हमारे भारत देश में कई ऐसे कवियों ने जन्म लिया है, जिन्होंने लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। इन्होंने अपनी कविताओं से लोगों को कुछ अलग तरह से सोचने पर मजबूर किया है। कविता इस देश की सबसे महान शैलियों में से एक है। भारतीय साहित्य का इतिहास भी 6वीं शताब्दी में महान महाकाव्य कविता में ही लिखा गया था। भारतीय साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी विविधता है। जो देश की विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के कारण होती है। भारत में जन्में इन महानतम और लोकप्रिय भारतीय कवि ने हमें जीने का सही तरीका बताया है। इनकी कवितायेँ पढ़कर हम में एक नई सोच और क्षमता जाग्रत होती है।

इसीलिए आज हम आपके लिए ऐसे कवियों की सूची लाये हैं। जिनकी कवितायेँ हर आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

  1. कबीर

    कबीर दास 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और महान संत थे। इनकी हिंदी रचनाओं ने भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। ये सभी धर्मों के परेय थे। अपने जीवनकाल के दौरान इन्होंने सभी धर्मों की धार्मिक प्रथाओं की सख्त आलोचना की थी। कबीर पंथ नामक धार्मिक सम्प्रदाय इनकी शिक्षाओं के अनुयायी हैं। इनकी कवितायें आज सैकड़ों सालों बाद भी जीवित हैं।

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  2. रामधारी सिंह ‘दिनकर’

    रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि और निबन्धकार थे। ये आधुनिक युग के वीर रस के श्रेष्ठ कवि के रूप में विख्यात हैं। दिनकर जी स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए। और स्वतन्त्रता के बाद ये राष्ट्रकवि के नाम से जाने गये। इनकी कविताओं में एक ओर जहां ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है, तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें इनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में देखने को मिलता है। बागी कविताओं के राजा रामधारी सिंह दिनकर जी को राष्ट्रकवि की उपाधि देकर सम्मानित किया गया था।

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  3. मैथिलीशरण गुप्त

    राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हिन्दी के प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। ये भारत के उन महान राजनैतिक कवियों में से एक थे, जिन्होंने खड़ी बोली के सहारे पाठकों का दिल जीता। इन्हें साहित्य जगत में ‘दद्दा’ नाम से सम्बोधित किया जाता था। इनकी कृति भारत-भारती भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय में काफी प्रभावशाली साबित हुई थी। इसीलिए महात्मा गांधी ने इन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की पदवी भी दी थी। इनकी जयन्ती हर साल 3 अगस्त को ‘कवि दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।

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  4. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

    सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ भी हिन्दी कविता के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। निराला जी ऐसे कवि थे, जिन्होंने हिंदी कविताओं में मुक्त छंद के प्रकार से पाठकों को एवं अन्य कवियों को परिचित करवाया। जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ सूर्यकान्त त्रिपाठी हिन्दी साहित्य में छायावाद के 4 प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। वैसे तो कविताओं के अलावा इन्होंने कहानियां, उपन्यास और निबंध भी लिखे हैं, किन्तु इनकी ख्याति विशेष रूप से कविता के कारण ही है।

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  5. सुमित्रानंदन पंत

    सुमित्रानंदन पंत जी हिंदी साहित्य में छायावादी युग के प्रमुख कवियों में से एक हैं। ये एक ऐसे कवि थे, जो प्रकृति से प्रेरणा लेकर उसे लोगों तक पहुंचाते थे। इनका व्यक्तित्व भी इनकी ओर आकर्षण का केंद्र बिंदु था। इनकी रचना “चिदम्बरा” के लिये इहें 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा इनकी रचना “कला और बूढ़ा चांद” के लिये इन्हें 1960 का साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। इसके अलावा भी इनको अनेकों प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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  6. रहीम

    रहीम हिंदी भाषा के बहुत प्रभावशाली कवि थे। ये मुसलमान होकर भी कृष्ण भक्त थे। इनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था। मुस्लिम धर्म के अनुयायी होते हुए भी रहीम ने अपनी काव्य रचना द्वारा हिन्दी साहित्य की जो सेवा की वह अद्भुत है। रहीम की कई रचनायें प्रसिद्ध हैं। अपनी रचनाओं को इन्होंने दोहों के रूप में लिखा। इन्होंने अपने अनुभवों को जिस सरल शैली में अभिव्यक्त किया है वो वास्तव में अदभुत है। इसके अलावा इन्होंने ही तुर्की भाषा में लिखी बाबर की आत्मकथा “तुजके बाबरी” का फारसी में अनुवाद किया। मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक अब्दुल रहीम खानखाना अपने दोहों के जरिये आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

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  7. महादेवी वर्मा

    महादेवी वर्मा छायावाद युग की सबसे महान कवयित्री थीं। ये हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक हैं। इन्होंने अपनी कविताओं से ना केवल पाठकों को ही बल्कि समीक्षकों को भी गहराई तक प्रभावित किया। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण इन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है। हिंदी के महान कवि निराला ने इन्हें हिन्दी के विशाल मन्दिर की सरस्वती के नाम से भी संबोधित किया है। इन्हीं से लोगों को प्रेरणा मिली कि औरतें किसी से कम नहीं होतीं।

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  8. अमीर खुसरो

    अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर खुसरो 14वीं सदी के एक प्रमुख कवि, शायर, गायक और संगीतकार थे। इन्हें खड़ी बोली के आविष्कारक का श्रेय दिया जाता है। ये पहले ऐसे मुस्लिम कवि थे, जिन्होंने हिंदी का खुलकर प्रयोग किया है। ये हिंदी भाषा के साथ-साथ फारसी के कवि भी थे। इसके साथ ही कव्वाली की शैली को पहली बार लोगों के सामने प्रकाशित करने का श्रेय भी अमीर खुसरो को ही जाता है। इन्होंने ही सितार और तबले का आविष्कार किया था।

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  9. गालिब

    मिर्जा असद-उल्लाह बेग खां उर्फ गालिब उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर थे। मिर्जा गालिब को भारत सहित पाकिस्तान में भी एक महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाना जाता है। ये एक ऐसे उर्दू भाषा के सर्वकालिक महान शायर थे, जिन्होंने अन्य शायरों को सिखाया कि शेर सिर्फ मोमीन नहीं बल्कि काफिर भी लिख सकते हैं। इन्हें दबीर-उल-मुल्क और नज्म-उद-दौला के खिताब से नवाजा जा चुका है।

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  10. गुलजार

    सम्पूर्ण सिंह कालरा जो गुलजार नाम से प्रसिद्ध हैं, भारतीय सिनेमा जगत के सबसे प्रसिद्द कवि और गीतकार हैं। इन्होंने हिंदी और उर्दू की कविताओं का मजेदार मिश्रण पाठकों के सामने परोसा है। इसके अतिरिक्त ये एक मशहूर पटकथा लेखक, फिल्म निर्देशक तथा नाटककार भी हैं। इनकी रचनाए मुख्यतः हिन्दी, उर्दू तथा पंजाबी में हैं। लेकिन इसके साथ ही इन्होंने ब्रज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में भी रचनाएं की हैं। इनको वर्ष 2002 में सहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष 2004 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2009 में निर्मित फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर में उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये इन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार तथा ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

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