धार्मिक विविधिताओं के देश भारत में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-इसाई-आपस में हैं भाई-भाई | सिख धर्म के पवित्र स्थल गुरूद्वारे में लोग मत्था टेकने और वाहे गुरुजी से अपनी मुरादें मांगने आया करते हैं | गुरुद्वारों की एक खास बात और होती हैं कि यहाँ प्रतिदिन 24 घंटे लंगर (प्रसाद-भोजन) की व्यवस्था रहती है जिससे कि दर पे आया कोई भी बंदा भूखा न रहे | कई स्थानों पर तो गरीबों के लिए दो वक्त के खाने का सहारा गुरूद्वारे का लंगर ही होता हैं |

  1. हरि मंदिर साहिब, पंजाब

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    पंजाब के अमृतसर में स्थित श्री हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारा जिसे दरबार साहिब या स्वर्ण मन्दिर भी कहा जाता है, सिख धर्म के लोगों का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। सिखों के पांचवें गुरु अर्जुनदेव जी ने स्वर्ण मंदिर (श्री हरिमंदिर साहिब) का निर्माण शुरू कराया था। गोल्डन टेंपल के नाम से भी जाना जाने वाला यह देश का एक प्रमुख तीर्थस्थल है और यहां पूरे साल बड़ी संख्या में श्रद्धालू आते हैं। मंदिर में चार प्रवेश द्वार हैं, जो मानवीय भाईचारे और समानता का संदेश देते हैं। भले ही इस मंदिर का महत्व सिक्ख धर्म में हो, पर अमृतसर आने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटक भी इससे दूर नहीं रह पाते हैं।

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  2. हजूर साहिब गुरुद्वारा, महाराष्ट्र

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    महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में स्थित हुजुर साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा गोदावरी नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित है। हजूर साहिब गुरुद्वारा सिख धर्म के पाँच सत्ता के सिंहासन में से एक का घर है, जिसे सच-खण्ड कहा जाता है। महाराष्ट्र का नांदेड़ एक अनाम सा शहर था जो गुरु जी के साथ जुड़ने के बाद सचमुच अमर हो गया। सिख पंथ के 10वें और आखिरी गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने अपने अन्तिम कुछ महीने इस स्थान पर गुजारे थे। हुजुर साहिब का ये ऐतिहासिक गुरुद्वारा वास्तुकला और धार्मिक प्रथाओं का सर्वश्रेष्ठ वैशिष्ट्य दर्शाता है।

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  3. श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड

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    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड साहिब या गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जी सिखों का एक धार्मिक स्थल है। यह हिमालय में 4632 मीटर की ऊँचाई पर एक बर्फ़ीली झील किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है। हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा सिख गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है और इसका उल्लेख 10वें ग्रंथ में भी है जो कि स्वयं गुरु जी द्वारा लिखी गई है। 10वें ग्रंथ में गुरु ने अपने जन्म के बारे में घटना बताई है कि हेमुकंड की नदी के पास ही जब उन्होंने अपने ध्यान और तपस्या द्वारा भगवान का स्मरण कर लिया था तो भगवान ने उन्हें धरती पर जन्म लेने को कहा ताकि वह लोगों तक आस्था और धर्म का सही मतलब पहुंचा सकें और लोगों को बुराइयों से बचने का सही रास्ता बता सकें।

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  4. बाबा अटल साहिब, पंजाब

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    स्वर्ण मंदिर के करीब स्थित बाबा अटल साहिब गुरुद्वारा अमृतसर के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है। 1778-1784 में निर्मित, यह पंजाब की संस्कृति और परंपरा की समृद्ध सुंदरता को शामिल करता है। माना जाता है कि गुरु हरगोविंद ने गुरुद्वारा बाबा अटल साहिब में अपनी अंतिम सांस ली, जिसे बाबा अटल राई टॉवर भी कहा जाता है। टावर का नाम गुरु हरगोबिन्द के पुत्र के नाम पर है और ये नौ मंजिला इमारत जीवंत वास्तुशिल्प सौंदर्य में उत्कीर्ण है। लाखों तीर्थयात्री जो हरिमंदिर साहिब की यात्रा करते हैं, उनमें से कई यह नहीं जानते हैं कि ये गुरुद्वारा अमृतसर के सबसे बेहतरीन वास्तुकला के चमत्कारों में से एक है और सिख धर्मों में सबसे मार्मिक पूजा स्थलों में से एक है।

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  5. गुरुद्वारा रिवालसर साहिब, हिमाचल प्रदेश

