18 प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक एवं गणितज्ञ - 18 Scientists and Mathematicians Of Ancient India

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भारतीय विज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक परंपराओं में एक है। भारत में विज्ञान का उदय आज से लगभग पांच हज़ार वर्ष पूर्व हुआ है। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त सिंधु घाटी के प्रमाणों से वहाँ के लोगों की वैज्ञानिक दृष्टि तथा वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोगों का पता चलता है। प्राचीन काल में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में, खगोल विज्ञान व गणित के क्षेत्र में की गयी खोजों का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान है। इनकी खोजों का प्रयोग आज भी किसी-न-किसी रूप में हो रहा है।

आज की नवीन खोजें और सिद्धांत भारतीयों ने सैकड़ों वर्ष पहले ही प्रतिपादित कर दिए थे | भारत में वैज्ञानिक अनुसंधानों और अविष्कारों की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। जिस समय यूरोप में घुमक्कड़ जनजातियाँ बस रही थीं उस समय सिंधु घाटी के लोग सुनियोजित नगर बसाकर रहते थे। मोहन जोदड़ो, हड़प्पा, काली बंगा, लोथल, चंहुदड़ों बनवाली, सुरकोटड़ा आदि स्थानों पर हुई खुदाई में मिले नगरों के खंडहर इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

गणित और ज्यामिति का वैदिक युग में पर्याप्त विकास हुआ था। वैदिककालीन भारतीय तक गणना कर सकते थे। वैदिक काल के लोग खगोल विज्ञान का अच्छा ज्ञान रखते थे। वैदिक भारतीयों को 27नक्षत्रों का ज्ञान था। वे वर्ष, महीनों और दिनों के रूप में समय के विभाजन से परिचित थे। ‘लगध’ नाम के ऋषि ने ‘ज्योतिष वेदांग’ में तत्कालीन खगोलीय ज्ञान को व्यवस्थित कर दिया था। वैदिक युग की विशिष्ट उपलब्धि चिकित्सा के क्षेत्र में थी। शरीर के सूक्ष्म अध्ययन के लिए वे पोस्ट मार्टम भी करते थे। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और उनके औषधीय गुणों के बारे में लोगों को बखूबी ज्ञान था। प्राचीन चिकित्सक स्नायुतंत्र और सुषुम्ना (रीढ़ की हड्डी) के महत्त्व से भली-भाँति परिचित थे। मौसम-परिवर्तन, शरीर में सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति तथा रोग पैदा करने वाले आनुवांशिक कारकों आदि के सिद्धांतों का ज्ञान था |

उस समय बीज गणित, ज्यामिति, रसायन शास्त्र, भौतिकी, धातुशिल्प, चिकित्सा, खगोल विज्ञान का विकास चरम सीमा पर था | भारत के ऋषि-मुनि तथा आचार्य ही उस समय के वैज्ञानिक थे | तो आइये आज जानते हैं ऐसे ही कुछ महान व्यक्तित्वों के बारे में –

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आर्यभट्ट - Aryabhata

आर्यभट (४७६-५५०) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इसी ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्मस्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 लिखा है। बिहार में वर्तमान पटना का प्राचीन नाम कुसुमपुर था लेकिन आर्यभट का कुसुमपुर दक्षिण में था, ... अधिक पढ़ें


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चरक - Charak

चरक एक महर्षि एवं आयुर्वेद विशारद के रूप में विख्यात हैं। वे कुषाण राज्य के राजवैद्य थे। इनके द्वारा रचित चरक संहिता एक प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रन्थ है। इसमें रोगनाशक एवं रोगनिरोधक दवाओं का उल्लेख है तथा सोना, चाँदी, लोहा, पारा आदि धातुओं के भस्म एवं उनके उपयोग का वर्णन मिलता है। आचार्य चरक ने आचार्य ... अधिक पढ़ें


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सुश्रुत - Sushruta

सुश्रुत प्राचीन भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। उनको शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है। शल्य चिकित्सा (Surgery) के पितामह और ‘सुश्रुत संहिता’ के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व में काशी में हुआ था। इन्होंने धन्वन्तरि से शिक्षा प्राप्त की। सुश्रुत संहिता को भारतीय चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान ... अधिक पढ़ें


