
धम्मपद
धम्मपद बौद्ध साहित्य का सर्वोत्कृष्ट लोकप्रिय ग्रंथ है। इसमें बुद्ध भगवान् के नैतिक उपदेशों का संग्रह यमक, अप्पमाद, चित्त आदि 26 वग्गों (वर्गों) में वर्गीकृत 423 पालि गाथाओं में किया गया है। त्रिपिटक में इसका स्थान सुत्तपिटक के पाँचवें विभाग खुद्दकनिकाय के खुद्दकपाठादि 15 उपविभागों में दूसरा है। ग्रंथ की आधी से अधिक गाथाएँ त्रिपिटक के नाना सुत्तों में प्रसंगबद्ध पाई जा चुकी हैं। धम्मपद की रचना उपलब्ध प्रमाणों से ई.पू. 300 व 100 के बीच हो चुकी थी, ऐसा माना गया है।
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364 बेहतरीन दर्शनशास्त्र की पुस्तकें
बेहतरीन दर्शनशास्त्र की पुस्तकें: दर्शन वह ज्ञान है जो परम सत्य और प्रकृति के सिद्धांतों और उनके कारणों से संबंधित है। दर्शन वास्तविकता की परीक्षा के लिए एक दृष्टिकोण है। दार्शनिक चिंतन मूल रूप से जीवन के अर्थ की खोज का पर्याय है। Advertisements वास्तव में, दर्शन स्वत्व का विज्ञान है, अर्थात प्रकृति और समाज, […]
