अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के बारे में दिलचिस्प और खास बातें | Facts About Ayodhya Ram Mandir-Babri Masjid |

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस के लगभग तीन दशक होने को हैं। 6 दिसंबर 1992 को लाखों हिंदू कार सेवकों द्वारा बाबरी मस्जिद के ढ़ांचे को ढहा दिया गया था। ये एक ऐसी घटना थी जिसने पूरे देश के धार्मिक सौहार्द को हिलाकर रख दिया था। इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं हुईं। जिसमें करीब 2,000 लोग मारे गए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटकर विवाद का निपटारा तो कर दिया था, लेकिन ये विवादित मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में है।
इस मौके को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शौर्य दिवस यानी विजय दिवस वहीं मुस्लिम संगठनों ने इस दिन को यौम-ए-गम यानी दुख का दिन के तौर पर मनाने का एलान किया है। हिन्दू कहते हैं कि यहां राम मंदिर बनना चाहिए तो मुस्लिम कहते हैं कि यहां मस्जिद बननी चाहिए। इसीलिए बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि भूमि पर विवाद का मुकदमा आज भी लंबित है। तो आइये आज ज्वलंत मुद्दे से जुड़ी 10 बड़ी बातें जानते हैं।

1. अयोध्या में स्थित इस मस्जिद को भारत के प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बनाया गया था। इस मस्जिद का निर्माण वर्ष 1528 में किया गया था। हिंदू समूहों का दावा है कि मंदिर को ध्वस्त करने के बाद इसे बनाया गया था।

2. 1853 में यहां पर पहला सांप्रदायिक संघर्ष हुआ। जिसके बाद 1859 में ब्रिटिश प्रशासन ने हिंदुओं और मुसलमानों के पूजा के अलग-अलग क्षेत्रों को चिह्नित करने वाले स्थल के आसपास एक बाड़ लगाया था। जो लगभग 90 वर्षों के लिए खड़ा रहा था।

3. अयोध्या का ये मंदिर-मस्जिद विवाद सबसे पहले वर्ष 1949 में अदालत की चौखट पर पहुंचा था। क्योंकि भगवान राम की मूर्तियों को मस्जिद में रखा गया था।

4. महंत रामचंद्र दास परमहंस जो उस समय के महंत थे, उन्होंने भगवान राम की पूजा करने इजाजत देने के लिए  न्यायालय पहुंचे थे। जिसके बाद बाबरी मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर करीब 50 हिंदूओं ने कथित तौर पर रामलला की मूर्ति रख दी थी। जिसके बाद यहां उनकी पूजा अर्चना शुरू हो गई और मुसलमानों ने यहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया।

5. इसके बाद हाशिम अंसारी ने अदालत में याचिका दाखिल करके बाबरी मस्जिद में रखी मूर्तियां हटाने के आदेश देने का आग्रह किया। हाशिम अंसारी ही इकलौते ऐसे शख्स थे जो 1949 में इस मस्जिद में रामलला की मूर्तियां रखे जाने के गवाह थे। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को खुद देखा था।

6. 6 दिसंबर, 1992 को हजारों हिंदू स्वयंसेवकों या कारसेवकों द्वारा के बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया। ये दावा करते हुए कि ये भगवान राम के जन्मस्थान को चिह्नित करने वाले मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया था। जिसके बाद कई स्थानों पर सांप्रदायिक दंगे हुए।

7. इसी वर्ष 27 फरवरी को गुजरात में गोधरा में लगभग 60 लोग मारे गए थे। माना जाता है कि ट्रेन के कई डिब्बों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें अयोध्या से हिंदू स्वयंसेवक वापस लौट रहे थे। जिसके बाद गुजरात राज्य में इन दंगों ने और भयंकर रूप धारण कर लिया। जिसमें 1000 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई।

8. वर्ष 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संबंध में फैसला सुनाया था। न्यायालय ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था। इस फैसले में कहा गया था कि 2.77 एकड़ क्षेत्र का दो-तिहाई क्षेत्र हिंदू संगठनों को दिया जायेगा और शेष उत्तरप्रदेश के सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड के पास रहेगा। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी।

9. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हिंदू और मुस्लिम दोनों संगठन नाखुश थे। इसलिए इन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ अपील दायर की। मार्च 2017 में शीर्ष अदालत ने इस मामले पर ये सुझाव दिया था कि इस मामले को न्यायिक फैसले की बजाय वार्ता के माध्यम से सबसे अच्छा हल किया गया जा सकता है।

10. मई 2017 में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लखनऊ में अदालत का सामना करना पड़ा था। क्योंकि उन पर इस मामले की आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था। उन्होंने तर्क दिया था कि विध्वंस में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और उन्होंने इसे रोकने की कोशिश की थी।

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