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रहीम

रहीम हिंदी भाषा के बहुत प्रभावशाली कवि थे। ये मुसलमान होकर भी कृष्ण भक्त थे। इनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना था। मुस्लिम धर्म के अनुयायी होते हुए भी रहीम ने अपनी काव्य रचना द्वारा हिन्दी साहित्य की जो सेवा की वह अद्भुत है। रहीम की कई रचनायें प्रसिद्ध हैं। अपनी रचनाओं को इन्होंने दोहों के रूप में लिखा। इन्होंने अपने अनुभवों को जिस सरल शैली में अभिव्यक्त किया है वो वास्तव में अदभुत है। इसके अलावा इन्होंने ही तुर्की भाषा में लिखी बाबर की आत्मकथा “तुजके बाबरी” का फारसी में अनुवाद किया। मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक अब्दुल रहीम खानखाना अपने दोहों के जरिये आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

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