 2021 में राष्ट्रपति-चुनाव और 2022 में सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में काम करेंगी।

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मनमोहन शर्मा Man Mohan Sharma

,मनमोहन शर्मा फ्रिंज (जन्म 1 मई, 1937 को जोधपुर, राजस्थान में) एक भारतीय रसायन इंजीनियर हैं।उनकी शिक्षा जोधपुर, मुंबई और कैम्ब्रिज में हुई थी। 27 साल की उम्र में, उन्हें इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर नियुक्त किया गया। बाद में वह UDCT के निदेशक बन गए, UDCT से ऐसा करने वाले पहले केमिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर थे।

1990 में, वह रॉयल सोसाइटी, यूके के फैलो के रूप में चुने जाने वाले पहले भारतीय इंजीनियर बन गए। उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण (1987) और पद्म विभूषण (2001) से सम्मानित किया गया था। उन्हें रॉयल सोसाइटी के लीवरहल्मे मेडल, इंजीनियरिंग विज्ञान में S.S भटनागर पुरस्कार (1973), फिक्की अवार्ड (1981), भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1985) के विश्वकर्मा पदक, जी.एम. मोदी अवार्ड (1991), मेघनाद साहा मेडल (1994), और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (2001) से विज्ञान की मानद उपाधि प्राप्त की।

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मनचनाहल्ली रंगास्वामी सत्यनारायण राव M. R. S. Rao


मनचनाहल्ली रंगास्वामी सत्यनारायण राव को संक्षिप्त नाम एम। आर.एस. राव द्वारा जाना जाता है, जो एक भारतीय वैज्ञानिक हैं, जिनका जन्म 21 जनवरी 1948 को मैसूर, भारत में हुआ था। उन्हें भारत सरकार द्वारा विज्ञान और इंजीनियरिंग श्रेणी (वर्ष 2010) में चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। वे जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बैंगलोर, भारत के अध्यक्ष थे (2003-2013)|

राव ने 1966 में स्नातक की डिग्री (बीएससी) और 1968 में बैंगलोर विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री (एमएससी) प्राप्त की। उन्होंने 1973 में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर से जैव रसायन विज्ञान में पीएचडी प्राप्त की। गोविंदराजन पद्मनाभन (पूर्व निदेशक, IISc) जैव रसायन विभाग में उनके डॉक्टर सलाहकार थे। उन्होंने अपना पोस्टडॉक्टरल रिसर्च बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन, ह्यूस्टन, टेक्सास, अमेरिका में (1974-76) में किया था और उसी संस्थान में सहायक प्रोफेसर थे। उन्होंने भारत वापस आने का फैसला किया और जैव रसायन विभाग, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में शामिल हो गए।

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मणि लाल भौमिक Moni Lal Bhoumik

मणि लाल भौमिक एक भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक विज्ञानी और एक सर्वश्रेष्ठ लेखक हैं। भौमिक का जन्म 30 मार्च, 1931 को तमलुक, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल, भारत के एक छोटे से गाँव में हुआ था और उन्होंने कोला यूनियन हाई स्कूल में पढ़ाई की थी।किशोरी के रूप में, भौमिक ने अपने महासीदल शिविर में महात्मा गांधी के साथ कुछ समय बिताया। उन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से बैचलर ऑफ़ साइंस की डिग्री और एम। एससी। कलकत्ता विश्वविद्यालय के राजाबाजार साइंस कॉलेज परिसर से। उन्होंने सत्येंद्र नाथ बोस (बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी के निर्माता) का ध्यान आकर्षित किया जिन्होंने उनकी विलक्षण जिज्ञासा को प्रोत्साहित किया। भौमिक पीएचडी प्राप्त करने वाले पहले छात्र बने। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से डिग्री प्राप्त की जब उन्होंने पीएच.डी. 1958 में क्वांटम भौतिकी में। उनकी थीसिस रेजोनेंट इलेक्ट्रॉनिक एनर्जी ट्रांसफ़र पर थी, एक ऐसा विषय जिसके कारण वे अपने काम में लेज़रों के साथ उपयोग करते थे।

