10 सबसे विकसित भारतीय गांव

गांव देश के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसीलिए हमने 2017 के लिए भारत के शीर्ष 10 सबसे विकसित गांवों की सूची बनाई है। वैसे तो हमारे देश में ज्यादातर गाँव ऐसे हैं जहाँ पर्याप्त सुविधाएँ नहीं हैं लेकिन सौभाग्य से कुछ गांवों ऐसे भी हैं जिन्होंने कुछ नागरिकों की मदद और मार्गदर्शन से प्रगति की है। भारत में शीर्ष 10 सबसे विकसित गांवों की इस सूची में हमने उन नामों के साथ आने की कोशिश की है जो अद्वितीय और दूसरे से अलग हैं। इन गाँवों में खुशहाली है और ये विकास के क्षेत्रों में भी अग्रसर हैं। नीचे दिया गया प्रत्येक गांव किसी ना किसी कारण से लोकप्रिय है। आपको यह जानकर हैरानी भी होगी कि इनमें से कुछ तो प्रसिद्ध पर्यटक स्थल और आकर्षण भी हैं और इन्हीं में से कुछ नियमित रूप से दुनिया भर के इंटरनेट पर खोजे जाते हैं। तो आईये आज हम आपको इन्हीं विकसित गावों के बारे में बताने जा रहे हैं।


मावल्यान्नॉंग, मेघालय 2

मेघालय का मावल्यान्नॉंग गांव जिसे कि 'भगवान का अपना बगीचा' भी कहा जाता है। मावल्यान्नॉंग गांव भारत के साथ एशिया का भी सबसे स्वच्छ गांव है और यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। ये गांव मेघालय के शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश ब... अधिक पढ़ें

पोथनीकड़, केरल 3

100% साक्षरता दर के साथ पोथनीकड़ गांव केरल के एर्नाकुलम जिले में स्थित है। साथ ही ये गाँव भारत में 100% साक्षरता प्राप्त करने वाला पहला गांव है। इस गाँव में जंगली भैंस और हाथी बहुत अधिक पाए जाते हैं। फिर भी ये गांव अभी भारत में सबसे अधिक शिक्षित और सांस्कृतिक रूप से उन्नत गांवों में से एक है।

खोनोमा, नागालैंड 4

खोनोमा जिसे द ग्रीन विलेज भी कहते हैं नागालैंड भारत का पहला हरा गांव है। ये गांव नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 20 किमी दूर स्थित है। खोनोमा गाँव अपने जंगलों और कृषि की एक अनोखी रूप के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें क्षेत्र की सबसे पुरानी टेरासाइड खेती शामिल है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि गांव अपने स्वच्छ वातावरण, झाम की खेती, और हरित परिवेश के लिए जाना जाता है।

पुन्सरी, गुजरात 5

पुन्सरी भारत के सबसे विकसित गांवों में से एक है। उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ गुजरात में साबरकांठा जिले में स्थित इस गांव में बेहतर शिक्षा प्रणाली, बिजली, पानी की आपूर्ति और वाई-फाई में नई और उन्नत तकनीक के साथ भारी बदलाव आया ... अधिक पढ़ें

किला रायपुर, पंजाब 6

किला रायपुर गाँव पंजाब के लुधियाना में स्थित है और ये वार्षिक स्पोर्ट्स फेस्टिवल या भारत के ग्रामीण ओलंपिक के लिए जाना जाता है। यह अपने स्वयं के तरीके से विकसित किया गया है और ये गाँव खेल के प्रति उत्साही सैकड़ों लोगों के लिए गांव का खेल महोत्सव गंतव्य बन गया है। अक्सर यहाँ होने वाली प्रतियोगिताएं पंजाबी पुरुषों और महिलाओं की शारीरिक ताकत और वीरता को प्रदर्शित करती हैं।

मलाना, हिमाचल प्रदेश 8

मलाना गाँव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अति दुर्गम इलाके में स्थित है। इसे आप भारत का सबसे रहस्यमयी गाँव कह सकते हैं। इस गाँव में 2000 वर्ष पुरानी विश्व की पहली लोकतांत्रिक व्यवस्था यहां आज भी कायम है। यहां के मूल निवासी खुद को सिकंदर की सेना के वंशज मानते हैं। यह इकलौता ऐसा गांव है जहां अकबर की पूजा होती है। यहां कि विचित्र परंपराओं के कारण यहां हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं।

कथेवाडी, महाराष्ट्र 9

कठेवाडी आर्ट ऑफ लिविंग मॉडल गाँव महाराष्ट्र के नांदेड़ में स्थित है। इस गाँव के लोगों ने शराब के सेवन को पुर्णतः त्याग दिया है। इस गांव को अपनाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के लिए धन्यवाद देना लाजमी है। अब यह गांव के जीवन के एक मॉडल में रूपांतरित हो गया है।

कोकरे बेलूर, कर्नाटक 10

कर्नाटक का कोकरे बेलूर गांव पक्षी और प्रकृति प्रेमी गाँव है और अपने पक्षी अभयारण्य के लिए लोकप्रिय है। इस अभयारण्य को स्वयं ग्रामीणों द्वारा ही डिजाइन किया गया है। इन लोगों ने पक्षीयों को अपनी विरासत के रूप में अपनाया है। आप यह जानकर प्रसन्न होंगे कि गांव भारत में 21 प्रजनन वाले पक्षी स्थलों में से एक है और यहां पर एक कई तरह के दुर्लभ पक्षियों को भी देखा जा सकता है।

छापर, हरियाणा 11

छापर गांव हरियाणा का ऐसा एकमात्र गाँव है जो हरियाणा में लड़कियों के जन्म का जश्न मनाता है। इस गाँव में लड़की की पैदा होने पर इस गांव के पंचायत के सरपंच मिठाई बांटते हैं और यहां ये एक आम बात है। इस गांव की सरपंच भी एक महिला ही है और यहां महिलाओं पर अन्य गांवों की तरह कोई पाबंदी नहीं है। यहां तक कि गांव की एक भी महिला घूंघट नहीं करती है।

धरनई, बिहार 12

बिहार का धरनई गांव पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है देश का यह एकमात्र बाहरी ऊर्जा मुक्त गांव है। धरनई गांव में जहां स्थानीय लोगों ने एक एनजीओ की मदद से अपने गांव में बिजली उत्पन्न कर दिखाई। इसके बाद इस गांव में पहला सोलर माइक्रो ग्रिड स्थापित किया गया। दरअसल धरनई गांव में पिछले 30 सालों से बिजली नहीं थी जबकि ये गांव पटना-गया हाइवे पर ही स्थित है।

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