10वीं शताब्दी के बाद जब मुग़ल भारत में आकर बसने लगे तो उन्होंने अपने धर्म को आगे बढ़ाने तथा अपने धार्मिक अनुष्ठानों को पूर्ण करने के लिए विभिन्न स्थलों का चुनाव कर वहां पर मस्जिदें बनवाई | उसी कारन से आज के समय भारत में इतनी बड़ी और शानदार मस्जिदें उपलब्ध हैं कि ईद , रमजान और अन्य मुस्लिम त्योहारों पर नमाज़ अदा करने वाले लोगों का हुजूम उमड़ जाता है | तो आइये बात करते हैं भारत में उपस्थित सबसे मशहूर मस्जिदों की आज की इस लिस्ट में –

  1. पुरानी दिल्‍ली में स्थित जामा मस्जिद दुनिया की सबसे बड़ी और संभवतया सबसे अधिक भव्य मस्जिद है। इसे मस्जिद-ए-जहाँ-नुमा भी कहते हैं और इसमें एक साथ एक समय में 25000 लोग प्रार्थना कर सकते हैं। लाल और संगमरमर के पत्थरों से बनी इस मस्जिद का निर्माण सन् 1656 में सम्राट शाहजहां ने किया था। इस मस्जिद में उत्तर और दक्षिण द्वारों से प्रवेश किया जा सकता है लेकिन पूर्वी द्वार केवल शुक्रवार को ही खुलता है। इसके बार में कहा जाता है कि सुल्तान इसी द्वार का प्रयोग करते थे। इसका प्रार्थना गृह बहुत ही सुंदर है। इसके विशाल आंगन में हजारों लोग एक साथ आकर प्रार्थना करते हैं।

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  2. मायानगरी मुंबई में वर्ली तट के निकट स्थित हाजी अली दरगाह सय्यद पीर हाजी अली शाह बुखारी की स्मृति में बनाई गयी एक मशहूर मस्जिद एवं दरगाह है। यह दरगाह मुस्लिम एवं हिन्दू दोनों समुदायों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इस दरगाह की सबसे खास बात यह है कि अरब सागर की तेज लहरें जब समुद्र के बाहर तक आ जाती हैं, तब दरगाह तक पहुंचने का मार्ग तो पानी में डूब जाता है लेकिन दरगाह के भीतर पानी की एक बूंद भी प्रवेश नहीं कर पाती। इस मजार का नजारा बेहद दिलकश है। पानी की लहरों में बीच सफेद रंग से उज्जवल हाजी अली की दरगाह बेहद दर्शनीय लगती है। यह मुंबई का महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भी है।

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  3. अहमदाबाद में स्थित शाह-ए-आलम मस्जिद एक मध्ययुगीन मस्जिद और कब्र परिसर है। इसको रसुलबाबाद दरगाह या शाह आलम कोई रोजोज के नाम से भी जाना जाता है। इस मस्जिद को हज़रत हुसैनी बुखारी के महान पोते और सैयद बुरहानुद्दीन कुतुब-उल-आलम के पुत्र शाह ई आलम की याद में बनवाया गया है। आज भी ये मस्जिद अहमदाबाद के सबसे प्रतिष्ठित मुस्लिम धार्मिक स्थानों में से एक है।

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  4. दिल्ली के लाल किले में स्थित मोती मस्जिद मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा बनवाई गई मस्जिद है। इस मस्‍जिद का नमाज अदा करने का हॉल काले संगमरमर में मुशल्लों (नमाज पढ़ने के लिए छोटी चटाइयां) के रेखाचित्र से जटित है और यह प्रागंण की तुलना में उच्च स्तर पर स्थित है। हॉल तीन बल्बनुमा गुम्बदों से घिरा हुआ है जो मूलत: ताम्र फलकों से युक्त था। यह ग्रीवा स्तर पर संकुचित हुआ प्रतीत होता है। पूर्वी द्वार में ताम्र फलक लगे हैं। इस मस्जिद का इस्तेमाल आमतौर पर स्त्रियों द्वारा भी किया जाता था।

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  5. पंजाब के कपूरथला में स्थित मूरिश मस्जिद पंजाब के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थानों में से एक है, जिसका निर्माण फ़्राँसीसी वास्‍तुकार मोनेयर एम मेंटिक्‍स ने किया था। इस मस्जिद को मोरक्को के ग्रैंड मस्जिद की तर्ज पर नमूनों की जाती है। यह मस्जिद धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है और पंजाब के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। परिसर के चारों ओर शुद्ध भारतीय संगमरमर की दीवारें इस मस्जिद की भव्यता को एक शाही स्पर्श प्रदान करती हैं। यह संरचना निश्चित तौर पर उन यात्रियों का ध्यान आकर्षित करती है, जो इतिहास और कला में रुचि रखते हैं। इसको पंजाब के मिनी पेरिस के नाम से भी जाना जाता है और मस्जिद को दक्षिण-पूर्व एशिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता है। यह मस्जिद राष्ट्रीय स्मारक है, जिसकी देखरेख 'भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग' करता है।