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मणीन्द्र अग्रवाल Manindra Agrawal
मणीन्द्र अग्रवाल (जन्म: 20 मई 1966, इलाहाबाद) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के संगणक विज्ञान एवं अभियान्त्रिकी विभाग में प्रोफेसर है। संगणक विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सन् 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री प्रदान किया।

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मंजुला रेड्डी Manjula Reddy

मंजुला रेड्डी (जन्म 1965) एक भारतीय जीवाणु आनुवंशिकीविद् है। वह हैदराबाद, भारत में सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान केंद्र में मुख्य वैज्ञानिक हैं। 2019 में, उसने बैक्टीरिया सेल दीवार संरचना और संश्लेषण पर अपने काम के लिए लाइफ साइंसेज में इन्फोसिस पुरस्कार जीता। वह तेलंगाना अकादमी ऑफ साइंसेज और भारतीय विज्ञान अकादमी की फेलो हैं।

मंजुला रेड्डी ने 2002 में सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 2007 में संस्था में अपनी प्रयोगशाला शुरू की|

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माथुकुमल्ली विद्यासागर Mathukumalli Vidyasagar

माथुकुमल्ली विद्यासागर FRS (जन्म 29 सितंबर 1947) एक प्रमुख नियंत्रण सिद्धांतकार और रॉयल सोसाइटी के फैलो हैं। वह वर्तमान में IIT हैदराबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं। पहले वह डलास में टेक्सास विश्वविद्यालय में सिस्टम बायोलॉजी साइंस के सेसिल और इडा ग्रीन (II) चेयर थे। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कार्यकारी उपाध्यक्ष थे, जहां उन्होंने एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर का नेतृत्व किया। इससे पहले, वह बैंगलोर में डीआरडीओ की रक्षा प्रयोगशाला, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (सीएआईआर) के निदेशक थे। वह प्रख्यात गणितज्ञ एम वी सुब्बाराव के पुत्र हैं।

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माइकल लोबो Michael Lobo

माइकल लोबो (जन्म 12 सितंबर 1953) एक भारतीय वैज्ञानिक, लेखक और वंशावली विज्ञानी हैं।वे मैंगलोर, भारत में कैथोलिक समुदाय पर तीन स्व-प्रकाशित पुस्तकों के लेखक हैं।

माइकल लोबो का जन्म मैंगलोर, भारत में मैसी लोबो (नी फर्नांडिस) और कैमेलो लोबो, दोनों का जन्म मंगलोरियन कैथोलिक वंश में हुआ था। वह लोबो-प्रभु कबीले की बेजाई शाखा से संबंधित है, जिसकी जड़ें मंगलौर के कुलशेखर उपनगर में हैं। लोबो के पिता एक ब्रिटिश सेना के सिपाही थे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सेवा की थी। उन्होंने तमिलनाडु के यरकौड के मोंटफोर्ट हाई स्कूल में अध्ययन किया और सेंट अलॉयसियस कॉलेज से स्नातक किया। 1975 में, वह देश के "राष्ट्रीय-ए" स्तर के शतरंज खिलाड़ियों में से एक थे, जिसने उन्हें भारत के शीर्ष शतरंज खिलाड़ियों में शामिल किया। 1982 में, उन्होंने एप्लाइड गणित में डिग्री के साथ IISc बैंगलोर से पीएचडी प्राप्त की। ट्रांसोनिक एयरोडायनामिक्स पर उनकी डॉक्टरेट थीसिस ने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) से "युवा वैज्ञानिक पुरस्कार" अर्जित किया। 1982 में, उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से एयरोडायनामिक्स गणित में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, और इंडियन नेशनल साइंस अकादमी से 1983 का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त किया।

