ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में आते ही उन्होंने उपासना के लिए भारत में चर्च बनवाना शुरू किया | धीरे धीरे लोग भी ईसाई धर्म से प्रभावित होकर जीसस की उपासना करने लगे और फिर देश भर में गिरिजाघरों का निर्माण होना शुरू हो गया | दक्षिण भारत में सर्वाधिक मात्रा में इसाई निवास करते हैं और सबसे भव्य गिरिजाघर भी उन्हीं क्षेत्रों में स्थित हैं |
तो आइये आज आपको बताते हैं कि भारतवर्ष में सबसे प्रसिद्ध चर्च कौन कौन से हैं –

  1. वल्लारपदम चर्च, केरल

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    ऑवर लेडी ऑफ रैनसम के नाम भी जाना जाने वाला वल्लारपदम चर्च एर्नाकुलम का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। इसे यहां के लोगों द्वारा प्यार से ईसा की मां मेरी को वल्लार्पदाथाम्मा के नाम से पुकारा जाता है। वल्लारपदम चर्च का निर्माण 1524 में कुछ पुर्तगालियों ने कराया था। हालांकि, दुर्भाग्य से 1676 में एक भारी बाढ़ ने इस चर्च को नष्ट कर दिया था। इसके बाद इस चर्च का पुर्ननिर्माण किया गया था। इसे 1951 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय तीर्थ स्थल का दर्जा दे दिया था। इस चर्च में केरल राज्य के अलावा भी अन्य राज्यों से लोग दर्शन करने आते हैं।

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  2. सांता क्रूज़ बेसिलिका, कोच्चि

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    कोच्चि में स्थित सांता क्रूज कैथेड्रल बेसिलिका भारत में प्रसिद्ध आठ बेसिलिका में से एक है। केरल का यह विरासत भवन भारत में बेहतरीन और भव्य चर्चों में से एक है। यह चर्च भारत का दूसरा सबसे पुराना चर्च है और यहाँ भक्ति का इतिहास, कलात्मकता और वास्तुशिल्प भव्यता शामिल है। यह चर्च भारत के सबसे प्रभावशाली चर्चों में से एक है और पूरे वर्ष के दौर में पर्यटकों द्वारा दौरा किया। यह भक्ति का एक स्थान है और साथ ही ऐतिहासिक महत्व का एक केंद्र है, जिसे वास्तुशिल्प और कलात्मक भव्यता और गॉथिक शैली के रंगों के साथ मिलाया गया है।

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  3. कैथेड्रल ऑफ द सीक्रेट हार्ट, दिल्ली

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    कैथेड्रल ऑफ द सीक्रेट हार्ट दिल्ली, भारत में सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण चर्चों में से एक है। यह चर्च शुद्ध सफेद संगमरमर से बनाया गया है और आध्यात्मिकता का एक शांत, शांत अनुभव प्रदान करता है। यह चर्च केन्द्रीय दिल्ली में यीशु और मैरी और सेंट कोल्बा के कॉन्वेन्ट के दो लोकप्रिय स्कूलों के बीच खड़ा है, जो कि लगभग एक मील का पत्थर है। जब आप दिल्ली में हैं तो वास्तुकला का यह सुंदर हिस्सा निश्चित रूप से एक यात्रा का हकदार है।

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  4. सेंट केथेड्रल चर्च, गोवा

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    गोवा का सेंट केथेड्रल चर्च भारत का सबसे बड़ा चर्च है। ये चर्च अलेक्जेंड्रिया के कैथरीन को समर्पित है। इस चर्च की लंबाई 250 फीट, चौड़ाई 181 फीट और ऊँचाई 115 फीट है। इस चर्च का निर्माण पुर्तगाली शासन में रोमन केथोलिकों द्वारा 16वीं शताब्दी में किया गया था । इसके निर्माण में लगभग 75 वर्ष का समय लगा था। यह चर्च एशिया के सबसे बड़े गिरजाघरों में से एक है। पुर्तगाली शैली के इस भवन की सजावट अपनी भव्यता से दर्शकों का मन मोह लेती है।

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  5. ऑल सेंट कैथेड्रल, इलाहाबाद

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    चर्च ऑफ स्टोन्स के नाम से प्रसिद्ध ऑल सेंट कैथेड्रल चर्च इलाहाबाद में स्थित एंग्लिकन कैथेड्रल चर्च है। 19वीं शताब्दी में निर्मित ये चर्च भारत में अपने शासन के दौरान ब्रिटिश द्वारा निर्मित उत्कृष्ट गौथिक शैली इमारतों में से एक है। इसकी डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार विलियम इमरसन ने तैयार की थी, जिन्होंने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल की डिजाइन भी बनाई थी। यह चर्च इतना बड़ा है कि यहां एक साथ 400 लोग समा सकते हैं। हर साल एक नवंबर को ऑल सेंट डे के मौके पर चर्च का वर्षगांठ मनाया जाता है। इस अवसर पर विशेष प्रार्थना और उत्सव का अयोजन किया जाता है।