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    हिमाचल प्रदेश के मंडी क़स्बे में स्थित रिवालसर गुरूद्वारा सिखों के 10वें गुरू गोविंद सिंह को समर्पित एक प्राचीन तीर्थ है। कहा जाता है कि यहां सिख समुदाय ने एकत्र होकर मुगल शासक औरंगजेब से लड़ाई लड़ी थी। यहां एक बड़ा सरोवर और सरोवर के निकट ही गुरु पद्मसम्भव द्वारा स्थापित 'मानी-पानी' नामक बौद्ध मठ भी स्थित है। गुरूद्वारा पत्थर से बना है और 108 सीढ़ियों पर चढ़ कर इसके दर्शन किये जा सकते हैं। लोग इस श्रद्धा को महान भक्ति के साथ देखते हैं। यह बौद्धों के लिए भी एक पवित्र स्थान है, इसीलिए यहां स्थित बौद्ध मंदिर के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए तिब्बत से बहुत से लोग तीर्थ यात्रा पर आते हैं।

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  6. श्री पटना साहिब, बिहार

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    पटना शहर में स्थित तख्त श्री पटना साहिब या श्री हरमंदिर जी पटना साहिब सिख आस्था से जुड़ा यह एक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है। सिख धर्म के अनुयाइयों के लिए स्वर्ण मंदिर श्री हरिमंदिर साहिब के बाद दूसरे नंबर पर तख्त श्री पटना साहिब सबसे पवित्र स्थल है। पटना साहिब का सिख पंथ के मानने वालों में विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह का जन्म हुआ था। यहाँ गुरु गोविंद सिंह से संबंधित अनेक प्रमाणिक वस्‍तुएँ रखी हुई है। भारत और पाकिस्तान में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे की तरह, इस गुरुद्वारा को महाराजा रणजीत सिंह द्वारा बनाया गया था। प्रकाशोत्‍सव के अवसर पर हर साल यहाँ पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है।

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  7. बंगला साहिब, नई दिल्ली

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    नई दिल्ली में स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है। यह गुरूद्वारा सिक्खों के 8वें गुरू गुरू हरकिशन से जुड़े होने के कारण प्रसिद्ध है। इस गुरूद्वारे में एक 'सरोवर' नामक प्रसिद्ध तालाब है जिसके पानी को सिक्ख समुदाय के सदस्यों द्वारा 'अमृत' (पवित्र जल) कहा जाता है। इसी तालाब के जल से गुरु महाराज ने उस समय लोगों में फैली हुई स्माल पॉक्स और हैजा जैसी बिमारियां ठीक कर दी थीं। हर दिन हजारों लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ सिख ही यहां आते हैं बल्कि अलग-अलग धर्म और संप्रदाय को मानने वाले लोग भी इस पवित्र स्थान पर माथा टेकने आते हैं। गुरुद्वारा बंगला साहिब के बेसमेंट में बनी आर्ट गैलरी देखना तो बनता है। यहां सिख इतिहास से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का बेहतरीन चित्रण किया गया है।

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  8. पत्थर साहिब, लद्दाख

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    जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में स्थित गुरुद्वारा पत्थर साहिब गुरू नानक की याद में निर्मित एक सुंदर गुरुद्वारा है। यह गुरुद्वारा सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु नानक देव जी की स्मृति में बनाया गया था। गुरु नानक देव की लद्दाख क्षेत्र की यात्रा को मनाने के लिए 1517 में इस गुरूद्वारे को बनाया गया था। अपने जीवन काल के दौरान गुरु नानक जी ने कई स्थानों की यात्रा की थी। तिब्बती बौद्ध भी गुरु नानक जी को गुरु गोमका महाराज के रूप में और नानक लामा के रूप में पूजा करते हैं।

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  9. फतेहगढ़ साहिब, पंजाब

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    पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिला में स्थित गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब सिखों का एक मुख्य धार्मिक स्थल है। यह जिला सिक्‍खों की श्रद्धा और विश्‍वास का प्रतीक है। यहीं पर वर्ष 1704 में साहिबज़ादा फतेहसिंह और साहिबज़ादा जोरावर सिंह को सरहिंद के फौजदार वज़ीर खान के आदेश पर दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया था। साहिबज़ादा फतेहसिंह और साहिबज़ादा जोरावर सिंह अंतिम बार यहीं खड़े हुए थे और इसी स्थान पर उन्‍होंने अंतिम सांस ली थी। यह गुरुद्वारा उन्हीं की शहादत की याद में बनाया गया था। आज भी यहां लोग उनका शहीदी दिवस पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

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  10. पोंटा साहिब, हिमाचल प्रदेश

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    भारत के हिमाचल प्रदेश में स्थित पोंटा साहिब गुरुद्वारा सिख संप्रदाय के लिए बहुत जाना माना तीर्थ माना जाता है। माना जाता है कि इसी जगह पर सिखों के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने सिख धर्म के शास्त्र दसम् ग्रंथ या 'दसवें सम्राट की पुस्तक 'का एक बड़ा हिस्सा लिखा था। स्थानीय लोगों के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह यहां लगभग 4 साल तक रुके थे। इसी स्थान पर उन्होंने बहुत से धर्मग्रंथों की रचना की थी। यहाँ एक म्यूजियम भी है जिसमें गुरु गोबिन्द सिंह जी का इस्तेमाल किया हुआ सामान भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है।

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