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मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई 25 महत्वपूर्ण योजनाएँ

साल 2014 में जब देश में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का कार्यभार सँभालने की जिम्मेदारी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी को दी | उसके बाद प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए ये सरकार मोदी सरकार के नाम से जानी गयी | इस सरकार ने देश के नागरिकों के हित में भिन्न- भिन्न योजनायें चलायी गयीं | उन योजनाओं में से कुछ नयी थीं , कुछ पुरानी योजनाओं के स्वरुप को बदल कर नया रूप दिया गया तथा कुछ पुरानी योजनाओं को बंद कर दिया गया |

हमने मोदी सरकार द्वारा महत्वपूर्ण केंद्र प्रायोजित योजनाओं की सूची तैयार की है। नरेंद्र मोदी ने 2014 से कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। ये योजनाएं किसानों, गृहिणियों, मजदूरों, छात्रों से लेकर छोटे दुकानदारों आदि के हितों के अनुसार कल्याणकारी हैं। तो आइये जानते है मोदी सरकार की कुछ प्रमुख योजनाओं के बारे में –


Swachh Bharat Mission - स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा आरंभ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना और कूढा साफ रखना है। यह अभियान 02 अक्टूबर, 2014 को आरंभ किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश को गुलामी से मुक्त कराया, परन्तु 'स्वच्छ भारत' का उनका सपना पूरा नहीं हुआ। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था।

स्वच्छ भारत का उद्देश्य व्यक्ति, क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से खुले में शौच की समस्या को कम करना या समाप्त करना है। स्वच्छ भारत मिशन विसर्जन उपयोग की निगरानी के जवाबदेह तंत्र को स्थापित करने की भी एक पहल सरकार ने 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गांधी के जन्म की 150 वीं वर्षगांठ तक ग्रामीण भारत में 1.96 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौंच मुक्त भारत (ओडीएफ) को हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल 1999 से शुरू, भारत सरकार ने व्यापक ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का पुनर्गठन किया और पूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी) शुरू किया जिसको बाद में (1 अप्रैल 2012 को) प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा निर्मल भारत अभियान (एनबीए) नाम दिया गया। स्वच्छ भारत अभियान के रूप में 24 सितंबर 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से निर्मल भारत अभियान का पुनर्गठन किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया कि मार्च 2014 में यूनिसेफ इंडिया और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने भारत सरकार द्वारा 1999 में शुरू विशाल पूर्ण स्वच्छता अभियान के हिस्से के रूप में स्वच्छता सम्मेलन का आयोजन किया, जिसके बाद इस विचार को विकसित किया गया।

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Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana - प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना भारत सरकार द्वारा समर्थित एक जीवन बीमा योजना है। इसका आरम्भ कोलकाता में 9 मई 2015 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। भारत सरकार ने समाज के गरीब और कम आय वर्ग के विकास के लिए एक नई जीवन बीमा योजना, प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना शुरू की है। एक शुद्ध अवधि बीमा योजना के रूप में, प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 18 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एक नवीकरण अवधि की बीमा पॉलिसी है, जो कि वार्षिक रूप से जीवन बीमा कवरेज प्रदान करती है जिस का बीमा किया गया है उस व्यक्ति के निधन के मामले में बीमा कम्पनी उसके व्यारा नामित किये हुए व्यक्ति को 2,00,000 रुपये, देती है इसकी प्रीमियम दर बीमा पालिसी में सबसे किफायती है इसके लिए आप को सिर्फ 330 रूपए देने होंगे ये प्रति वर्ष के लिए रही है तो आप के नवीन वर्ष में इसका प्रमियम दुबारा से 330 देना होगा |

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ग्राम उदय से भारत उदय अभियान 1

प्रधानमंत्री ने महू में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में ‘ग्राम उदय से भारत उदय अभियान’ का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्‍य है कि वह इस शुभ दिवस पर महू में हैं। उन्‍होंने इस अवसर पर यह स्‍मरण किया कि डॉ. अम्‍बेडकर ने समाज में अन्‍याय के खिलाफ लड़़ाई लड़ी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्‍होंने समानता और सम्‍मान के लिए लड़ाई लड़ी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि 14 अप्रैल से लेकर 24 अप्रैल, 2016 तक चलने वाले ग्राम उदय से भारत उदय अभियान’ के तहत गांवों में होने वाले विकास कार्यों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इस साल का केंद्रीय बजट किसानों और गांवों को समर्पित है। उन्‍होंने कहा कि विकास की पहलों को ग्रामीण विकास पर केंद्रित होना चाहिए।

