क्या आप जानते हैं कि स्विस विदेश मंत्रालय के अनुसार लगभग 9000 करोड़ रुपये स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किये जा चुके हैं। भारतीय राजनीतिक दलों और मीडिया द्वारा स्विस बैंकों में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये या इससे अधिक होने का दावा है। वहीँ भारत सरकार ने दावा किया है कि वर्ष 2019 तक भारत स्विस बैंक में भारतीयों द्वारा जमा किये गये काले धन धारकों तक पहुंच सकता है। पहले इन बैंकों के साथ मुख्य मुद्दा ये था कि वो अपने पास क्लाइंट की गोपनीयता किसी के साथ साझा नहीं कर सकते हैं। इसका मतलब था कि इन बैंकों में दुनिया में किसी को भी यहां की नकद जानकारी या खाताधारकों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में पता नहीं चलेगा। अंतर्राष्ट्रीय दबाव और कई प्रयासों के बाद देश अंततः स्विस बैंकों में खाताधारकों के विवरण साझा करने पर सहमत हो गया है। इसीलिए आज हम आपके लिए स्विस बैंकों में रखे भारतीय कालेधन के बारे में और अधिक महत्वपूर्ण तथ्यों को लेकर आये हैं। ये आश्चर्यजनक है कि वर्ष 2012 तक स्विस बैंकों में भारतीयों के 9,000 करोड़ रुपये या 2 अरब रुपये से ज्यादा भारतीय रुपयों का आंकलन किया जा चुका है। स्विस नेशनल बैंक के अनुसार इन भारतीयों खातों को आयोजित किया गया है। इस आंकड़े की विदेश मंत्रालय के स्विस मंत्रालय ने पुष्टि की है। हालांकि, विश्व स्तर पर स्विस बैंकों में जमा कुल राशि 90 लाख करोड़ रुपये है।

  • स्विस बैंकों में लगभग 2 अरब से अधिक की राशि भारतीय संस्थाओं के व्यक्तियों द्वारा जमा किया गया है। वहीँ शेष 70 मिलियन स्विस फ्रैंक धन प्रबंधकों द्वारा जमा किया गया है।
  • वर्ष 2001 से 2008 के अंतर्गत भारत से बाहर जमा किये गये ब्लैकमनी की राशि 100 अरब डॉलर से अधिक थी। जो कि कालेधन की एक बहुत बड़ी संख्या है। इसीलिए विकासशील देशों में भारत 8वें स्थान पर है। ग्लोबल फाइनेंशियल इंटिग्रिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अवैध धन 1 अरब डॉलर से अधिक है।
  • ग्लोबल फाइनेंसियल इंटीग्रिटी ने भी बताया है कि अभी तक 240 बिलियन डॉलर ब्लैकमनी भारत से बाहर भेजा जा चुका है। भारत की आजादी से लेकर वर्ष 2010 तक भारत में अवैध संपत्ति और कालाधन 400 अरब डॉलर से भी ज्यादा है। जो कि एक कम विकसित देश के लिए बहुत ज्यादा पैसा है।
  • हमारे देश की ब्लैकमनी का केवल 20% ही देश में है। जबकि शेष 80% कालाधन विदेशों में है। इसके अलावा हमारे देश के लगभग 75% ब्लैकमनी धारक भी विदेशों में ही हैं।
  • ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के द्वारा वर्ष 2012 में जारी किये गये भ्रष्टाचार सूचकांक में 176 देशों में से भारत 94वें स्थान पर था। इस सूची में कोलंबिया, जिबूती, बेनिन, मोल्दोवा, मंगोलिया, ग्रीस, और सेनेगल जैसे देश मौजूद थे।
  • 50% से अधिक भारतीयों को सार्वजनिक कार्यालयों में उनके कार्यों को पूरा करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। वर्ष 2005 में ये आंकड़ा 60% से अधिक था।
  • वर्ष 2012 में एक सर्वेक्षण आयोजित किया गया था। जिसके द्वारा भारत सरकार अज्ञात आय में 8000 करोड़ रुपये का पता लगाने में सक्षम हुई थी। वहीँ कुछ साल पहले ये आय 6000 करोड़ रुपये थी।
  • रियल एस्टेट उद्योग सबसे बड़ा क्षेत्र है जो कि अवैध धन की उच्चतम राशि धारण करता है। इनके द्वारा किये गये अधिकांश लेन-देन की रिपोर्ट नहीं दी जाती है। इसके अलावा रियल एस्टेट उद्योग जीडीपी में करीब 11% का योगदान देता है।
  • कर मामलों में 50 से अधिक देशों ने पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर बहुपक्षीय कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं। अब स्विट्जरलैंड में ब्लैकमनी जमा करने के लिए बैंकों को अपने खाते धारकों के विवरण साझा करने पड़ेंगे जो अपने बैंकों में खाते रखते हैं।