Change Language to English

सी वी रामन

सीवी रामन (तमिल: சந்திரசேகர வெங்கட ராமன்) (7 नवंबर, 1888 – 21 नवंबर, 1970) भारतीय भौतिक-शास्त्री थे। प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिये वर्ष 1930 में उन्हें भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया। उनका आविष्कार उनके ही नाम पर रामन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। 1954 ई. में उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया तथा 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया था। आपने शिक्षार्थी के रूप में कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। सन् 1906 ई. में आपका प्रकाश विवर्तन पर पहला शोध पत्र लंदन की फिलसोफिकल पत्रिका में प्रकाशित हुआ। उसका शीर्षक था – ‘आयताकृत छिद्र के कारण उत्पन्न असीमित विवर्तन पट्टियाँ’। जब प्रकाश की किरणें किसी छिद्र में से अथवा किसी अपारदर्शी वस्तु के किनारे पर से गुजरती हैं तथा किसी पर्दे पर पड़ती हैं, तो किरणों के किनारे पर मद-तीव्र अथवा रंगीन प्रकाश की पट्टियां दिखाई देती है। यह घटना `विवर्तन’ कहलाती है। विवर्तन गति का सामान्य लक्षण है। इससे पता चलता है कि प्रकाश तरगों में निर्मित है।

आप सन् 1924 ई. में अनुसंधानों के लिए रॉयल सोसायटी, लंदन के फैलो बनाए गए। रामन प्रभाव के लिए आपको सन् 1930 ई. मे नोबेल पुरस्कार दिया गया। रामन प्रभाव के अनुसंधान के लिए नया क्षेत्र खुल गया।

1948 में सेवानिवृति के बाद उन्होंने रामन् शोध संस्थान की बैंगलोर में स्थापना की और इसी संस्थान में शोधरत रहे। 1954 ई. में भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया। आपको 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार भी प्रदान किया था।

28 फरवरी 1928 को चन्द्रशेखर वेंकट रामन् ने रामन प्रभाव की खोज की थी जिसकी याद में भारत में इस दिन को प्रत्येक वर्ष ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

सी वी रामन के बारे मे अधिक पढ़ें

सी वी रामन को निम्न सूचियों मे शामिल किया गया है :

Leave a Comment