केंद्र सरकार द्वारा की गई कुछ महत्‍वपूर्ण विकास पहलों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 1000 दिनों की समय सीमा के भीतर उन 18000 गांवों का विद्युतीकरण किया जा रहा है, जो बिजली की सुविधा से वंचित हैं। उन्‍होंने कहा कि ‘गर्व’ एप के जरिये लोग इस लक्ष्‍य की प्राप्ति में हो रही प्रगति का अवलोकन कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी आवश्‍यक है।
प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्‍य का उल्‍लेख किया और कहा कि ग्रामीणों की क्रय क्षमता को निश्चित तौर पर बढ़ाना है, क्‍योंकि इससे भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को नई गति मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि पंचायती राज से जुड़े संस्‍थानों को और ज्‍यादा मजबूत एवं ज्‍यादा जीवंत बनाया जाना चाहिए।

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Skill India Mission - स्किल इंडिया मिशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2022 तक विभिन्न कौशल में भारत में 40 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए कौशल भारत अभियान शुरू किया गया था। 15 फरवरी 2016 तक, "इंडियन लेदर डेवलपमेंट प्रोग्राम" ने 100 दिनों के अंतराल में 51,216 युवाओं को प्रशिक्षित किया और यह सालाना 1,44,000 युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है। हैदराबाद, पटना, बानूर (पंजाब) और अंकलेश्वर (गुजरात) में "फुटवियर डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट" की चार नई शाखाएँ - प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए स्थापित की जा रही हैं। उद्योग तीव्र कौशल की कमी से गुजर रहा है और प्रशिक्षित अधिकांश लोग उद्योग द्वारा अवशोषित किए जा रहे हैं।

आधुनिक दिन बाजार की मांगों के साथ कुशल कर्मचारियों और नेताओं की पीढ़ी तैयार करने के प्रयास में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में कौशल भारत का शुभारंभ किया गया था। कौशल भारत, 2022 तक विभिन्न उद्योग प्रासंगिक कौशल के साथ 40 करोड़ से अधिक नागरिकों को प्रशिक्षित करने के लिए शुरू किया गया था। , एक सुव्यवस्थित संस्थागत के माध्यम से लागू किया जाना है।

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Make In India - मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया भारत सरकार द्वारा देशी और विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में ही वस्तुओं के निर्माण पर बल देने के लिए बनाया गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में 25 सितंबर, 2014 को शुरू की "भारत में बनाओ।" 29 दिसंबर 2014, एक कार्यशाला औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग जो मोदी, उनके मंत्रिमंडल के मंत्रियों और राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ ही विभिन्न उद्योग के नेताओं ने भाग लिया द्वारा आयोजित किया गया था।

पहल के पीछे प्रमुख उद्देश्य रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के 25 क्षेत्रों में कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हैं। पहल भी उच्च गुणवत्ता मानकों पर और पर्यावरण पर प्रभाव को कम करना है। पहल भारत में पूंजी और प्रौद्योगिकी निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद है।

'मेक इन इंडिया ' अर्थव्यवस्था के निम्न पच्चीस क्षेत्रों पर केंद्रित है: गाडियां, ऑटोमोबाइल अवयव, विमानन, जैव प्रौद्योगिकी, रसायन, निर्माण, रक्षा विनिर्माण, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस प्रोसेस प्रबंधन, चमड़ा, मीडिया और मनोरंजन, खनिज, तेल और गैस, फार्मास्यूटिकल्स, बंदरगाह और शिपिंग,रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, सड़क और राजमार्ग, अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान, कपड़ा और परिधानों, तापीय उर्जा, पर्यटन और आतिथ्य कल्याण।

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Beti Bachao, Beti Padhao Yojana - बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ,स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास की एक संयुक्त पहल के रूप में समन्वित और अभिसरित प्रयासों के अंतर्गत बालिकाओं को संरक्षण और सशक्त करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी,2015 को की गई है और जिसे निम्न लिंगानुपात वाले 100 जिलों में प्रारंभ किया गया है। सभी राज्यों / संघ शासित क्षेत्रों को कवर 2011 की जनगणना के अनुसार निम्न बाल लिंगानुपात के आधार पर प्रत्येक राज्य में कम से कम एक ज़िले के साथ 100 जिलों का एक पायलट जिले के रूप में चयन किया गया है। भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है पर सबसे अधिक दुर्भाग्य की बात ये है कि बढती जनसंख्या के बावजूद लड़कियों का अनुपात घटता जा रहा है। भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार, हर हजार लड़कों पर 927 लडकियाँ थी, जबकि 2011 की जनगणना में ये आंकडें घटकर 918 लड़कियों पर आ गये।

