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हृदयवाहिका रोग

हृदय रोग या हृदयनलिका रोग ऐसे रोगों का एक समूह है, जो हृदय या रक्त नलिकाओं (धमनियां और शिराएं) को ग्रस्त करते हैं. हालांकि इस शब्द का संबंध ऐसे किसी भी रोग से है जो हृदयनलिका तंत्र (MeSH C14 में प्रयोग) को प्रभावित करता हो, सामान्यतः इसका प्रयोग मेदकाठिन्य या एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनी के रोग) से संबंधित रोगों के लिये किया जाता है. इन तंत्र और उपचार शर्तों के समान होता है.
व्यवहार में, हृदयनलिका रोग का उपचार हृदयरोगतज्ञों, वक्ष के शल्यचिकित्सकों, रक्तनलिकाओं के शल्यचिकित्सकों, नाड़ीरोगतज्ञों और व्यवधानी रेडियोलाजिस्टों द्वारा किया जाता है, जिनका कार्यक्षेत्र उपचाराधीन अवयव तंत्र पर निर्भर करता है. विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच काफी आपसी आच्छादन होता है और यह आम बात है कि एक ही अस्पताल में कतिपय प्रक्रियाएं भिन्न प्रकार के विशेषज्ञों द्वारा की जाती हैं.
अधिकांश देश हृदयनलिका रोग की उच्च और बढ़ती दरों का सामना कर रहे हैं. प्रति वर्ष कैंसर की अपेक्षा हृदय रोग से कहीं अधिक अमेरिकियों की मृत्यु होती है. पिछले कुछ वर्षों में स्त्रियों में हृदयनलिका रोग का जोखम बढ़ने लगा है और स्तन कैंसर की अपेक्षा अधिक स्त्रियों की मृत्यु इससे हुई है. एक बड़े ऊतकवैज्ञानिक अध्ययन (पीडीएवाई) में देखा गया है कि रक्तनलिकीय विक्षति किशोरवय से जमा होती रहती है, जिससे प्राथमिक रोकथाम के प्रयास बाल्यावस्था से ही किया जाना आवश्यकता हो गया है.जिस समय तक हृदय की समस्याओं का पता चलता है, इसका मूल कारण (मेदकाठिन्य) सामान्यतः काफी बढ़ चुका होता है, क्योंकि वह कई दशकों से उन्नत हो रहा होता है. इसलिये, मेदकाठिन्य की रोकथाम के लिये जोखम कारकों में फेर-बदल लाने पर जोर दिया जा रहा है, जैसे, स्वस्थ भोजन और व्यायाम करके तथा धूम्रपान का त्याग करके.

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