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  6. भारत के हैदराबाद में स्थित मक्का मस्जिद भारत का सबसे पुराना, ऐतिहासिक और सबसे बड़ा मस्जिद है। इस मस्जिद के निर्माण की शुरुआत 1617 में मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने की थी लेकिन इसको पूरा औरंगज़ेब ने 1684 में किया था। मुस्लिमों के बीच इसका विशेष धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी है और यह राज्य सरकार द्वारा संरक्षित एक धरोहर स्थल भी है। चूंकि मक्का मस्जिद चारमीनार और चौमहला महल जैसी ऐतिहासिक इमारत के पास है, इससे एक पर्यटन स्थल के रूप में इन्होंने काफी चर्चा हासिल की है। मक्का मस्जिद लगभग 300 फीट एकड़ में बनी हुई है इसलिए इसमें एक साथ 10 हज़ार लोग इस मस्जिद में नमाज़ अदा कर सकते हैं। मक्का मस्जिद प्राचीन और अरबी वास्तु शिल्प के संगम के चलते पर्यटकों को आकर्षित करती है।

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  7. मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित ताज-उल-मस्जिद भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। वैसे तो दिल्ली की जमा मस्जिद को भारत की सबसे बड़ी मस्जिद बताया जाता है लेकिन शोध के अनुसार भोपाल की बेगम सुल्तान शाहजहां द्वारा बनाई हुई ताज-उल-मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद में शुमार है। यही नहीं ये एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद भी है। इस मस्जिद की संरचना बेहद खूबसूरत और भव्य है। ताज उल मस्जिद में हर साल तीन दिन का इज्तिमा उर्स होता है। जिसमें देश के कोने-कोने से लोग आते हैं। यह मस्जिद गुलाबी रंग से रंगी हुई है और इसकी गुम्‍बदे सफेद रंग की है। मस्जिद वाला क्षेत्र दिल थाम लेने वाला होता है, खासकर उस दौरान जब रात में लाइट्स की रोशनी में यह चमक उठता है।

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  8. नवाबों के शहर लखनऊ में स्थित बड़ा इमामबाड़ा जिसे भूलभुलैया भी कहते हैं, 17वीं शताब्दी की वास्तुकला और नवाबी ज़माने की इमारतों के सुरक्षा इंतज़ामात संबंधी निर्माण का बेहद शानदार नमूना है। लखनऊ के इस प्रसिद्ध इमामबाड़े का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी पाचंवी मस्जिद माना जाता है और इसे आसिफ उद्दौला ने बनवाया था। इस इमामबाड़े में एक अस़फी मस्जिद भी है जहां गैर मुस्लिम लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। इमामबाड़ा ऐतिहासिक द्वार का घर है, जो ऐसी अद्भुत वास्तुकला से परिपूर्ण है, जिसे देखकर आधुनिक वास्तुकार भी हैरत में पड़ जाते हैं।

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  9. जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में स्थित हज़रतबल मस्जिद अथवा जामा मस्जिद डल झील के किनारे एक ख़ूबसूरत मस्जिद है, जिसका निर्माण 1623 ई. में सादिक खान ने करवाया था। इस मस्जिद के समीप ही एक खूबसूरत बगीचा और इबादत महल है। इसका निर्माण पैगम्बर मोहम्मद मोई-ए-मुक्कादस के सम्मान में करवाया गया था। इस मस्जिद में पैग़म्बर मुहम्मद का एक बाल रखा है, ऐसा माना जाता है और यह मस्जिद इसी कारण से विख्यात है। इस मस्जिद की वास्‍तुकला मुगल और कश्मीरी स्थापत्य शैली का सही मिश्रण है, इस मस्जिद का निर्माण 17 वीं सदी में किया गया था जिसकी झलक स्पष्ट रूप से मस्जिद की वास्तुकला में दिखती है। श्रीनगर में यह मस्जिद मुस्लिमों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

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  10. उत्तर प्रदेश के जौनपुर में स्थित अटाला मस्जिद एक प्राचीन मस्जिद है, जिसको सुल्तान इब्राहिम शर्की ने बनवाया था। अटाला मस्जिद जौनपुर वास्तुकला का उत्तम नमूना है और यह मस्जिद जौनपुर शहर का एक प्रसिद्ध लैंडमार्क भी है। इस मस्जिद में कलात्मक दीवारों के साथ चारों तरफ सुन्दर दीर्घा का निर्माण कराया गया था। मस्जिद में प्रवेश के लिए तीन विशाल प्रवेश द्वार हैं। मस्जिद की सबसे प्रमुख विशेषता इसके अग्रभाग में उठा हुआ प्रार्थना कक्ष है। आज भी पर्यटक देश-विदेश से इसके दीदार के लिए यहाँ आते हैं।

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