क्या आपको पता है UNICEF ने भारत को बाल लिंग अनुपात ( Child Sex Ratio) में 195 देशों में से 41वाँ स्थान दिया है। यानि की हम लिंग अनुपात में 40 देशों से पीछे हैं।

योजना के उद्देश्य-
पक्षपाती लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलन।, बालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना।, बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना।, बालिकाओं को शोषण से बचाना व उन्हें सही/गलत के बारे में अवगत कराना।, इस योजना का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से लड़कियों को सामाजिक और वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाना है।, लोगों को इसके प्रति जागरुक करना एवं महिलाओं के लिए कल्याणकारी सेवाएं वितरित करने में सुधार करना है।, इस योजना के तहत मुख्य रूप से लड़के एवं लड़कियों के लिंग अनुपात में ध्यान केन्द्रित किया गया है।, ताकि महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव और सेक्स डेटरमिनेशन टेस्ट को रोका जा सके।, इस योजना का उद्देश्य बेटियों के अस्तित्व को बचाना एवं उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है।, शिक्षा के साथ – साथ बेटियों को अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ाने एवं उनकी इसमें भागीदारी को सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य लक्ष्य है।

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Heritage City Development and Augmentation Yojana (Hriday Yojana)

नेशनल हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटेशन योजना को 21 जनवरी 2015 को प्रत्येक हेरिटेज सिटी के विरासत चरित्र को संरक्षित करने के लिए शहरी योजना, आर्थिक विकास और विरासत संरक्षण को एक समावेशी तरीके से लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। यह योजना कुछ विशिष्ट अमूर्त संपत्ति को पुनर्जीवित करने के साथ स्मारकों, घाटों, मंदिरों जैसे विरासत संपत्ति के लिए लिंक किए गए शहरी बुनियादी ढांचे के पुनरुद्धार सहित कोर विरासत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास का समर्थन करेगी। इन पहलों में स्वच्छता सुविधाओं, सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और पार्किंग, नागरिक सेवाओं, सूचना कियोस्क आदि का विकास शामिल है।

4 साल की अवधि (नवंबर 2018 में पूरा होने) और 500 करोड़ (यूएस $ 72 मिलियन) के कुल परिव्यय के साथ, इस योजना को 12 चिन्हित शहरों जैसे अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बादामी, द्वारका, गया , कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेलंकन्नी और वारंगल में लागू करने की तैयारी है।

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Pradhan Mantri Mudra Yojana - प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना मुद्रा बैंक के तहत एक भारतीय योजना है जिसकी शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को नई दिल्ली में की थी।
मुद्रा बैंक के तहत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के हस्तक्षेप के तहत इसमें तीन श्रेणीयां है -शिशु ,किशोर और तरुण। ये तीनों श्रेणीयां लाभार्थियों को विकास और वृद्धि में मदद करेगी।मुद्रा बैंक के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैः

  1. सूक्ष्म वित्त के ऋणदाता और कर्जगृहिता का नियमन और सूक्ष्म वित्त प्रणाली में नियमन और समावेशी भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उसे स्थायित्व प्रदान करना।
  2. सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एमएफआई) और छोटे व्यापारियों, रिटेलर्स, स्वसहायता समूहों और व्यक्तियों को उधार देने वाली एजेंसियों को वित्त एवं उधार गतिविधियों में सहयोग देना।
  3. सभी एमएफआई को रजिस्टर करना और पहली बार प्रदर्शन के स्तर (परफॉर्मंस रेटिंग) और अधिमान्यता की प्रणाली शुरू करना। इससे कर्ज लेने से पहले आकलन और उस एमएफआई तक पहुंचने में मदद मिलेगी, जो उनकी जरूरतों को पूरी करते हो और जिसका पुराना रिकॉर्ड सबसे ज्यादा संतोषजनक है। इससे एमएफआई में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इसका फायदा कर्ज लेने वालों को मिलेगा।
  4. कर्ज लेने वालों को ढांचागत दिशानिर्देश उपलब्ध कराना, जिन पर अमल करते हुए व्यापार में नाकामी से बचा जा सके या समय पर उचित कदम उठाए जा सके। डिफॉल्ट के केस में बकाया पैसे की वसूली के लिए किस स्वीकार्य प्रक्रिया या दिशानिर्देशों का पालन करना है, उसे बनाने में मुद्रा मदद करेगा।
  5. मानकीकृत नियम-पत्र तैयार करना, जो भविष्य में सूक्ष्म व्यवसाय की रीढ़ बनेगा।
  6. सूक्ष्य व्यवसायों को दिए जाने वाले कर्ज के लिए गारंटी देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम बनाएगा।
  7. वितरित की गई पूंजी की निगरानी, कर्ज लेने और देने की प्रक्रिया में मदद के लिए उचित तकनीक मुहैया कराएगा।
  8. छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को प्रभावी ढंग से छोटे कर्ज मुहैया कराने की प्रभावी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उपयुक्त ढांचा तैयार करना।