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  6. क्राइस्ट चर्च, शिमला

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    हिल स्टेशन शिमला में स्थित राजधानी का ताज कहे जाना वाला क्राइस्ट चर्च उत्तर भारत में मेरठ की सेंट जॉन्स चर्च के बाद दूसरा सबसे पुराना चर्च है। इसकी खूबसूरती आज भी लोगों को लुभाती है। इसका निर्माण 1846 से 1857 के बीच अंग्रेजी शासनकाल की अवधि के दौरान किया गया था। रिज से देखने पर चर्च की खिड़कियाँ रंगीन ग्लासों और ब्रास के सुन्दर टुकड़ों से सजी हुई दिखाई पड़ती हैं। चर्च के स्तंभ पर जो घड़ी है वह सन् 1860 में स्थापित की गई थी। इसके बाद भले की इसकी घड़ी नहीं चल पाई लेकिन यह चर्च दशकों से अपनी पहचान बरकरार रखने में कामयाब हुआ है। पत्थरों पर उत्कृष्ट नक्काशी और रंगीन ग्लासों से सजी सुन्दर खिड़कियाँ इस इमारत को शानदार टच देती हैं।

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  7. सेंट फ्रांसिस चर्च, कोची

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    सेंट फ्रांसिस चर्च केरल के कोच्ची शहर, भारत में स्थित 1503 में निर्मित सबसे प्राचीन यूरोपीय चर्च है। कई हमलों और अनगिनत समझौतों के साक्षी इस चर्च को कोच्चि के सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। ऐसा कहा जाता है कि महान पुर्तगाली नाविक वास्को-डि-गामा को निधन के बाद उन्हें इसी चर्च में दफनाया गया था। यह चर्च मौजूदा समय में काफी प्रसिद्ध है, यहां हर दिन हजारों लोग जाते हैं। यहां कई ऐतिहासिक चीजें मौजूद हैं, जो लोगों को यहां आने के लिए लुभाती हैं।

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  8. वेलंकन्नी चर्च, तमिलनाडु

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    बेस्टिल ऑफ अवर लेडी ऑफ गुड हेल्थ के रूप में जाना जाने वाला वेलंकन्नी चर्च, भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध चर्च है। सितंबर के महीने में यहाँ वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। स्थानीय लोगों के लिए यह त्योहार बहुत महत्व रखता है और वे लोग इसे बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। इस चर्च में प्रति दिन कई पर्यटक चर्च की अप्रतिम सुंदरता को देखने के लिए यहाँ आते हैं।

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  9. सेंट फिलोमेना चर्च, मैसूर

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    सेंट जोसेफ चर्च के नाम से भी जाना जाने वाला सेंट फिलोमेना चर्च कर्नाटक के मैसूर शहर में एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में प्रचलित है। भारत के सबसे ऊंचे चर्चों में से एक इस चर्च का निर्माण कार्य 1933 में महाराजा कृष्णराजा वुडेयार ने शुरू किया था और गौथिक वास्तुशिल्पीय शैली में बनाया गया यह चर्च 1941 में बनकर तैयार हुआ था। चर्च के गर्भ गृह में आप संगमरमर की वेदी पर सेंट फिलोमेना और जीजस क्राइस्ट की प्रतिमा को और चर्च में लगे ग्लास पेंटिंग्स में ईसा मसीह के जन्म से लेकर पुनजर्न्म तक की घटनाओं को देख सकते हैं।

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  10. सेंट पॉल कैथेड्रल, कोलकाता

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    सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च उत्तर भारत के कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित चर्च है, जो अपने इतिहास, संस्कृति और धार्मिक प्रासंगिकता के लिए देश भर में प्रसिद्ध है। शहर का प्रमुख और ऐतिहासिक स्थल होने की वजह से हर साल यहाँ हर दिन पूरे विश्व से हज़ारों की संख्या में पर्यटक इसके दर्शन को आते हैं। सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च कोलकाता का सबसे बड़ा चर्च है और इसके साथ ही साथ यह यहाँ का सबसे पहला चर्च भी है जिसे ब्रिटिश साम्राज्य के विदेशी क्षेत्र में बनाया गया था। चर्च के अंदर का माहौल बड़ा ही सुखद है और यह आपको शोर शारबों और अराजक तत्वों को भूल एक सुखी और शांत वातावरण का अनुभव प्रदान करता है।

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