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श्रीधराचार्य (श्रीधर आचार्य) - Sridhara Acharya

श्रीधराचार्य (जन्म : ७५० ई) प्राचीन भारत के एक महान गणितज्ञ थे। इन्होंने शून्य की व्याख्या की तथा द्विघात समीकरण को हल करने सम्बन्धी सूत्र का प्रतिपादन किया। उनके बारे में हमारी जानकारी बहुत ही अल्प है। उनके समय और स्थान के बारे में निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। किन्तु ... अधिक पढ़ें


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पिंगल - Pingal

पिंगल भारत के प्राचीन गणितज्ञ और छन्दःसूत्रम् के रचयिता। इनका काल ४०० ईपू से २०० ईपू अनुमानित है। जनश्रुति के अनुसार यह पाणिनि के अनुज थे। छन्द:सूत्र में मेरु प्रस्तार (पास्कल त्रिभुज), द्विआधारी संख्या (binary numbers) और द्विपद प्रमेय (binomial theorem) मिलते हैं। छन्दःसूत्रम् पिंगल द्वारा रचित छन्द का मूल ग्रन्थ है और इस समय ... अधिक पढ़ें


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नागार्जुन (रसायनशास्त्री) - Nagarjuna (metallurgist)

नागार्जुन भारत के धातुकर्मी एवं रसशास्त्री (alchemist) थे। ११वीं शताब्दी में अल बरुनी के द्वारा लिखे दस्तावेजों के अनुसार वे १०० वर्ष पहले गुजरात के निकट दैहक नामक ग्राम में जन्मे थे। अर्थात उनका जन्म १०वीं शताब्दी के आरम्भ में हुआ था। जबकि चीनी और तिब्बती साहित्य के अनुसार वे ‘वैदेह देश’ (विदर्भ) में जन्मे ... अधिक पढ़ें


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वराहमिहिर - Varahamihira

वराहमिहिर (वरःमिहिर) ईसा की पाँचवीं-छठी शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ थे। वाराहमिहिर ने ही अपने पंचसिद्धान्तिका में सबसे पहले बताया कि अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर है। कापित्थक (उज्जैन) में उनके द्वारा विकसित गणितीय विज्ञान का गुरुकुल सात सौ वर्षों तक अद्वितीय रहा। वरःमिहिर बचपन से ही अत्यन्त मेधावी और तेजस्वी थे। ... अधिक पढ़ें


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शालिहोत्र - Shalihotra

शालिहोत्र (2350 ईसापूर्व) हयगोष नामक ऋषि के पुत्र थे। वे पशुचिकित्सा (veterinary sciences) के जनक माने जाते हैं। उन्होंंने ‘शालिहोत्रसंहिता’ नामक ग्रन्थ की रचना की। वे श्रावस्ती के निवासी थे। संसार के इतिहास में घोड़े पर लिखी गई प्रथम पुस्तक शालिहोत्रसंहिता है, जिसे शालिहोत्र ऋषि ने महाभारत काल से भी बहुत समय पूर्व लिखा था। ... अधिक पढ़ें


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बौधायन - Baudhayana

बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र तथा श्रौतसूत्र के रचयिता थे। ज्यामिति के विषय में प्रमाणिक मानते हुए सारे विश्व में यूक्लिड की ही ज्यामिति पढ़ाई जाती है। मगर यह स्मरण रखना चाहिए कि महान यूनानी ज्यामितिशास्त्री यूक्लिड से पूर्व ही भारत में कई रेखागणितज्ञ ज्यामिति के महत्वपूर्ण नियमों की खोज कर चुके ... अधिक पढ़ें


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लगध - Lagadha

लगध ऋषि वैदिक ज्योतिषशास्त्र की पुस्तक वेदांग ज्योतिष के प्रणेता है। इनका काल १३५० ई पू माना जाता है। इस ग्रन्थ का उपयोग करके वैदिक यज्ञों के अनुष्ठान का समय निश्चित किया जाता था। इसे भारत में गणितीय खगोलशास्त्र पर आद्य कार्य माना जाता है। लगध ऋषि का एक प्रमुख नवोन्मेष तिथि (महीने का १/३०) ... अधिक पढ़ें