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प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 2

प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना भारत में एक सरकार समर्थित दुर्घटना बीमा योजना है। यह 2015 के बजट भाषण में मूल रूप से वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा फरवरी 2015 में उल्लेख किया गया था। इसे औपचारिक रूप से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 मई को कोलकाता में लॉन्च किया गया था। मई 2016 तक, भारत की केवल 20% आबादी के पास किसी भी प्रकार का बीमा है, इस योजना का उद्देश्य संख्या को बढ़ाना है। 12 रुपये प्रति वर्ष की न्यूनतम प्रीमियम दर के साथ यह नीति समाज के गरीब और निम्न आय वाले वर्ग के लिए सबसे अधिक फायदेमंद है। प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना आकस्मिक निधन और स्थायी विकलांगता के लिए 2 लाख और स्थायी आंशिक अक्षमता के लिए 1 लाख रुपये का जीवन कवरेज प्रदान करती है।

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Smart Cities Mission - स्मार्ट सिटी योजना

भारत में स्मार्ट नगर की कल्पना प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की है जिन्होंने देश के 100 नगरों को स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित करने का संकल्प किया है। सरकार ने 27 अगस्त 2015 को 98 प्रस्तावित स्मार्ट नगरों की सूची जारी कर दी। सरकार की योजना के अनुसार 20 नगर वर्ष 2015 में , 40 नगर 2016 में और 40 नगर 2017 में स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित करने की योजना प्रस्तावित है। दिनांक 28 जनवरी 2016 को भारत सरकार ने 20 स्मार्ट सिटी घोषित किये।

केंद्रीय बजट में वर्ष 2014 में 7060 करोड़ रुपये का प्रस्ताव। केंद्र सरकार की इस योजना में 5 वर्ष में कुल 48,000 करोड़ का निवेश करने की योजना है और इतना ही धन सम्बंधित राज्य सरकारें अपने -अपने राज्य में चयनित नगरों के विकास में खर्च करेंगी। अर्थात केंद्र और राज्य सरकारें इस योजना में सामान धन निवेश करेंगी। इस वर्ष 2015 में चयनित स्मार्ट नगरों के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये और अगले चार वर्षों तक प्रत्येक वर्ष 100 करोड़ रुपये प्रत्येक नगर को आवंटित होंगे।

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सेतु भारतम् योजना 3

सेतु भारतम को 4 मार्च 2016 को (102 बिलियन (यूएस $ 1.5 बिलियन) के बजट में, सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को 2019 तक रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त बनाने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। परियोजना के तहत, राष्ट्रीय राजमार्गों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर 208 रेल ओवर और अंडर ब्रिज (आरओबी / आरयूबी) का निर्माण किया जाएगा और 1,500 जर्जर ब्रिटिश काल के पुलों को एक चरणबद्ध तरीके से चौड़ा, पुनर्वासित या प्रतिस्थापित किया जाएगा।

सेतु भारतम कार्यक्रम का लक्ष्य 2019 तक सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे स्तर के क्रॉसिंग से मुक्त बनाना है। ऐसा लगातार दुर्घटनाओं और स्तर के क्रॉसिंग पर जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए किया जा रहा है। 208 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) / रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) कार्यक्रम के भाग के रूप में 20,800 करोड़ की लागत से लेवल क्रॉसिंग पर बनाए जाएंगे।

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प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना 4

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं के चेहरों पर खुशी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2016 को शुरू की गई एक योजना है। इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन मिलेंगे। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना से गरीब महिलाओं को जल्‍द ही मिट्टी के चूल्‍हे से आजादी मिल जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए उपयोग में आने वाले जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना है। योजना का एक मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और उनकी सेहत की सुरक्षा करना भी है। गरीब परिवार की महिला सदस्यों को मुफ्त रसोई गैस (एलपीजी) कनेक्शन मुहैया कराने के लिए मंत्रिमंडल ने 8,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभ:-
इस योजना के प्रारंभ होने से खाने पर धुंआ के असर से मृत्यु में कमी होगी
इस योजना से छोटे बच्चे के स्वास्थ्य की समस्या कम होगी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के प्रारंभ होने से शुद्ध जल के प्रयोग से महिलाओं का स्वास्थ्य सुधरेगा
इस सरकारी योजना से अशुद्ध जीवाश्म इंधन के प्रयोग करने वाले वातावरण में कम प्रदूषण होगा|
इस योजना के शुरू होने से जंगलों की कटाई कम होगी।
महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नहीं झेलना पड़ेगा।