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मिर्ज़ा फैजान Mirza Faizan

मिर्ज़ा फैजान एक भारतीय एयरोस्पेस वैज्ञानिक हैं जिन्होंने ग्राउंड रियलिटी इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (GRIPS) विकसित किया है। फैज़ान ने सेंट करेन स्कूल, पटना में भाग लिया, और पटना विश्वविद्यालय से स्नातक किया, इसके बाद मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर एप्लीकेशन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर में एम्बेडेड सिस्टम में काम किया।

इसके बाद उन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, सत्यम कम्प्यूटर्स, हनीवेल, एयरबस-फ्रांस और अमेरिका में एयरोस्पेस परियोजनाओं पर काम किया। फैजान अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स के सदस्य हैं। वह फिलहाल अमेरिका के टेक्सास में रहते हैं।

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मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या M. Visvesvaraya
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या (15 सितम्बर 1860 - 14 अप्रैल 1962) भारत के महान अभियन्ता एवं राजनयिक थे। उन्हें सन 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया था। भारत में उनका जन्मदिन अभियन्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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मनोज कुमार जायसवाल Manoj Kumar Jaiswal

मनोज कुमार जायसवाल एक भारतीय तंत्रिका विज्ञानी हैं। वे माउंट सिनाई में इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन में मनोचिकित्सा विभाग में पूर्णकालिक संकाय (इंस्ट्रक्टर) हैं। जायसवाल का जन्म वाराणसी या काशी, जिसे भारत में एक प्रमुख धार्मिक केंद्र और सात पवित्र शहरों (सप्त पुरी) के रूप में भी जाना जाता है के रूप में जाना जाता है। हिंदू धर्म और जैन धर्म में। वह कम उम्र में जीव विज्ञान में रुचि रखने लगे और स्नातक छात्र के रूप में क्षेत्र में शोध करना शुरू कर दिया।

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एम. अन्नादुरै Mylswamy Annadurai
एम॰ अन्नादुरै ( मून मैन ऑफ़ इंडिया ) एक भारतीय वैज्ञानिक और इसरो उपग्रह केंद्र, बैंगलुरू में निदेशक हैं। इससे पूर्व वे भारतीय दूर संवेदी उपग्रह (आई.आर. एस.) और छोटे उपग्रह प्रणाली (एस.एस.एस.) केंद्र के कार्यक्रम निदेशक के रूप में कार्यरत थे। उन्होने वर्ष 1982 में इन्होंने इसरो के साफ्टवेयर सैटेलाइट सिम्यूलेटर के डिजाइन और विकास दल के नेता के रूप में ISAC से अपने कॅरियर की शुरुआत की थी और वर्ष 2004 एवं 2008 में उन्होने चन्द्रयान-1 एवं चन्द्रयान-2 के परियोजना निदेशक के रूप में कार्य किया। उन्हें विभिन्न प्रकार से अंतरिक्ष एवं उपग्रह विज्ञान में योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। जिनमें नेशनल एयरोनाटिकल पुरस्कार 2008 एवं विवेकानंद मानव उत्कृष्टता पुरस्कार 2014 प्रमुख हैं।

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मदन राव Madan Rao

मदन राव (जन्म 11 जुलाई 1960) एक भारतीय गाढ़ा पदार्थ और जैविक भौतिक विज्ञानी और नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज में एक वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। सेल की सतह पर आणविक गतिशीलता पर अपने शोध के लिए जाना जाता है, राव भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के एक निर्वाचित साथी हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारत सरकार की सर्वोच्च एजेंसी, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, ने उन्हें 2004 में भौतिक विज्ञान में उनके योगदान के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया।

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मुडुंबई शेषचालु नरसिंहन M. S. Narasimhan

मुदुम्बई शेषचलू नरसिम्हन FRS (जन्म 7 जून 1932) एक भारतीय गणितज्ञ हैं। सी। एस। शेषाद्री के साथ, नरसिम्हन-शेषाद्री प्रमेय के प्रमाण के लिए उन्हें जाना जाता है, और दोनों को रॉयल सोसाइटी के अध्येता के रूप में चुना गया। वह विज्ञान के क्षेत्र में किंग फैसल अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले एकमात्र भारतीय रहे हैं।