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ब्रह्मगुप्त - Brahmagupta

ब्रह्मगुप्त (५९८-६६८) प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ थे। वे तत्कालीन गुर्जर प्रदेश (भीनमाल) के अन्तर्गत आने वाले प्रख्यात शहर उज्जैन (वर्तमान मध्य प्रदेश) की अन्तरिक्ष प्रयोगशाला के प्रमुख थे और इस दौरान उन्होने दो विशेष ग्रन्थ लिखे: ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (सन ६२८ में) और खण्डखाद्यक या खण्डखाद्यपद्धति (सन् ६६५ ई में)। ये अच्छे वेधकर्ता थे और इन्होंने वेधों के ... अधिक पढ़ें


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कणाद - Kanada

आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले महर्षि कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं। उनके अनासक्त जीवन के बारे में यह रोचक मान्यता भी है कि किसी काम से बाहर जाते तो घर लौटते वक्त रास्तों में पड़ी चीजों या अन्न के कणों को ... अधिक पढ़ें


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नागार्जुन (दार्शनिक) - Nagarjuna

नागार्जुन (बौद्धदर्शन) शून्यवाद के प्रतिष्ठापक तथा माध्यमिक मत के पुरस्कारक प्रख्यात बौद्ध आचार्य थे। कहा जाता है कि सापेक्षिकता का सिद्धांत इन्होंने उसी समय दे दिया था | युवान् च्वाङू के यात्राविवरण से पता चलता है कि ये महाकौशल के अंतर्गत विदर्भ देश (आधुनिक बरार) में उत्पन्न हुए थे। आंध्रभृत्य कुल के किसी शालिवाहन नरेश ... अधिक पढ़ें


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भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय) - Bhaskaracharya

भास्कराचार्य प्रथम गणितज्ञ थे जिन्होनें पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था कि कोई संख्या जब शून्य से विभक्त की जाती है तो अनंत हो जाती है। किसी संख्या और अनंत का जोड़ भी अंनत होता है। भास्कराचार्य या भास्कर द्वितीय (1114 – 1185) प्राचीन भारत के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं ज्योतिषी थे। इनके द्वारा रचित ... अधिक पढ़ें


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माधवकर - Madhavkar

माधवनिदानम् आयुर्वेद का प्रसिद्ध प्राचीन ग्रन्थ है। इसका मूल नाम ‘रोगविनिश्चय’ है। यह माधवकर द्वारा प्रणीत है जो आचार्य इन्दुकर के पुत्र थे और ७वीं शताब्दी में पैदा हुए थे। माधव ने वाग्भट के वचनों का उल्लेख किया है। विद्धानों ने माधवकर को बंगाली होना प्रतिपादित किया है। एक ही ग्रन्थ द्वारा तत्कालीन समस्त रोगों ... अधिक पढ़ें


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भास्कर प्रथम - Bhaskar

भास्कर प्रथम का जन्म एक निषाद परिवार में लगभग 600 ईस्वी के आसपास में में हुआ(600 ई – 680 ईसवी) भास्कर प्रथम भारत भारत के सातवीं शताब्दी के गणितज्ञ थे। संभवतः उन्होने ही सबसे पहले संख्याओं को हिन्दू दाशमिक पद्धति में लिखना आरम्भ किया। उन्होने आर्यभट्ट की कृतियों पर टीका लिखी और उसी सन्दर्भ में ... अधिक पढ़ें


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वाग्भट्ट - Vagbhata

आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टांगसंग्रह तथा अष्टांगहृदय के रचयिता। प्राचीन संहित्यकारों में यही व्यक्ति है, जिसने अपना परिचय स्पष्ट रूप में दिया है। अष्टांगसंग्रह के अनुसार इनका जन्म सिंधु देश में हुआ। इनके पितामह का नाम भी वाग्भट था। ये अवलोकितेश्वर गुरु के शिष्य थे। इनके पिता का नाम सिद्धगुप्त था। यह बौद्ध धर्म को ... अधिक पढ़ें


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धन्वन्तरि - Dhanvantari

धन्वन्तरि की रसचिकित्सा के अनुसार धातुओं में रोग निवारण की शक्ति विद्यमान है | धन्वन्तरि को हिन्दू धर्म में क्षत्रिय नाई कुकुल के वंंशज माने जाते है। वे महान चिकित्सक थे जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं। इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र ... अधिक पढ़ें


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