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Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana - प्रधानमंत्री जन धन योजना

प्रधानमंत्री जन धन योजना (संक्षेप में - पीएमजेडीवाई) भारत में वित्तीय समावेशन पर राष्‍ट्रीय मिशन है और जिसका उद्देश्‍य देश भर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का बैंक खाता खोलना है। इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को तथा इसका शुभारंभ 28 अगस्त 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री ने सभी बैंको को ई-मेल भेजा जिसमें उन्होंने 'हर परिवार के लिए बैंक खाता' को एक ‘राष्‍ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित किया और सात करोड़ से भी अधिक परिवारों को इस योजना में प्रवेश देने और उनका खाता खोलने के लिए सभी बैंको को कमर कसने को कहा।योजना के उद्घाटन के दिन ही 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए।

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सांसद आदर्श ग्राम योजना 5

सांसद आदर्श ग्राम योजना गांवों के निर्माण और विकास हेतु कार्यक्रम है। जिसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में विकास करना है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के प्रधान मंत्री, नरेन्द्र मोदी जी ने जयप्रकाश नारायण के जन्म दिन 11 अक्टूबर 2014 को शुरू किया।
सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांवों में विकास और बुनियादी ढाँचे रखने हेतु सभी राजनीतिक दलों के सांसद को इस योजना के तहत गाँव को गोद लेना है और 2016 तक उसे आदर्श गाँव बनाना था।

गाँवों में भौतिक और संस्थागत बुनियादी ढांचे के विकास की ज़िम्मेदारी लेते हुए, सभी राजनैतिक दलों के संसद सदस्यों को एक ही छत्र के नीचे लाने और उन्हें आदर्श गाँवों में बदलने के लिए सर्व आदर्श ग्राम योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत, संसद के प्रत्येक सदस्य को अपने स्वयं के गाँव या अपने ससुराल गाँव को छोड़कर निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक एक गाँव को चुनने की आवश्यकता होती है और मापदंडों को तय करके 2019 तक इसे एक आदर्श गाँव बना दिया जाता है।

तत्पश्चात, वे दो या तीन और गाँवों को ले सकते हैं और 2019 में अगले आम चुनावों के समय तक ऐसा ही कर सकते हैं, और उसके बाद, अपने आप को दस वर्षीय गाँव या ग्रामीण सुधार परियोजनाओं के लिए निर्धारित करते हैं। गांवों को स्मार्ट स्कूल, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच और बेघर ग्रामीणों के लिए पक्के आवास की पेशकश की जाएगी।

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Shramev-Jayate-Yojana - श्रमेव जयते योजना

श्रमेव जयते का मकसद किसी प्रोजेक्ट को सुचारू ढंग से लागू करना, उत्पाद बढ़ाना और ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करना है, साथ ही श्रमिकों के हितों का ख्याल रखना और इंडस्ट्री की उद्मता का विकास करना।

कार्यक्रम की कुछ मुख्य बातें…1. श्रम सुविधा यानि यूनिफाइड लेबर पोर्टल होगा जिसके तहत 6-7 लाख उद्योगों को सेल्फ सर्टिफिकेशन और सिंगल ऑनलाइन रिटर्न भरने की सुविधा होगी. साथ ही एक जिम्मेवार लेबर इंस्पेक्शन की योजना भी होगी।
2. मजदूरों के पीपीएफ के लिए एक UAN यानि यूनिवर्सल एकाउंट नंबर मिलेगा जो कंपनी बदलने के बाद भी नहीं बदलेगा।
3. वोकेशनल ट्रेनिंग की सुविधा दी जाएगी जो स्थानीय मांग और जरूरतों के हिसाब से तय होंगी।
4. अप्रेंटिस प्रोत्साहन योजना भी इसका हिस्सा होगी जिसके तहत युवाओं को रोजगार मिलना आसान हो जाएगा।
5. राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर भी लागू किया जाएगा।

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उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल ( उजाला योजना ) 6

उजाला योजना (उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल ) भारत सरकार की एक योजना है जिसके अन्तर्गत कम मूल्य पर एल ई डी बल्ब दिये जाते हैं ताकि बिजली की बचत की जा सके। यह योजना 'बचत लैम्प योजना' के स्थान पर 01 मई 2015 को भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू की। इस योजना के अन्तर्गत एक वर्ष के अन्दर ही 9 करोड़ एलईडी बल्बों की बिक्री हो गयी, जिससे लगभग 550 करोड रूपये के बिजली बिल की बचत हुई।