नरसिम्हन ने अपनी स्नातक की पढ़ाई लोयोला कॉलेज, चेन्नई से की, जहाँ उन्हें फ्र आराइन ने पढ़ाया था। Fr Racine ने प्रसिद्ध फ्रांसीसी गणितज्ञ anlie Cartan और Jacques Hadamard के साथ अध्ययन किया था और अपने छात्रों को आधुनिक गणित में नवीनतम घटनाओं से जोड़ा था।

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एम.एस. रघुनाथ M. S. Raghunathan

मदाबुसी संतनम "एम.एस." रघुनाथन एक भारतीय गणितज्ञ हैं। वह वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर मैथमेटिक्स के हेड हैं। होमी भाभा चेयर में TIFR में प्रख्यात के पूर्व प्रोफेसर। रघुनाथन ने गणित (TIFR), मुंबई विश्वविद्यालय से गणित में पीएचडी प्राप्त की; उनके सलाहकार एम। एस। नरसिम्हन थे। रघुनाथन रॉयल सोसाइटी के फेलो हैं, थर्ड वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज के, और अमेरिकन मैथमैटिकल सोसाइटी के और पद्म भूषण के नागरिक सम्मान के प्राप्तकर्ता हैं।

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मनीषा एस. इनामदार Maneesha S. Inamdar

मनीषा एस. इनामदार (जन्म 25 फरवरी 1967) एक भारतीय विकासात्मक जीवविज्ञानी हैं जो स्टेम सेल अनुसंधान में विशेषज्ञता रखते हैं। वह एक प्रोफेसर और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) की आणविक जीवविज्ञान और आनुवंशिकी इकाई में अध्यक्ष हैं। वह स्टेम सेल बायोलॉजी एंड रिजेनेरेटिव मेडिसिन (इनस्टेम) संस्थान में एक सहायक संकाय के रूप में थी और भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की एक चुनी हुई साथी है।

25 फरवरी 1967 को जन्मीं मनीषा इनामदार ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में आणविक जीव विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और चैपल हिल के उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय में हृदय जीव विज्ञान में पोस्ट-डॉक्टोरल काम पूरा किया। इसके बाद, वह जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) में शामिल हो गईं, जहाँ उन्होंने संस्था की आणविक जीवविज्ञान और आनुवंशिकी इकाई के एक प्रोफेसर का पद संभाला।

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नागेंद्र कुमार सिंह Nagendra Kumar Singh

नागेंद्र कुमार सिंह एक भारतीय कृषि वैज्ञानिक हैं। वह राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में आईसीएआर के तहत एक राष्ट्रीय प्रोफेसर (डॉ। बी.पी. पाल अध्यक्ष) हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के राजापुर नामक एक छोटे से गाँव में हुआ था। उन्हें संयंत्र जीनोमिक्स और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने शोध के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से चावल, टमाटर और कबूतर जीनोम के डिकोडिंग में उनके योगदान और गेहूं के बीज भंडारण प्रोटीन की समझ और गेहूं की गुणवत्ता पर उनके प्रभाव के लिए। उन्होंने चावल और गेहूं के जीनोम के तुलनात्मक विश्लेषण और चावल में नमक सहिष्णुता और बासमती गुणवत्ता के गुणों के लिए जीनों की मैपिंग में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