यह बचत 365 दिनों तक 20 लाख से भी ज्यादा घरों को रोशन करने में सक्षम है। यूनिट के लिहाज से बिजली की बचत करने के अलावा कार्बन-डाइऑक्साइड के दैनिक उत्सर्जन में 23,000 टन की कमी करने में भी सफलता मिली है। उजाला योजना के तहत वितरित किए गए एलईडी बल्ब का दाम इसके बाजार मूल्य का एक तिहाई है। बेहतर गुणवत्ता वाले इन बल्बों पर तीन साल की मुफ्त प्रतिस्थापन (फ्री रिप्लेसमेंट ) वारंटी भी दी जाती है।

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atal-pension-yojana - अटल पेंशन योजना

अटल पेंशन योजना भारत सरकार द्वारा समर्थित वृत्ति योजना है। इसका लक्ष्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को पेंशन की सुविधा प्रदान करना है। इसका आरम्भ कोलकाता में 9 मई 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया। मई 2015 तक, भारत की जनसंख्या में से केवल 11% के पास किसी भी तरह की वृत्ति योजना है। इस योजना का लक्ष्य संख्या में वृद्धि करना है।

अटल पेंशन योजना में, वृत्ति फंड में किए गए प्रत्येक योगदान के लिए पर केंद्र सरकार के कुल योगदान का 50% सह-योगदान भी करेगी या यूएस $ 16, प्रति वर्ष, जो भी कम हो, प्रत्येक पात्र ग्राहक के खाते में 5 वर्ष की अवधि के लिए हो। अटल पेंशन योजना में शामिल होने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है और अधिकतम उम्र 40 वर्ष है। बाहर निकलने की उम्र और वृत्ति की शुरुआत 60 साल होगी। अतः अटल पेंशन योजना के अंतर्गत ग्राहक द्वारा न्यूनतम अंशदान 20 साल या उससे अधिक हो जाएगा। आधार लाभार्थियों, पति या पत्नी और उम्मीदवारों की पहचान लंबी अवधि में पेंशन के अधिकार और पात्रता से संबंधित विवादों से बचने के लिए प्राथमिक केवाईसी दस्तावेज द्वारा होगी। प्रमाण के लिए एक राशन कार्ड की प्रति प्रस्तुत कर सकते हैं, बैंक पासबुक की कॉपी भी स्वीकार की जायेगी है।

ग्राहकों को मासिक वृत्ति का विकल्प चुनना होगा 1000 से 5000 रुपये और नियमित रूप से नियत मासिक भुगतान सुनिश्चित करना होगा। उपलब्ध मासिक वृत्ति राशि के अनुसार, संचय चरण के दौरान ग्राहक वृत्ति राशि में कमी या वृद्धि कर सकते हैं। हालांकि, स्विचिंग विकल्प अप्रैल माह के दौरान वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी। यह योजना प्रधान मंत्री जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए बैंक खातों से जुड़ी होगी और योगदान स्वचालित रूप से कट जाएगा। इन खातों में से अधिकांश शून्य शेष शुरू में थी। भारत सरकार का उद्देश्य इस और संबंधित योजनाओं का उपयोग करके ऐसे शून्य शेष खातों की संख्या को कम करना है।

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AMRUT - ए ऍम आर यू टी

यह योजना जून 2015 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी, जिसमें बुनियादी ढांचे की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जो शहरी पुनरुद्धार परियोजनाओं को लागू करके शहरी परिवर्तन के लिए पर्याप्त मजबूत सीवेज नेटवर्क और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कर सके। AMRUT के लिए अटल मिशन के तहत राज्य वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य था। यह योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर निर्भर है। यदि आवश्यक हो, तो स्वच्छ भारत मिशन, सभी 2022 के लिए आवास, स्थानीय राज्य योजनाओं के साथ-साथ पानी की आपूर्ति और सीवरेज और अन्य बुनियादी ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं जैसी योजनाओं को AMRUT से जोड़ा जा सकता है।

स्मार्ट शहरों मिशन के तहत शहरी विकास पर 1 लाख करोड़ (यूएस $ 14 बिलियन) निवेश और 500 शहरों के शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन को सरकार द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी गई है।

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Digital India Mission - डिजिटल इंडिया मिशन

डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है। डिजिटल इंडिया के तीन मुख्य घटक हैं-

1- डिजिटल आधारभूत ढाँचे का निर्माण करना,
2- इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को जनता तक पहुंचाना,
3- डिजिटल साक्षरता।
योजना को 2019 तक कार्यान्वयित करने का लक्ष्य है। एक टू-वे प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाएगा जहाँ दोनों (सेवा प्रदाता और उपभोक्ता) को लाभ होगा। यह एक अंतर-मंत्रालयी पहल होगी जहाँ सभी मंत्रालय तथा विभाग अपनी सेवाएं जनता तक पहुंचाएंगें जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा और न्यायिक सेवा आदि। चयनित रूप से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को अपनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सूचना केंद्र के पुनर्निर्माण की भी योजना है। यह योजना मोदी प्रशासन की टॉप प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है। यह एक सराहनीय और सभी साझेदारों की पूर्ण समर्थन वाली परियोजना है। जबकि इसमें लीगल फ्रेमवर्क, गोपनीयता का अभाव, डाटा सुरक्षा नियमों की कमी, नागरिक स्वायत्तता हनन, तथा भारतीय ई-सर्विलांस के लिए संसदीय निगरानी की कमी तथा भारतीय साइबर असुरक्षा जैसी कई महत्वपूर्ण कमियाँ भी हैं। डिजिटल इंडिया को कार्यान्वयित करने से पहले इन सभी कमियों को दूर करना होगा।

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स्वर्ण मुद्रीकरण योजना 7

स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम) भारत सरकार की एक योजना है जिसकी घोषणा 2015-16 के बजट में की गयी थी। यह योजना स्वर्ण जमा योजना (गोल्ड डिपाजिट स्कीम) के स्थान पर शुरू की गई है। 5 नवंबर 2015 से यह यह योजना लागू है। इस योजना का उद्देश्य घरों व अन्य संस्थानों के पास निष्क्रिय पड़े लगभग 20000 टन स्वर्ण का उत्पादक कार्यों में इस्तेमाल करना एक भारत में सोने के आयात को कम करना है। इस योजना में कम से कम 30 ग्राम सोना जमा करना होगा। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम सोने की मात्रा का निर्धारण नहीं किया गया है अर्थात जमाकर्ता 30 ग्राम से लेकर अपनी इच्छानुसार सोना जमा कर सकता है। जमा किये गये सोने के एवज में बैंक द्वारा ग्राहक को ब्याज दिया जायेगा। इस स्वर्ण जमा खाते पर वही नियम लागू होंगे जो सामान्यतः किसी जमा खाते पर होते हैं। इस सोने के एवज में मिलने वाले ब्याज पर कोई आयकर या पूंजीगत लाभ कर/ टैक्स नहीं लगेगा।

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उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना ( उदय योजना ) 8

उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना, भारत की विद्युत वितरण करने वाली कम्पनियों के आर्थिक पुरुत्थान के लिये शुरू की गयी भारत सरकार की एक योजना है। यह 5 नवम्बर 2015 को आरम्भ हुई थी जिसके के तहत राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशो की घाटे में चल रही विधुत वितरण कंपनियों को घाटे से उबारने एवं उनकी वितीय स्थिति को सुद्रढ करने का कार्य किया जा रहा है। इसी योजना के कारण ही राजस्थान की विधुत वितरण कंपनियों के घाटे में काफी हद तक सुधार हुआ है इन कंपनियों का घाटा 27.3 प्रतिशत से घटकर वर्तमान में 23.6 प्रतिशत हो गया है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मिजोरम शामिल हुए, जिससे कुल 27 राज्य जुड़ गए। नवंबर 2017 तक, केवल राज्य जो इसमें शामिल नहीं हुए हैं, वे ओडिशा और पश्चिम बंगाल हैं। अब तक 31 राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश इस योजना में शामिल हो चुके हैं मिजोरम शामिल होने वाला 27 वां राज्य है। लक्षद्वीप 28 फरवरी, 2018 को इस योजना में शामिल हुआ, जिसमें कुल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 32 में शामिल किया गया।

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Start Up India - स्टार्ट अप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक पहल है। इस अभियान की घोषणा सबसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को लाल किले से नई दिल्ली में अपने संबोधन के दौरान की थी। इस पहल की कार्य योजना, निम्नलिखित तीन स्तंभों पर आधारित है: सरलीकरण और हैंडहोल्डिंग।, अनुदान सहायता और प्रोत्साहन। व उद्योग-अकादमी भागीदारी और ऊष्मायन।
इस पहल से संबंधित फोकस का एक अतिरिक्त क्षेत्र, इस डोमेन के भीतर प्रतिबंधात्मक राज्य सरकार की नीतियों को त्यागना है, जैसे कि लाइसेंस राज, भूमि अनुमतियाँ, विदेशी निवेश प्रस्ताव और पर्यावरणीय मंजूरी। उद्योग और आंतरिक व्यापार (डीपीआई और आईटी) को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा इसका आयोजन किया गया था।