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नंबी नारायणन Nambi Narayanan
नंबी नारायणन एक भारतीय वैज्ञानिक और एयरोस्पेस इंजीनियर है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में, वह क्रायोजेनिक डिवीजन के प्रभारी थे। 1994 में, उन्हें झूठा आरोप लगाया गया और गिरफ्तार कर लिया गया। 1996 में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके खिलाफ आरोप खारिज कर दिए थे, और भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1998 में दोषी नहीं घोषित कर दिया था। 2018 में, दीपक मिश्रा की पीठ के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने नारायणन को आठ सप्ताह के भीतर केरल सरकार से वसूलने के लिए ₹ 50 लाख का मुआवजा दिया, और सर्वोच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीके जैन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। नारायणन की गिरफ्तारी में केरल पुलिस के अधिकारियों की भूमिका में पूछताछ करें।

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नंदिनी हरीनाथ 57
नंदिनी हरीनाथ 2020 में शुरू करने के लिए तैयार किये जा रहे एक संयुक्त नासा-इसरो उपग्रह - निसार के इसरो द्वारा मिशन प्रणाली की सिस्टम आगू हैं। कई दशकों पहले टीवी की दुनिया के प्रसिद्ध अमेरिकी विज्ञान कथा मनोरंजन कार्यक्रम, स्टार ट्रेक, उनके लिए, विज्ञान का पहला प्रदर्शन था। इसरो की नौकरी उनकी पहली नौकरी थी और यहाँ काम करते हुए उन्हें बीस साल हो चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 14 परियोजनाओं पर काम किया।इसरो के मंगलयान परियोजनाओं में इन्हों ने मार्स ऑर्बिटर मिशन पर मिशन डिज़ाइन की परियोजना प्रबंधक और उप-ऑपेरशन संचालक के रूप में काम किया। भारत के सफल मंगल अभियान से पहले मंगल ग्रह के लिए किये जाने वाले मिशन में सफलता की दर केवल 40% ही थी और भारत इसे पहली बार में और वह भी बहुत कम लागत और बहुत कम समय में पूरा करने वाला पहला देश है।

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नरेश दाधीच 58

नरेश दाधीच (जन्म 1 सितंबर, 1944) एक सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं, जो पूर्व में इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) में थे। वे 31 अगस्त, 2009 तक IUCAA के निदेशक भी थे। वर्तमान में वे सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स, जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली में सैद्धांतिक भौतिकी में M.A. अंसारी की अध्यक्ष हैं।

वे जुलाई 2003 में IUCAA के निदेशक बने। वह वर्तमान में डरबन, दक्षिण अफ्रीका में यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाज़ुलु-नटाल के विजिटिंग फैकल्टी हैं और पोर्ट्समाउथ, यूके और बिलबाओ, स्पेन में गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान समूहों के साथ भी काम करते हैं।

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नित्या आनंद 59

नित्या आनंद (जन्म 1 जनवरी 1925 को लैलापुर, ब्रिटिश भारत में) एक वैज्ञानिक हैं जो कई वर्षों तक लखनऊ में केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के निदेशक थे। 2005 में, भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने उन्हें अपनी वैज्ञानिक समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। 2012 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

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नरसिम्हेंगर मुकुंद 60

नरसिम्हेंगर मुकुंद (जन्म 25 जनवरी 1939, नई दिल्ली, भारत) एक भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं।

मुकुंद की उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय में शुरू हुई जहाँ उन्हें B.Sc. (माननीय) की डिग्री 1953 में। उनके लिए पीएच.डी. उन्होंने रोचेस्टर विश्वविद्यालय में ई। सी। जी। सुदर्शन के साथ अध्ययन किया और 1964 में स्नातक किया। मुकुंद की थीसिस हैमिल्टनियन यांत्रिकी, समरूपता समूहों और प्राथमिक कणों के साथ निपटा। उन्होंने वेलेंटाइन बारगमन के साथ प्रिंसटन विश्वविद्यालय में समूह सिद्धांत का अध्ययन भी किया, जिसमें सामयिक समूह और लाई सिद्धांत शामिल हैं।

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निलाम्बर पंत 61

निलाम्बर पंत एक भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक, भारतीय अंतरिक्ष आयोग के पूर्व सदस्य और भारत में उपग्रह आधारित