एक स्टार्टअप को एक ऐसी संस्था के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका मुख्यालय भारत में है, जिसे 10 साल से भी कम समय पहले खोला गया था, और इसका वार्षिक कारोबार 100 करोड़ (US $ 14 मिलियन) से कम है। इस पहल के तहत, सरकार ने पहले ही I-MADE कार्यक्रम शुरू किया है, जिससे भारतीय उद्यमियों को 10 लाख (1 मिलियन) मोबाइल ऐप स्टार्ट-अप और MUDRA बैंक की योजना (प्रधानमंत्री मुद्रा योजना) बनाने में मदद करने की पहल की गई है माइक्रो-फ़ाइनेंस, कम सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के उद्यमियों के लिए कम-ब्याज दर वाले ऋण। 20,000 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी (2018 में 8 210 बिलियन या US $ 3.0 बिलियन के बराबर) इस योजना के लिए आवंटित की गई है।

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नमामि गंगे योजना 9

सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया। इसे राष्ट्रीय नदी भले ही घोषित किया गया हो पर यह राज्यों की मर्जी से ही बहती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया। नमामि गंगे प्रोजेक्ट की 231 योजनाओं में गंगोत्री से शुरू होकर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबद , बनारस , गाजीपुर , बलिया , बिहार में 4 और बंगाल में 6 जगहों पर पुराने घाटों का जीर्णोद्धार, नए घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, बैठने की जगह, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट, आक्सीडेशन प्लान्ट बायोरेमेडेशन प्रक्रिया से पानी के शोधन का काम किया जाएगा। इसमें गांव के नालों को भी शामिल किया गया है। साथ ही तालाबों का गंगा से जुड़ाव पर क्या असर होता है उसे भी देखा जाएगा।

शुरूआती स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत नदी की उपरी सतह की सफ़ाई से लेकर बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने; ग्रामीण क्षेत्रों की सफ़ाई से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की नालियों से आते मैले पदार्थ (ठोस एवं तरल) और शौचालयों के निर्माण; शवदाह गृह का नवीकरण, आधुनिकीकरण और निर्माण ताकि अधजले या आंशिक रूप से जले हुए शव को नदी में बहाने से रोका जा सके, लोगों और नदियों के बीच संबंध को बेहतर करने के लिए घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित है।

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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना 10

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2015-16 में की थी जिसे अब स्वीकर कर लिया गया है। इस योजना से सोने की मांग में कमी आएगी और प्रतिवर्ष 300 टन सोने की छड़ें और सिक्कों की खरीदारी के लिए किए जाने वाले निवेश को स्वर्ण बांड में लगाया जा सकेगा।

भारत में सोने की मांग अधिकतर आयात द्वारा पूरी की जाती है। इस योजना से देश के चालू खाते के घाटे को सीमित करने में मदद मिलेगी। एसजीबी को 2015-16 और उसके आगे की अवधि के लिए सरकार के बाजार उधार कार्यक्रम के दायरे में जारी किया जाएगा। वित्त मंत्रालय से सलाह के बाद जारी करने की वास्तविक मात्रा भारतीय रिजर्व बैंक तय करेगा। सोने की कीमतों में बदलाव संबंधी जोखिम को स्वर्ण भंडार निधि द्वारा वहन किया जाएगा। इससे सरकार को ऋण लागत में कमी लाने का लाभ होगा जिसे स्वर्ण भंडार निधि में हस्तांतरित किया जाएगा।

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Stand Up India - स्टैंड अप इंडिया

महिलाओं और एससी और एसटी समुदायों के बीच उद्यमशीलता का समर्थन करने के लिए 5 अप्रैल 2016 को भारत सरकार द्वारा स्टैंडअप इंडिया की शुरुआत की गई थी।

यह स्टार्टअप इंडिया से अलग है लेकिन अलग है। दोनों मेक इन इंडिया, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, सागरमाला, भारतमाला, UDAN-RCS, डिजिटल इंडिया, BharatNet और UMANG जैसी अन्य प्रमुख सरकार की योजनाओं के प्रवर्तक और लाभार्थी हैं। यह योजना अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों और कृषि क्षेत्र के बाहर नए उद्यम स्थापित करने वाली महिलाओं के लिए 10 लाख (US $ 14,000) और 1 करोड़ (US $ 140,000) के बीच ऋण प्रदान करती है।

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